फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पैराग्वे ने तुर्किये को 1-0 से हराया (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

फीफा विश्व कप 2026: पैराग्वे की जुझारू जीत से टूर्नामेंट में बनी उम्मीदें,तुर्किये 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ भी नहीं कर सका वापसी,टूर्नामेंट से बाहर

कैलिफोर्निया,20 जून (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 में ग्रुप डी का मुकाबला रोमांच,संघर्ष और अनुशासनात्मक नियमों को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया। सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में खेले गए इस अहम मैच में पैराग्वे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तुर्किये को 1-0 से हरा दिया। इस जीत ने पैराग्वे की नॉकआउट चरण में पहुँचने की उम्मीदों को जीवित रखा,जबकि तुर्किये के लिए यह हार बेहद निराशाजनक साबित हुई। लगातार खराब परिणामों के कारण तुर्किये का टूर्नामेंट में सफर यहीं समाप्त हो गया।

मुकाबले की शुरुआत होते ही पैराग्वे ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। मैच शुरू होने के महज 64 सेकंड बाद ही टीम ने बढ़त हासिल कर ली। यह गोल मटियास गैलार्जा ने किया,जिन्होंने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुँचा दिया। तुर्किये के गोलकीपर को प्रतिक्रिया देने का मौका तक नहीं मिला और गेंद सीधे जाल में समा गई। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को शुरुआती बढ़त दिलाई,बल्कि यह मौजूदा विश्व कप का सबसे तेज गोल भी बन गया।

इससे पहले टूर्नामेंट में सबसे तेज गोल का रिकॉर्ड मोरक्को के इस्माइल सैबारी के नाम दर्ज था,जिन्होंने स्कॉटलैंड के खिलाफ 70 सेकंड में गोल किया था। गैलार्जा ने यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपने नाम नया कीर्तिमान दर्ज करा लिया। शुरुआती गोल के बाद पैराग्वे का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया और टीम ने लगातार आक्रामक खेल जारी रखा।

पहले हाफ में पैराग्वे ने गेंद पर अच्छा नियंत्रण बनाए रखा और तुर्किये के खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। मिडफील्ड में उनकी पकड़ मजबूत रही और टीम ने कई बार विपक्षी रक्षा पंक्ति को परेशान किया। दूसरी ओर तुर्किये की टीम शुरुआती झटके से उबरने का प्रयास करती रही,लेकिन उसे लय हासिल करने में कठिनाई हुई।

हालाँकि,पहले हाफ के अंतिम क्षणों में मुकाबले ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। पैराग्वे के अनुभवी मिडफील्डर मिगुएल अल्मिरोन को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया। यह फैसला तुरंत चर्चा का विषय बन गया क्योंकि यह फीफा के नए अनुशासनात्मक नियम के तहत दिया गया पहला बड़ा दंड था।

घटना तब हुई जब अल्मिरोन और मर्ट मुल्डुर के बीच गेंद को लेकर संघर्ष चल रहा था। इस दौरान अल्मिरोन ने अपना मुँह ढक लिया। रेफरी ने इस घटना को गंभीरता से लिया और वीडियो सहायक रेफरी की मदद से समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद रेड कार्ड के फैसले को बरकरार रखा गया। इसके साथ ही अल्मिरोन विश्व कप इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए,जिन्हें इस नए नियम के तहत मैदान से बाहर भेजा गया।

फीफा ने यह नियम टूर्नामेंट से पहले लागू किया था। इसके अनुसार यदि कोई खिलाड़ी खेल के दौरान अपना मुँह ढककर किसी अन्य खिलाड़ी से बात करता है या ऐसी स्थिति बनाता है,जिससे अपमानजनक या भेदभावपूर्ण टिप्पणी छिपाई जा सके,तो उसे सीधे रेड कार्ड दिखाया जा सकता है। यह नियम उस विवाद के बाद लाया गया था जिसमें बेनफिका के खिलाड़ी जियानलुका प्रेस्टियानी पर आरोप लगा था कि उन्होंने रियल मैड्रिड के स्टार खिलाड़ी विनिसियस जूनियर के खिलाफ मुँह छिपाकर भेदभावपूर्ण टिप्पणी की थी।

अल्मिरोन के बाहर जाने के बाद पैराग्वे को पूरा दूसरा हाफ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। ऐसे में माना जा रहा था कि तुर्किये इस मौके का फायदा उठाकर मैच में वापसी कर सकता है। दूसरे हाफ की शुरुआत से ही तुर्किये ने आक्रामक रुख अपनाया और बराबरी का गोल करने के लिए लगातार हमले किए।

तुर्किये के खिलाड़ियों ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और पैराग्वे के गोल क्षेत्र में कई बार प्रवेश किया। विंग्स से आक्रमण करने के अलावा उन्होंने लंबी दूरी के शॉट और हवाई गेंदों के जरिए भी मौका बनाने की कोशिश की,लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति पूरे मैच में बेहद अनुशासित और संगठित नजर आई।

पैराग्वे के गोलकीपर ने भी कई महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार बचाव किए। जब भी तुर्किये के खिलाड़ी गोल के करीब पहुँचे,पैराग्वे के डिफेंडरों ने मजबूती से मोर्चा सँभाला। 10 खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए भी टीम ने जिस तरह का संयम और धैर्य दिखाया,उसने दर्शकों और विशेषज्ञों को प्रभावित किया।

मैच के अंतिम चरण में तुर्किये ने लगभग पूरी टीम को आक्रमण में झोंक दिया,लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। पैराग्वे के खिलाड़ियों ने हर गेंद के लिए संघर्ष किया और अपनी बढ़त को सुरक्षित बनाए रखा। समय बीतने के साथ तुर्किये पर दबाव बढ़ता गया और उसकी हड़बड़ी भी साफ दिखाई देने लगी।

अंततः रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही पैराग्वे के खिलाड़ी और समर्थक जश्न में डूब गए। 1-0 की यह जीत उनके लिए सिर्फ तीन अंक नहीं थी,बल्कि टूर्नामेंट में बने रहने की उम्मीदों को मजबूत करने वाली सफलता भी थी। दूसरी ओर तुर्किये के खिलाड़ियों के चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दी,क्योंकि इस हार के साथ उनका विश्व कप अभियान समाप्त हो गया।

मटियास गैलार्जा का शुरुआती गोल पूरे मुकाबले का निर्णायक क्षण साबित हुआ। वहीं 10 खिलाड़ियों के साथ पूरे दूसरे हाफ में पैराग्वे की रक्षात्मक मजबूती और टीम भावना ने इस जीत को और भी खास बना दिया। मैच ने यह भी दिखाया कि फुटबॉल में केवल आक्रमण ही नहीं,बल्कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और अनुशासन भी जीत की कुंजी बन सकते हैं।

अब पैराग्वे की नजर अपने अगले मुकाबले पर होगी,जहाँ वह इसी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरकर नॉकआउट चरण में जगह बनाने की कोशिश करेगा। वहीं तुर्किये को टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद अपने प्रदर्शन का आकलन करना होगा और भविष्य की चुनौतियों के लिए नई रणनीति तैयार करनी होगी।