ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

अमेरिका-ईरान संघर्ष और गहराया,विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले- मजबूत स्थिति मिलने तक नहीं रुकेगी लड़ाई

तेहरान,20 जुलाई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष लगातार और गंभीर होता जा रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए,जबकि दूसरी ओर ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अपने हमले जारी रखे हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में युद्ध को रोकने का सवाल तभी उठेगा,जब ईरान खुद को संघर्ष में मजबूत स्थिति में महसूस करेगा। उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना फिलहाल बेहद सीमित दिखाई दे रही है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए एक साक्षात्कार में अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल तभी संभव है, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो,जहाँ उसे लगे कि परिस्थितियां उसके पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सैन्य संघर्ष का अंत आमतौर पर दो तरीकों से होता है। पहला तब,जब किसी एक पक्ष को निर्णायक सैन्य जीत हासिल हो जाए और दूसरा तब, जब दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुँचे। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत केवल तभी प्रभावी होती है,जब वार्ता की मेज पर बैठने वाला पक्ष स्वयं को मजबूत स्थिति में महसूस करे। उनके अनुसार जल्दबाजी में बातचीत शुरू करना किसी भी देश के हित में नहीं होता।

विदेश मंत्री ने अपने बयान में राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि किसी भी सरकार का पहला दायित्व अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश के भविष्य की रक्षा करना होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भावनाओं के बजाय ठोस जानकारी, सैन्य स्थिति और रणनीतिक आकलन के आधार पर निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लगातार इस बात का मूल्यांकन करना चाहिए कि युद्ध जारी रखने से देश को लाभ अधिक हो रहा है या नुकसान। यदि किसी समय यह महसूस हो कि नुकसान लगातार बढ़ रहा है और राष्ट्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं,तो उसी के अनुरूप आगे की रणनीति तय की जानी चाहिए।

अब्बास अराघची ने यह भी दावा किया कि युद्ध के दौरान कुछ नुकसान झेलने के बावजूद ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली और मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरा है। उनके अनुसार इस संघर्ष ने ईरान की सैन्य क्षमता,रणनीतिक धैर्य और क्षेत्रीय प्रभाव को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव में झुकने वाला देश नहीं है और वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।

इस बीच अमेरिकी सेना ने भी ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार लगातार नौवीं रात किए गए हमलों में ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में सैन्य कमांड सेंटर,वायु रक्षा प्रणाली,मिसाइल लॉन्चिंग सुविधाएँ और ड्रोन संचालन केंद्र शामिल थे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में अमेरिकी तथा उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरीज क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण मिसाइल परिसर भी हमलों की चपेट में आया। इस हमले के बाद वहाँ आग लगने की खबर सामने आई। बताया गया कि इस मिसाइल परिसर का संचालन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एयरोस्पेस इकाई द्वारा किया जाता है। इस ठिकाने को ईरान की मिसाइल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालाँकि,ईरानी अधिकारियों की ओर से इस हमले में हुए नुकसान का विस्तृत आधिकारिक आँकड़ा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

युद्ध के बीच अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि उत्तरी इराक में एक बिना फटे ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने के अभियान के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इस घटना में एक अन्य सैनिक घायल भी हुआ है, जिसका इलाज जारी है। इस ताजा घटना के बाद मौजूदा संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने मृत सैनिक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि क्षेत्र में तैनात सभी सैनिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीतिक,आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति,समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। हालाँकि,ईरान के विदेश मंत्री के हालिया बयान से यह संकेत मिला है कि फिलहाल तेहरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है और वह पहले युद्धक्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता है। दूसरी ओर अमेरिका भी अपने सैन्य अभियानों को जारी रखते हुए ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों पक्ष अपने-अपने रणनीतिक उद्देश्यों से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में युद्ध के जल्द समाप्त होने की संभावना कम दिखाई देती है। यदि आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और तेज होती है,तो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों की भी परीक्षा होगी कि क्या वे दोनों देशों को बातचीत की मेज तक ला पाते हैं या संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले लेता है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह टकराव केवल दो देशों का सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है,बल्कि यह पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति और वैश्विक समुदाय की कूटनीतिक पहल इस संघर्ष की दिशा और उसके संभावित परिणाम तय करेगी।