बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली और रुद्रम-द्वितीय मिसाइल के सफल परीक्षण (तस्वीर क्रेडिट@narayan_chandel)

डीआरडीओ ने दिखाई भारत की बढ़ती सैन्य ताकत,बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली और रुद्रम-द्वितीय मिसाइल के सफल परीक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास

नई दिल्ली,13 जून (युआईटीवी)- भारत ने रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी सामरिक क्षमताओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने हाल ही में कई अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों और मिसाइल तकनीकों का सफल परीक्षण कर यह संकेत दिया है कि देश अब उभरते हुए सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए पहले से कहीं अधिक सक्षम हो चुका है। लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर समुद्री क्षेत्र में दुश्मन के युद्धपोतों तक को निशाना बनाने वाली तकनीकों के सफल प्रदर्शन ने भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती प्रदान की है।

डीआरडीओ ने 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन उड़ान परीक्षणों के माध्यम से बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की जहाज-रोधी क्षमताओं वाले खतरों के खिलाफ भारत की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता को परखना था। परीक्षणों के दौरान उपयोग किए गए इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदकर यह साबित कर दिया कि भारत की रक्षा प्रणाली आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली किसी भी देश की रणनीतिक सुरक्षा का एक अहम हिस्सा मानी जाती है। यह प्रणाली दुश्मन की ओर से दागी गई मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही हवा में नष्ट करने की क्षमता रखती है। हालिया परीक्षणों में उपयोग की गई तकनीक को नए और जटिल मिसाइल खतरों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है,जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों तक को रोकने की क्षमता वाली उन्नत रक्षा प्रणाली मौजूद है।

इन परीक्षणों के साथ ही नौसेना के लिए विकसित मध्यम दूरी की जहाज-रोधी मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस मिसाइल को समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मानकों को पूरा किया और सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदा। इससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।

इन सभी परीक्षणों का अवलोकन डीआरडीओ और भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। परीक्षणों की सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकों के विकास और सफल परीक्षण भारत को आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने इसे देश की सुरक्षा और सामरिक क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की। उन्होंने इस सफलता के लिए डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं,वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के सहयोग को सराहा। उनके अनुसार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी बेहद आवश्यक है और हालिया उपलब्धियाँ इसी सहयोग का परिणाम हैं।

इस बीच डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना ने हाल ही में वायु से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक रुद्रम-द्वितीय मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के एक हवाई मंच से किया गया था। इस दौरान मिसाइल ने अपनी सटीकता,विश्वसनीयता और तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रुद्रम-द्वितीय भारत की वायु शक्ति को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

डीआरडीओ द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार रुद्रम-द्वितीय मिसाइल का परीक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल को एक जटिल प्रक्षेप पथ पर उड़ाया गया,ताकि उसकी वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके। इस दौरान मिसाइल की सभी प्रमुख उपप्रणालियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और निर्धारित तकनीकी मानकों पर पूरी तरह खरी उतरीं।

परीक्षण के दौरान दागी गई मिसाइलों ने अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ भेदा। ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में मौजूद आधुनिक ट्रैकिंग और निगरानी उपकरणों से प्राप्त आँकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरे हुए। इससे यह साबित हुआ कि मिसाइल वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकती है।

रुद्रम-द्वितीय मिसाइल का विकास पूरी तरह स्वदेशी तकनीक के आधार पर किया गया है। इसे हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र ने विकसित किया है। इसके निर्माण और परीक्षण में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला,उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला,शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान और एकीकृत परीक्षण रेंज सहित कई प्रमुख संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विभिन्न प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने इस परियोजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है। सरकार की नीति के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों,मिसाइल प्रणालियों और उन्नत सैन्य तकनीकों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। हालिया सफल परीक्षण इस दिशा में देश की बढ़ती क्षमता और तकनीकी आत्मविश्वास को दर्शाते हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली,जहाज-रोधी मिसाइल और रुद्रम-द्वितीय जैसी उन्नत प्रणालियाँ भारत की सुरक्षा रणनीति को नई मजबूती प्रदान करेंगी। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए ऐसी तकनीकों का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन सफल परीक्षणों ने न केवल भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है,बल्कि यह भी साबित किया है कि देश भविष्य के सुरक्षा खतरों का सामना करने के लिए तेजी से तैयार हो रहा है। रक्षा क्षेत्र में मिली यह उपलब्धि भारत के आत्मनिर्भरता अभियान को नई गति देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर उसकी सामरिक स्थिति को भी और मजबूत करेगी।