नई दिल्ली,11 जुलाई (युआईटीवी)- दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र की अग्रणी कंपनी ओपनएआई के बीच कानूनी विवाद गहरा गया है। एप्पल ने ओपनएआई और उसके हार्डवेयर प्रमुख के खिलाफ कैलिफोर्निया के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मुकदमा दायर करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। कंपनी का दावा है कि ओपनएआई ने सुनियोजित तरीके से उसके आगामी हार्डवेयर उत्पादों से जुड़ी गोपनीय जानकारी, तकनीकी दस्तावेज, डिजाइन और इंजीनियरिंग सामग्री हासिल करने की कोशिश की। एप्पल ने अदालत से माँग की है कि कथित रूप से प्राप्त सभी गोपनीय दस्तावेजों को नष्ट कराया जाए और जिन उत्पादों में इन जानकारियों का इस्तेमाल किया गया है,उन्हें दोबारा डिजाइन करने का निर्देश दिया जाए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,एप्पल ने अपने मुकदमे में आरोप लगाया है कि ओपनएआई के मुख्य हार्डवेयर अधिकारी टैंग टैन ने नौकरी के इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया के दौरान एप्पल के कर्मचारियों को कंपनी के आने वाले उत्पादों से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। एप्पल का कहना है कि इसमें नए उत्पादों के कंपोनेंट्स,तकनीकी ड्रॉइंग,इंजीनियरिंग दस्तावेज और अन्य संवेदनशील सामग्री शामिल थी,जिन्हें कंपनी का व्यापारिक रहस्य माना जाता है।
टैंग टैन पहले लंबे समय तक एप्पल में कार्यरत रहे हैं। वह कंपनी में प्रोडक्ट डिजाइन के उपाध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं और आईफोन,एप्पल वॉच,एयरपॉड्स सहित कई प्रमुख हार्डवेयर उत्पादों के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। एप्पल का आरोप है कि कंपनी छोड़ने के बाद उन्होंने अपने नए पद का इस्तेमाल करते हुए एप्पल के कर्मचारियों तक पहुँच बनाई और उन्हें गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया।
मुकदमे में पूर्व आईफोन हार्डवेयर इंजीनियर चांग लियू का नाम भी शामिल किया गया है। एप्पल का आरोप है कि चांग लियू ने ओपनएआई के लिए हार्डवेयर विकास से जुड़े कार्यों के दौरान गैरकानूनी तरीके से एप्पल की दर्जनों गोपनीय हार्डवेयर फाइलों तक पहुंच बनाई। कंपनी के अनुसार इन फाइलों में अभी तक बाजार में लॉन्च नहीं किए गए उत्पादों से संबंधित विस्तृत तकनीकी जानकारियां, इंजीनियरिंग प्रस्तुतियाँ,डिजाइन योजनाएँ और अन्य अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज शामिल थे।
एप्पल ने अदालत में यह भी दावा किया है कि यह केवल एक कर्मचारी तक सीमित मामला नहीं है,बल्कि ओपनएआई की ओर से व्यवस्थित रूप से ऐसी रणनीति अपनाई गई,जिसके तहत एप्पल के कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने से पहले या नौकरी छोड़ते समय ऐसे कदम उठाने की सलाह दी गई,ताकि कंपनी के गोपनीय दस्तावेजों और डिजिटल फाइलों तक उनकी पहुँच बनी रहे। एप्पल का कहना है कि यह व्यापारिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
हालाँकि,ओपनएआई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसे किसी दूसरी कंपनी के व्यापारिक रहस्यों या गोपनीय तकनीकों में कोई रुचि नहीं है। ओपनएआई ने अपने बयान में कहा कि उसका पूरा ध्यान ऐसी नई तकनीक विकसित करने पर है,जो दुनिया भर के लोगों को सशक्त बनाए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ाए। कंपनी ने संकेत दिया कि वह अदालत में इन आरोपों का कानूनी रूप से जवाब देगी।
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में एप्पल और ओपनएआई के बीच घनिष्ठ व्यावसायिक संबंध रहे हैं। एप्पल ने अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं और डिजिटल सहायक सिरी को अधिक सक्षम बनाने के लिए ओपनएआई की तकनीक का उपयोग किया था। दोनों कंपनियों की साझेदारी को प्रौद्योगिकी उद्योग में एक महत्वपूर्ण सहयोग माना जाता रहा है।
लेकिन पिछले एक वर्ष के दौरान दोनों कंपनियों के संबंधों में तनाव बढ़ने लगा। इसकी एक प्रमुख वजह ओपनएआई द्वारा एप्पल के पूर्व चर्चित डिजाइन प्रमुख जॉनी इवे को अपने साथ जोड़ना भी माना जा रहा है। जॉनी इवे को आधुनिक तकनीकी उत्पादों की दुनिया के सबसे प्रभावशाली डिजाइनरों में गिना जाता है और एप्पल के कई प्रतिष्ठित उत्पादों की डिजाइन तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके ओपनएआई के साथ जुड़ने के बाद से दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई।
एप्पल ने अपने मुकदमे में यह भी दावा किया है कि ओपनएआई ने अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम से कुछ महीने पहले एप्पल के लगभग 400 कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ लिया। कंपनी का आरोप है कि यह केवल प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती का मामला नहीं था,बल्कि इसके पीछे एप्पल की तकनीकी विशेषज्ञता और व्यापारिक रहस्यों तक पहुँच बनाने की रणनीति भी शामिल थी।
मुकदमे में एप्पल ने कहा है कि तकनीकी कर्मचारियों से लेकर मुख्य हार्डवेयर अधिकारी तक,विभिन्न स्तरों पर ओपनएआई ने अपने व्यावसायिक सहयोगियों के साथ मिलकर एप्पल की गोपनीय जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। कंपनी का दावा है कि इससे उसके अनुसंधान,उत्पाद विकास और प्रतिस्पर्धी बढ़त को नुकसान पहुँच सकता है।
एप्पल ने अदालत से माँग की है कि ओपनएआई के पास यदि उसके किसी भी प्रकार के स्वामित्व वाले दस्तावेज,डिजाइन,तकनीकी प्रस्तुतीकरण या अन्य गोपनीय सामग्री मौजूद है,तो उन्हें तुरंत नष्ट करने का आदेश दिया जाए। साथ ही कंपनी ने यह भी अनुरोध किया है कि यदि कथित रूप से प्राप्त तकनीकी जानकारी का उपयोग किसी नए उत्पाद के विकास में किया गया है,तो उस तकनीक को हटाकर उत्पाद का डिजाइन दोबारा तैयार कराया जाए।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है,जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हार्डवेयर तकनीक के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियाँ अगली पीढ़ी के स्मार्ट उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादों के विकास में भारी निवेश कर रही हैं। ऐसे माहौल में व्यापारिक गोपनीयता,बौद्धिक संपदा अधिकार और कर्मचारियों के माध्यम से संवेदनशील जानकारी के संभावित दुरुपयोग जैसे मुद्दे और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। यदि एप्पल अपने आरोपों को अदालत में साबित करने में सफल रहती है,तो इसका असर केवल दोनों कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग में कर्मचारियों की भर्ती,व्यापारिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा सुरक्षा से जुड़े नियमों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं यदि ओपनएआई इन आरोपों का सफलतापूर्वक खंडन करती है,तो यह उसके लिए एक बड़ी कानूनी राहत होगी। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही इस बहुचर्चित तकनीकी विवाद की दिशा तय करेगी।
