नई दिल्ली,14 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक और भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक पहल देखने को मिल रही है। अरबपति उद्योगपति एलन मस्क ने बुधवार को पुष्टि की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई बड़े अमेरिकी कारोबारी नेताओं के साथ एयर फोर्स वन से बीजिंग जा रहे हैं। वहाँ वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाले महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं एयर फोर्स वन से बीजिंग जा रहा हूँ।” उनके इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिकी प्रशासन इस यात्रा को केवल राजनीतिक नहीं,बल्कि बड़े आर्थिक और कारोबारी मिशन के रूप में भी देख रहा है। माना जा रहा है कि यह यात्रा दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में एक दर्जन से अधिक बड़े कारोबारी शामिल हैं। इनमें टेस्ला प्रमुख एलन मस्क और एनवीडिया के प्रमुख जेन्सेन हुआंग सबसे चर्चित नामों में शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि भी इस यात्रा में मौजूद हैं।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीक,व्यापार और सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर उद्योग,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निर्यात नियंत्रण जैसे मुद्दे प्रमुख विवाद का कारण बने हुए हैं। इसके बावजूद अमेरिकी कंपनियाँ चीन के विशाल बाजार और औद्योगिक नेटवर्क को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलन मस्क की इस यात्रा में मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि टेस्ला का चीन में बड़ा कारोबार है। शंघाई स्थित टेस्ला का गीगाफैक्ट्री प्लांट कंपनी के सबसे अहम उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में स्थिरता टेस्ला जैसे उद्योग समूहों के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।
यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि लगभग एक दशक बाद कोई मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के आधिकारिक दौरे पर पहुँचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस यात्रा के दौरान व्यापारिक सहयोग बढ़ाने,निवेश को मजबूत करने और आर्थिक समझौतों को आगे बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं। साथ ही अमेरिका में बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक दबावों को देखते हुए यह दौरा घरेलू राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजिंग में होने वाला यह शिखर सम्मेलन खास तौर पर एनवीडिया जैसी तकनीकी कंपनियों के लिए भी अहम माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी को चीन में अपने उन्नत एच200 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स बेचने की अनुमति हासिल करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका की ओर से सेमीकंडक्टर निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों और सख्त निगरानी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन और कारोबारी नेता इस यात्रा के दौरान तकनीकी निर्यात,निवेश और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चीनी नेतृत्व के साथ चर्चा कर सकते हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर दोनों देशों के बीच चल रही खींचतान वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक,ट्रंप के बीजिंग पहुँचने से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दक्षिण कोरिया में चीनी अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच पिछले वर्ष हुए व्यापार समझौते को स्थिर बनाए रखने और आर्थिक सहयोग जारी रखने पर चर्चा हुई।
जानकारी के अनुसार व्हाइट हाउस की शुरुआती योजना की तुलना में इस कारोबारी प्रतिनिधिमंडल में कई बदलाव किए गए। पहले जिन उद्योगपतियों के नाम चर्चा में थे,उनमें एलन मस्क और टिम कुक प्रमुख थे। बाद में अंतिम सूची में कई अन्य कॉरपोरेट नेताओं को भी शामिल किया गया,जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि अमेरिका इस यात्रा को व्यापक आर्थिक रणनीति के रूप में देख रहा है।
बीजिंग रवाना होने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने यात्रा में शामिल उद्योगपतियों की सराहना करते हुए लिखा कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहेंगे कि चीन अपने बाजारों को और अधिक खोले,ताकि अमेरिकी कारोबारी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था,तकनीकी उद्योग और निवेश बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस शिखर सम्मेलन पर टिकी हुई हैं।
एलन मस्क जैसे प्रभावशाली उद्योगपति की मौजूदगी यह भी दिखाती है कि अमेरिकी कॉरपोरेट जगत चीन के साथ आर्थिक संबंधों को बनाए रखने में रुचि रखता है,भले ही राजनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ हो। मस्क पहले भी कई बार चीन की औद्योगिक नीतियों और उत्पादन क्षमताओं की तारीफ कर चुके हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत से अमेरिका-चीन संबंधों में किस तरह का बदलाव आता है। कारोबारी जगत को उम्मीद है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापारिक अनिश्चितता कम हो सकती है और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
