नई दिल्ली,11 जुलाई (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इस रोमांचक मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण स्पेन के मिडफील्डर मिकेल मेरिनो रहे,जिन्होंने बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरते ही मैच का रुख बदल दिया। मेरिनो ने 88वें मिनट में विजयी गोल दागकर न केवल स्पेन को अंतिम चार में पहुँचाया, बल्कि विश्व कप इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया। उनके इस गोल ने स्पेन की 16 वर्षों बाद विश्व कप सेमीफाइनल में वापसी सुनिश्चित कर दी और उन्हें टूर्नामेंट का सबसे प्रभावशाली सुपर सब साबित कर दिया।
मिकेल मेरिनो ने इस विश्व कप में लगातार दूसरे नॉकआउट मुकाबले में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के रूप में उतरकर निर्णायक गोल किया। इससे पहले राउंड ऑफ 16 में पुर्तगाल के खिलाफ भी उन्होंने अंतिम क्षणों में गोल कर स्पेन को जीत दिलाई थी। बेल्जियम के खिलाफ भी उन्होंने वही कारनामा दोहराते हुए टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिला दिया। इस उपलब्धि के साथ मेरिनो फीफा विश्व कप के इतिहास में एक ही टूर्नामेंट के दो नॉकआउट मुकाबलों में बतौर सब्स्टीट्यूट गोल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
इतना ही नहीं,मेरिनो ने स्पेन के लिए भी एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह विश्व कप में स्पेन की ओर से 80वें मिनट के बाद दो अलग-अलग मुकाबलों में विजयी गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उनकी मैच के दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता और निर्णायक मौकों पर टीम के लिए उपयोगी साबित होने की मिसाल मानी जा रही है।
पूरे टूर्नामेंट में मिकेल मेरिनो की भूमिका बेहद खास रही है। स्पेन ने अब तक विश्व कप में छह मुकाबले खेले हैं,लेकिन मेरिनो को केवल एक मैच में शुरुआती एकादश में जगह मिली। इसके बावजूद उन्होंने पाँच बार बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरकर हर बार टीम के खेल में सकारात्मक बदलाव लाया। खासकर नॉकआउट चरण में उनके योगदान ने यह साबित कर दिया कि किसी भी खिलाड़ी का प्रभाव केवल शुरुआती एकादश में शामिल होने से नहीं,बल्कि निर्णायक क्षणों में प्रदर्शन से तय होता है।
बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक रणनीति अपनाई। टीम ने गेंद पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और लगातार बेल्जियम के डिफेंस पर दबाव बनाया। स्पेन की तेज पासिंग और विंग से किए गए हमलों ने बेल्जियम की रक्षापंक्ति को शुरुआत से ही परेशान किया।
स्पेन को इस दबाव का फायदा मैच के 30वें मिनट में मिला। युवा खिलाड़ी लामिन यामाल ने दाईं ओर से शानदार दौड़ लगाते हुए बेल्जियम के डिफेंस को छकाया और गेंद पेड्रो पोरो तक पहुंचाई। पोरो ने बॉक्स के भीतर सटीक लो क्रॉस दिया। डैनी ओल्मो का पहला प्रयास बेल्जियम के गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके और गेंद रिबाउंड होकर फैबियन रुइज के पास पहुँच गई। रुइज ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए दमदार शॉट के साथ गेंद को गोलपोस्ट में पहुँचा दिया और स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी।
हालाँकि,बेल्जियम ने भी शानदार वापसी की। शुरुआती झटके के बाद टीम ने अपने खेल की गति बढ़ाई और स्पेन की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाना शुरू किया। पहले हाफ के अंतिम चरण में उसे इसका इनाम भी मिल गया। 42वें मिनट में टिमोथी कास्टेग्ने ने दाईं ओर से शानदार क्रॉस दिया,जिस पर चार्ल्स डी केटेलेयर ने ऊँची छलांग लगाते हुए बेहतरीन हेडर लगाया। गेंद सीधे गोल में पहुँचीं और बेल्जियम ने स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के बाद मुकाबला पूरी तरह खुल गया और दोनों टीमों ने बढ़त हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए।
दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने आक्रामक फुटबॉल खेली,लेकिन दोनों ओर के रक्षात्मक खिलाड़ियों और गोलकीपरों ने कई शानदार बचाव किए। समय बीतने के साथ मुकाबला और रोमांचक होता गया। 85वें मिनट तक स्कोर 1-1 की बराबरी पर था और ऐसा लगने लगा था कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा।
इसी बीच स्पेन के मुख्य कोच ने 86वें मिनट में एक अहम रणनीतिक बदलाव करते हुए मिकेल मेरिनो को मैदान पर उतारा। यह फैसला कुछ ही मिनटों में मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। मैदान पर आने के महज दो मिनट बाद मेरिनो ने स्पेन को वह गोल दिलाया,जिसका पूरी टीम और उसके समर्थकों को इंतजार था।
88वें मिनट में स्पेन ने एक और तेज हमला किया। पाउ क्यूबार्सी ने दूर से जोरदार शॉट लगाया,जिसे बेल्जियम के गोलकीपर पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके। गेंद उनके हाथों से छूटकर सामने आ गई और मौके पर मौजूद मिकेल मेरिनो ने बिना कोई गलती किए उसे गोल में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ स्पेन ने 2-1 की बढ़त बना ली और स्टेडियम में मौजूद स्पेनिश समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
गोल खाने के बाद बेल्जियम ने अतिरिक्त समय तक बराबरी हासिल करने के लिए पूरा जोर लगाया,लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति ने संयम बनाए रखा और कोई अवसर नहीं दिया। अंतिम सीटी बजते ही स्पेन ने 2-1 की यादगार जीत दर्ज कर विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया।
इस जीत के साथ स्पेन ने यह भी साबित कर दिया कि उसकी टीम केवल स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है,बल्कि बेंच पर मौजूद खिलाड़ी भी किसी भी समय मुकाबले का परिणाम बदलने की क्षमता रखते हैं। मिकेल मेरिनो इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं। लगातार दो नॉकआउट मुकाबलों में सब्स्टीट्यूट के रूप में उतरकर निर्णायक गोल करना उनके आत्मविश्वास और शानदार फॉर्म को दर्शाता है।
अब स्पेन का सामना सेमीफाइनल में फ्रांस से होगा। यह मुकाबला मंगलवार को खेला जाएगा और दोनों यूरोपीय दिग्गज टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए आमने-सामने होंगी। एक ओर स्पेन मिकेल मेरिनो जैसे मैच विजेता खिलाड़ियों की बदौलत पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगा,तो दूसरी ओर फ्रांस भी मजबूत प्रदर्शन के दम पर खिताबी दौड़ में बना हुआ है। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों को सेमीफाइनल में विश्व स्तरीय मुकाबला देखने को मिलने की पूरी उम्मीद है।
