प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@SonOfBharat7)

नेतन्याहू की कथित गुप्त यात्रा पर यूएई का बड़ा बयान,कहा- बिना आधिकारिक घोषणा सभी दावे बेबुनियाद

अबू धाबी,14 मई (युआईटीवी)- संयुक्त अरब अमीरात ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है,जिनमें दावा किया गया था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में यूएई की गुप्त यात्रा की और वहाँ शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं। यूएई के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी यात्रा या सैन्य प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से जुड़ी खबरें गलत, भ्रामक और आधारहीन हैं,जब तक कि इसकी आधिकारिक पुष्टि न की जाए।

यूएई के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि इजरायल के साथ उसके संबंध पूरी तरह अब्राहम समझौते के ढाँचे के भीतर संचालित होते हैं और दोनों देशों के बीच किसी प्रकार की “गुप्त व्यवस्था” नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि बिना आधिकारिक घोषणा के किसी भी कथित दौरे या बैठकों के बारे में किए जा रहे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं माने जा सकते।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में मीडिया संस्थानों से भी जिम्मेदारी बरतने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे पर रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले तथ्यों का सत्यापन जरूरी है। बिना पुष्टि वाली खबरों को प्रसारित करना न केवल भ्रम पैदा करता है,बल्कि इससे राजनीतिक अटकलों को भी बढ़ावा मिलता है।

यूएई का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब इजरायली मीडिया और कुछ अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नेतन्याहू ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच यूएई का गुप्त दौरा किया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

इससे पहले नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि यह यात्रा इजरायल और यूएई के बीच संबंधों में “ऐतिहासिक बदलाव” का प्रतीक है। हालाँकि,बयान में यात्रा की तारीख,बैठक के एजेंडे या अन्य किसी विस्तृत जानकारी का खुलासा नहीं किया गया था। इसी अस्पष्टता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूएई द्वारा जारी यह स्पष्टीकरण पश्चिम एशिया की जटिल कूटनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा समय में क्षेत्र में ईरान,इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण हर कूटनीतिक गतिविधि पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि यह नेतन्याहू की पहली यूएई यात्रा थी और किसी इजरायली प्रधानमंत्री की खाड़ी देश की दूसरी यात्रा मानी जा रही थी। हालाँकि,यूएई ने इस तरह के दावों को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि यदि कोई आधिकारिक दौरा होता है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाती है।

इजरायल और यूएई के बीच संबंधों का नया दौर वर्ष 2020 में शुरू हुआ था,जब अमेरिका की मध्यस्थता में अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने अपने संबंध सामान्य किए और उसके बाद व्यापार,तकनीक,निवेश और सुरक्षा सहयोग में तेजी से वृद्धि हुई। अब्राहम समझौते को पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया था।

हालाँकि,इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने पूरे क्षेत्र की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को जटिल बना दिया है। ऐसे में यूएई और अन्य खाड़ी देशों की भूमिका बेहद संवेदनशील हो गई है। यूएई एक ओर पश्चिमी देशों और इजरायल के साथ संबंध मजबूत कर रहा है,वहीं दूसरी ओर वह क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश कर रहा है।

इसी बीच अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने भी हलचल बढ़ा दी। रिपोर्ट में अरब अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने मार्च और अप्रैल में कम-से-कम दो बार यूएई का दौरा किया था। रिपोर्ट के अनुसार इन यात्राओं का संबंध ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति में संभावित सहयोग और सुरक्षा समन्वय से था।

इसके अलावा इजरायल के सरकारी प्रसारक कान न्यूज ने भी दावा किया कि शिन बेट आंतरिक सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख डेविड जिनी ने भी यूएई का दौरा किया था। इन रिपोर्टों ने इजरायल और यूएई के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग की चर्चाओं को और तेज कर दिया।

हालाँकि,यूएई ने किसी भी प्रकार की गुप्त सुरक्षा या राजनीतिक व्यवस्था से इनकार करते हुए यह स्पष्ट किया है कि उसके अंतर्राष्ट्रीय संबंध पारदर्शिता और आधिकारिक प्रक्रियाओं के आधार पर संचालित होते हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि जब तक संबंधित अधिकारी सार्वजनिक रूप से किसी दौरे या बैठक की पुष्टि नहीं करते,तब तक ऐसी खबरों को तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों में सूचनाओं और कूटनीतिक संकेतों का महत्व बहुत बढ़ गया है। किसी भी कथित गुप्त बैठक या सुरक्षा सहयोग की खबर तुरंत वैश्विक सुर्खियों में आ जाती है और इसका असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ता है।

यूएई का यह बयान यह भी दिखाता है कि खाड़ी देश अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क हैं। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी विदेश नीति पारदर्शी और संतुलित है तथा क्षेत्रीय स्थिरता उनकी प्राथमिकता बनी हुई है।

फिलहाल नेतन्याहू की कथित गुप्त यात्रा को लेकर जारी अटकलों के बीच यूएई के आधिकारिक बयान ने स्थिति को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है। हालाँकि,इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते संबंधों तथा पश्चिम एशिया की बदलती राजनीति को देखते हुए आने वाले समय में इस मुद्दे पर और चर्चाएँ होने की संभावना बनी हुई है।