अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

‘अगर मेरी हत्या हुई तो ईरान पर होगा अभूतपूर्व हमला’, ट्रंप का बड़ा बयान; हत्या की साजिश संबंधी रिपोर्टों पर भी दी प्रतिक्रिया

काराकास,11 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनकी हत्या की किसी भी साजिश में ईरान सफल होता है,तो उन्होंने पहले से ही ऐसे निर्देश दे रखे हैं कि अमेरिका की ओर से ईरान पर ऐसा सैन्य हमला किया जाएगा,जैसा उसने पहले कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इजरायल ने अमेरिका को ईरान की ओर से ट्रंप की हत्या की कथित नई साजिश से जुड़ी खुफिया जानकारी दी है।

शुक्रवार को अमेरिकी समयानुसार मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह लंबे समय से ईरान के निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार वह ईरान की कथित हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। ट्रंप ने कहा, “मैं लंबे समय से ईरान की हिट लिस्ट में नंबर-1 पर हूँ और जिंदगी ऐसी ही होती है। मैंने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि अगर मेरे साथ कुछ भी होता है,तो ईरान पर ऐसे स्तर का बमबारी हमला किया जाए,जैसा उसने पहले कभी नहीं देखा होगा।”

हालाँकि,ट्रंप ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया,जिनमें यह दावा किया गया था कि इजरायल ने विशेष रूप से उनकी हत्या की नई साजिश के बारे में अमेरिका को जानकारी दी है। उन्होंने इस संबंध में आई खबरों को स्वीकार नहीं किया,लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि वह लंबे समय से ईरान के संभावित निशाने पर बने हुए हैं। उनके इस बयान ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से मौजूद तनाव को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

इससे पहले शुक्रवार को ही ट्रंप ने यह भी कहा था कि उनकी सरकार ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगी,भले ही युद्धविराम समाप्त होने की सूचना तेहरान को दे दी गई हो। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका एक ओर कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को लेकर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। ट्रंप के इस दोहरे संदेश को अमेरिका की मौजूदा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है,जिसमें संवाद और दबाव दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उन मीडिया रिपोर्टों से हुई,जिनमें दावा किया गया कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में अमेरिका के साथ ऐसी जानकारी साझा की है, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की एक नई योजना पर विचार कर रहा है। इस दावे ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी हलचल पैदा कर दी।

एक प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इजरायल ने हाल ही में अमेरिका के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की,जिसमें यह आशंका जताई गई कि ईरान ट्रंप के खिलाफ नई साजिश तैयार कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यदि यह जानकारी सही साबित होती है,तो यह अमेरिका और ईरान के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और अधिक गंभीर बना सकती है।

इसी तरह एक अन्य अमेरिकी समाचार चैनल ने मामले से जुड़े दो सूत्रों के हवाले से बताया कि इजरायल ने यह चेतावनी अमेरिकी अधिकारियों तक पहुँचाई थी। हालाँकि,रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इजरायल की ओर से यह जानकारी मिलने से पहले अमेरिका ने स्वतंत्र रूप से इस खुफिया सूचना की पुष्टि नहीं की थी। यानी अमेरिकी एजेंसियों के पास उस समय इस कथित साजिश की अलग से पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।

इन रिपोर्टों के सार्वजनिक होने के बाद व्हाइट हाउस से भी प्रतिक्रिया माँगी गई। व्हाइट हाउस ने दोनों मीडिया संस्थानों को राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया सार्वजनिक बयान का हवाला दिया और अलग से कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया। प्रशासन की ओर से यह संकेत दिया गया कि राष्ट्रपति पहले ही इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।

ट्रंप ने इससे पहले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी कहा था कि वह अब भी तेहरान के प्रमुख निशानों में शामिल हैं। उन्होंने उस समय भी ईरान के प्रति अपनी सरकार की कठोर नीति का बचाव किया था और कहा था कि अमेरिका अपनी सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को गंभीरता से लेता है। उनके ताजा बयान को उसी नीति की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी है। एक ओर वह ईरान को कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई का जवाब बेहद कठोर होगा, वहीं दूसरी ओर वह यह भी दिखाना चाहते हैं कि अमेरिका संभावित खतरों के प्रति पूरी तरह सतर्क है।

अमेरिका और ईरान के संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक प्रतिबंध और मध्य पूर्व की राजनीति जैसे कई मुद्दों पर लगातार मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप का यह ताजा बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में ले आया है।

फिलहाल ट्रंप की हत्या की कथित साजिश से जुड़ी रिपोर्टों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है और न ही अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में कोई अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी जारी की है। इसके बावजूद राष्ट्रपति का सख्त रुख यह संकेत देता है कि अमेरिका इस तरह के किसी भी संभावित खतरे को अत्यंत गंभीरता से देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर अमेरिका,ईरान और इजरायल की ओर से क्या नए घटनाक्रम सामने आते हैं तथा क्या इस विवाद का असर क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ता है।