वाशिंगटन,13 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने ईरान पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके साथ अच्छी नीयत से किसी भी प्रकार का समझौता करना लगभग असंभव है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ओमान तट के पास भारतीय जहाजों पर हुए ड्रोन हमले और उसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत के लिए ईरान जिम्मेदार है। हालाँकि,ईरान की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए कहा कि ईरान द्वारा मीडिया में लीक की गई शर्तों का उन वास्तविक शर्तों से कोई संबंध नहीं है,जिन पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर गलत सूचनाएँ फैला रहा है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि ईरान की ओर से जो बयान दिए जा रहे हैं, वे वास्तविकता से पूरी तरह अलग हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के नेताओं द्वारा समझौते को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं,उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों के साथ बातचीत करना अपमानजनक अनुभव साबित होता है और उनके साथ ईमानदारी तथा भरोसे के आधार पर समझौता करना संभव नहीं है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक नए समझौते की संभावना पर चर्चा चल रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवाद के कारण पश्चिम एशिया में अस्थिरता बनी हुई है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस मुद्दे पर करीबी नजर रखे हुए है।
अपने बयान में ट्रंप ने ओमान तट के निकट हुए एक हालिया घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ईरान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था। ट्रंप के अनुसार यह हमला पूरी तरह विफल रहा,लेकिन इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या हमला अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। ट्रंप के आरोपों ने एक बार फिर इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालाँकि,अपने कड़े बयानों के बावजूद ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समझौता अंतिम चरण में पहुँच चुका है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर है और समझौते से जुड़े दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध की संभावना को टालने वाला एक बड़ा समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में इस समझौते को औपचारिक रूप दिया जा सकता है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बन गई है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही उसका विकास करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस पूरे प्रयास का मुख्य उद्देश्य यही सुनिश्चित करना था कि ईरान परमाणु हथियारों से दूर रहे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान किसी भी रूप में परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा,विकसित नहीं करेगा और न ही उसके पास ऐसा कोई हथियार होगा। ट्रंप ने इसे अपनी सरकार की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस समझौते को मंजूरी दे दी है,तो ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि इसका जवाब सकारात्मक है। हालाँकि,उन्होंने इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की। उनके इस बयान ने यह संकेत जरूर दिया कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण स्तर पर बातचीत हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता वास्तव में अंतिम रूप लेता है,तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा घटनाक्रम होगा। कई वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बनी हुई है। दूसरी ओर ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस कूटनीतिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है। एक ओर ट्रंप के तीखे आरोप दोनों देशों के बीच अविश्वास को उजागर करते हैं,वहीं दूसरी ओर संभावित समझौते की बात क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद भी जगाती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता वास्तव में अमल में आता है या फिर आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आगे भी जारी रहता है।
