‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ पर बढ़ा विवाद (तस्वीर क्रेडिट@RccShashank1)

‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ पर विवाद गहराया,सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

नई दिल्ली,13 जून (युआईटीवी)- अभिनेता सलमान खान और फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ के निर्माताओं के बीच कानूनी विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। फिल्म की रिलीज,प्रचार और निर्माण पर रोक लगाने की माँग को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने फिल्म के निर्माता अमित जानी सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए उनका पक्ष जानने का निर्णय लिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 जून के लिए निर्धारित की है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है,जब फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ अपने विषय और प्रचार सामग्री को लेकर पहले से ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को वर्ष 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर आधारित बताया जा रहा है। हाल ही में फिल्म का पहला पोस्टर और ट्रेलर जारी किया गया था,जिसके बाद विवाद ने नया रूप ले लिया।

सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण तर्क रखे। उन्होंने कहा कि अभिनेता के पर्सनैलिटी राइट्स पहले से ही न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं और किसी भी व्यक्ति या संस्था को उनकी अनुमति के बिना उनकी पहचान,छवि या उनसे जुड़ी विशिष्ट विशेषताओं का व्यावसायिक उपयोग करने का अधिकार नहीं है। वकील ने अदालत को बताया कि इन अधिकारों में अभिनेता का चेहरा, सार्वजनिक पहचान,उनके जैसा दिखने वाला स्वरूप,उनकी लोकप्रिय शैली और उनसे जुड़ी अन्य व्यक्तिगत विशेषताएँ शामिल हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि 29 मई को जारी किए गए फिल्म के पोस्टर में एक ऐसे व्यक्ति को दिखाया गया है,जिसकी छवि सलमान खान से मिलती-जुलती प्रतीत होती है। इतना ही नहीं,उस व्यक्ति के हाथ में वही विशेष ब्रेसलेट भी दिखाई देता है,जिसे सलमान खान लंबे समय से पहनते आए हैं और जो उनकी पहचान का एक प्रमुख हिस्सा माना जाता है। अभिनेता की कानूनी टीम का दावा है कि यह समानता महज संयोग नहीं हो सकती और इससे यह संदेश जाता है कि फिल्म सीधे तौर पर सलमान खान से जुड़ी हुई है।

अदालत में पेश की गई याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के प्रचार के लिए अभिनेता की सार्वजनिक पहचान और लोकप्रिय छवि का उपयोग किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे न केवल उनके व्यक्तित्व संबंधी अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है,बल्कि उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुँचने की आशंका है। सलमान खान की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी अनुमति के बिना किसी व्यक्ति की पहचान को व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना कानून की दृष्टि में उचित नहीं माना जा सकता।

सुनवाई के दौरान अभिनेता के वकील ने वर्ष 1998 के काला हिरण शिकार मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस प्रकरण से जुड़े चार मामलों में से तीन में सलमान खान को राहत मिल चुकी है। जबकि एक मामला अभी भी अपील की प्रक्रिया के तहत लंबित है। उनका कहना था कि फिल्म और उससे जुड़े प्रचार अभियानों के कारण अभिनेता का नाम बार-बार विवादित घटनाओं के साथ जोड़ा जा रहा है,जिससे उनकी छवि प्रभावित हो सकती है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म के प्रचार से जुड़े कुछ सार्वजनिक बयान और प्रस्तुतियाँ ऐसे हैं,जो अभिनेता को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करती हैं। कानूनी टीम का तर्क है कि जब कोई मामला न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हो और उससे जुड़े तथ्यों पर अंतिम निर्णय न आया हो,तब किसी व्यक्ति की पहचान का उपयोग कर फिल्म का प्रचार करना कई कानूनी और नैतिक प्रश्न खड़े करता है।

सलमान खान ने अपनी याचिका में फिल्म निर्माता अमित जानी,जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, निर्देशक भरत एस. श्रीनाते, अक्षय पांडेय और अन्य संबंधित व्यक्तियों को पक्षकार बनाया है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि फिल्म के निर्माण,वितरण,प्रचार और रिलीज पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। अभिनेता का कहना है कि यदि फिल्म को मौजूदा स्वरूप में प्रदर्शित किया गया,तो इससे उनके अधिकारों और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

दूसरी ओर,फिल्म के निर्माताओं की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालाँकि,अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में फिल्म निर्माताओं की ओर से इस मामले में विस्तृत पक्ष रखा जा सकता है।

फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ का विषय शुरू से ही चर्चा का केंद्र बना हुआ है। काला हिरण शिकार मामला भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में से एक रहा है। ऐसे में इस विषय पर आधारित किसी फिल्म का निर्माण स्वाभाविक रूप से लोगों और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। फिल्म का ट्रेलर और प्रचार सामग्री सामने आने के बाद विवाद और भी बढ़ गया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक फिल्म की रिलीज तक सीमित नहीं है,बल्कि यह व्यक्तित्व अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। एक ओर किसी व्यक्ति को अपनी पहचान और छवि की सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है,वहीं दूसरी ओर फिल्म निर्माता रचनात्मक अभिव्यक्ति और ऐतिहासिक या सार्वजनिक घटनाओं पर आधारित सामग्री प्रस्तुत करने का अधिकार होने की दलील दे सकते हैं। ऐसे मामलों में अदालतों को दोनों पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना पड़ता है।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले पर सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। 19 जून को होने वाली सुनवाई में अदालत के सामने दोनों पक्षों के तर्क और जवाब आने की संभावना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिल्म की रिलीज और प्रचार सामग्री को लेकर न्यायालय क्या रुख अपनाता है।

फिलहाल, ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद मनोरंजन जगत के साथ-साथ कानूनी और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला न केवल इस फिल्म के भविष्य को प्रभावित करेगा,बल्कि व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टांत भी स्थापित कर सकता है।