लंदन,20 जुलाई (युआईटीवी)- लॉर्ड्स के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान पर खेला गया भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरा और निर्णायक एकदिवसीय मुकाबला रोमांच,आक्रामक बल्लेबाजी और रिकॉर्डतोड़ साझेदारियों से भरपूर रहा। दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने मैदान के चारों ओर शानदार शॉट्स लगाते हुए रनों की झड़ी लगा दी,लेकिन अंत में मेजबान इंग्लैंड ने भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने भी जोरदार संघर्ष किया और जीत के करीब पहुँचती दिखाई दी,लेकिन अंतिम चरण में लगातार विकेट गिरने के कारण वह निर्धारित 50 ओवरों में सात विकेट पर 360 रन ही बना सकी। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद शानदार रही। सलामी बल्लेबाज बेन डकेट और जैकब बेथेल ने भारतीय गेंदबाजों को शुरुआत से ही दबाव में रखा। दोनों बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए पहले विकेट के लिए 181 गेंदों में 192 रन की बड़ी साझेदारी की। इस साझेदारी ने इंग्लैंड को मजबूत मंच प्रदान किया और भारतीय गेंदबाज पूरे शुरुआती चरण में विकेट के लिए संघर्ष करते रहे।
जैकब बेथेल ने अपने करियर की यादगार पारियों में से एक खेलते हुए 93 गेंदों में 91 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और दो शानदार छक्के शामिल रहे। शतक से चूकने के बावजूद उन्होंने टीम को ऐसी शुरुआत दी,जिसने इंग्लैंड की विशाल स्कोर की नींव रख दी। उनके आउट होने के बाद भी रन गति में कोई कमी नहीं आई क्योंकि बेन डकेट ने दूसरे छोर से शानदार बल्लेबाजी जारी रखी।
बेन डकेट ने अनुभवी बल्लेबाज जो रूट के साथ दूसरे विकेट के लिए 80 गेंदों में 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। डकेट ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ पूरे मैदान में आकर्षक शॉट लगाए और 135 गेंदों में 141 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में 19 चौके शामिल रहे। उन्होंने शुरुआत से लेकर अपने आउट होने तक इंग्लैंड की पारी को मजबूती से सँभाले रखा और भारत के लिए वापसी की संभावनाओं को लगातार मुश्किल बनाते रहे।
डकेट के पवेलियन लौटने के बाद जो रूट ने जिम्मेदारी सँभाली और अंत तक नाबाद रहते हुए टीम को बड़े स्कोर तक पहुँचाया। उन्होंने कप्तान हैरी ब्रूक के साथ तीसरे विकेट के लिए 31 रन जोड़े। हालाँकि,ब्रूक बड़ी पारी नहीं खेल सके और 14 रन बनाकर आउट हो गए,लेकिन इसके बाद जो रूट और जोस बटलर ने अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों पर जोरदार हमला बोला।
रूट ने 48 गेंदों में नौ चौकों की मदद से नाबाद 74 रन बनाए और एक बार फिर अपनी क्लास का परिचय दिया। दूसरी ओर जोस बटलर ने केवल 13 गेंदों में तीन छक्कों और चार चौकों की मदद से नाबाद 41 रन की विस्फोटक पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए केवल 19 गेंदों में 63 रन जोड़कर इंग्लैंड के स्कोर को 387 रन तक पहुँचा दिया। अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाज पूरी तरह दबाव में दिखाई दिए और इंग्लैंड ने बड़े स्कोर के साथ भारत के सामने कठिन चुनौती रख दी।
भारत की ओर से गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा सबसे सफल रहे। उन्होंने दो विकेट हासिल किए,जबकि प्रिंस यादव को एक विकेट मिला। हालाँकि,अन्य गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं बना सके और उन्हें लगातार रन खर्च करने पड़े।
388 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने भी दमदार शुरुआत की। कप्तान शुभमन गिल और रोहित शर्मा ने पहले विकेट के लिए 24.2 ओवरों में 147 रन की शानदार साझेदारी कर मैच को पूरी तरह रोमांचक बना दिया। दोनों बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के तेज और स्पिन गेंदबाजों का आत्मविश्वास के साथ सामना किया और नियमित अंतराल पर चौके-छक्के लगाते रहे।
शुभमन गिल ने 84 गेंदों में 77 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 11 चौके लगाए और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। हालाँकि,वह बड़ी पारी को शतक में नहीं बदल सके,लेकिन उनके योगदान ने भारत को लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ाया।
गिल के आउट होने के बाद रोहित शर्मा ने विराट कोहली के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। दोनों अनुभवी बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 86 गेंदों में 113 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस दौरान भारत जीत की दौड़ में मजबूती से बना हुआ था और ऐसा लग रहा था कि टीम लक्ष्य हासिल कर सकती है।
रोहित शर्मा ने कप्तानी पारी खेलते हुए 110 गेंदों में 138 रन बनाए। उनकी शानदार पारी में 17 चौके और पाँच छक्के शामिल रहे। उन्होंने शुरुआत से लेकर अंत तक आक्रामक बल्लेबाजी की और इंग्लैंड के हर गेंदबाज पर दबाव बनाए रखा। यह उनकी सबसे प्रभावशाली पारियों में से एक रही,लेकिन वह अपनी टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सके।
रोहित के आउट होने के बाद विराट कोहली ने पारी सँभालने की कोशिश की। उन्होंने ईशान किशन के साथ तीसरे विकेट के लिए 29 गेंदों में 44 रन जोड़े। कोहली ने 60 गेंदों में सात चौकों की मदद से 74 रन बनाए और भारत को मुकाबले में बनाए रखा। हालाँकि,उनके आउट होते ही भारतीय पारी लड़खड़ा गई और लगातार विकेट गिरने लगे।
ईशान किशन केवल 14 रन का योगदान दे सके,जबकि निचले क्रम के बल्लेबाज अपेक्षित तेजी से रन नहीं बना पाए। गुरनूर बरार ने अंत तक संघर्ष करते हुए नाबाद 18 रन बनाए,लेकिन तब तक जीत भारत की पहुँच से दूर जा चुकी थी। निर्धारित 50 ओवरों में भारतीय टीम सात विकेट पर 360 रन ही बना सकी और 27 रन से मुकाबला हार गई।
इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी में सैम करन ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने चार महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारत की मजबूत बल्लेबाजी को निर्णायक समय पर झटका दिया। जोफ्रा आर्चर,आदिल रशीद और जैकब बेथेल को भी एक-एक विकेट मिला। विशेष रूप से सैम करन ने मध्यक्रम में लगातार विकेट लेकर भारत की जीत की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया।
इस जीत के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला 2-1 से अपने नाम कर ली। पूरी श्रृंखला में दोनों टीमों ने आक्रामक क्रिकेट का प्रदर्शन किया,लेकिन निर्णायक मुकाबले में इंग्लैंड ने महत्वपूर्ण मौकों का बेहतर फायदा उठाया। बेन डकेट की शानदार शतकीय पारी,जो रूट और जोस बटलर की विस्फोटक बल्लेबाजी तथा सैम करन की प्रभावी गेंदबाजी ने मेजबान टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर रोहित शर्मा और विराट कोहली की शानदार पारियाँ भारत को जीत नहीं दिला सकीं। इस हाई स्कोरिंग मुकाबले ने क्रिकेट प्रेमियों को भरपूर रोमांच दिया और लॉर्ड्स के मैदान पर खेला गया यह मैच लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
