नई दिल्ली,9 जुलाई (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेला गया मुकाबला रोमांच,विवाद और नाटकीय घटनाक्रम से भरपूर रहा। दो गोल की बढ़त हासिल करने के बावजूद मिस्र को गत विश्व चैंपियन अर्जेंटीना के खिलाफ 3-2 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद मैदान पर खिलाड़ियों की निराशा साफ दिखाई दी,जबकि मुकाबले के बाद मिस्र फुटबॉल फेडरेशन ने रेफरी फ्रैंकोइस लेटेक्सियर के कई फैसलों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए फीफा के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। मिस्र का आरोप है कि मैच के दौरान लिए गए कुछ महत्वपूर्ण फैसलों ने मुकाबले के परिणाम को प्रभावित किया और टीम के साथ न्याय नहीं हुआ।
अटलांटा में खेले गए इस मुकाबले में मिस्र ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीम के खिलाफ दो गोल की बढ़त बनाकर सभी को चौंका दिया। शुरुआती दौर में मिस्र के खिलाड़ियों ने तेज आक्रमण,सटीक पासिंग और मजबूत रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन किया। ऐसा लग रहा था कि टीम विश्व चैंपियन को बाहर का रास्ता दिखाने की ओर बढ़ रही है। हालाँकि,अर्जेंटीना ने अनुभव का परिचय देते हुए शानदार वापसी की और लगातार तीन गोल दागकर मैच अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ मिस्र का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया,जबकि अर्जेंटीना ने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।
हालाँकि,मुकाबले के बाद चर्चा अर्जेंटीना की वापसी से ज्यादा रेफरी के फैसलों को लेकर होने लगी। मिस्र के खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन का मानना है कि कई अहम मौकों पर रेफरी के निर्णय उनके खिलाफ गए,जिससे मैच की दिशा बदल गई। विशेष रूप से वीडियो असिस्टेंट रेफरी प्रणाली से जुड़े फैसलों ने विवाद को और बढ़ा दिया। मिस्र का दावा है कि उनका एक वैध गोल वीडियो समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया,जबकि दूसरी ओर अर्जेंटीना के निर्णायक गोल से पहले उनकी पेनल्टी की अपील पर वीडियो समीक्षा तक नहीं की गई।
मुकाबले के बाद सामने आई रिपोर्टों के अनुसार,मिस्र फुटबॉल फेडरेशन ने फीफा की संचालन संस्था से औपचारिक संपर्क कर रेफरी फ्रैंकोइस लेटेक्सियर और उनकी पूरी रेफरी टीम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। फेडरेशन का कहना है कि मैच में कई ऐसे फैसले लिए गए जो निष्पक्ष नहीं थे और जिनकी निष्पक्ष जाँच कराई जानी चाहिए। फेडरेशन ने यह भी माँग की है कि इन विवादित निर्णयों की समीक्षा की जाए,ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियाँ दोबारा उत्पन्न न हों।
स्पेनिश समाचार पत्र की एक रिपोर्ट के अनुसार,मिस्र फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष हनी अबो रिडा ने व्यक्तिगत रूप से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए फीफा के समक्ष आधिकारिक शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत में रेफरी के कई फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं और यह आरोप लगाया गया है कि इन निर्णयों ने मिस्र के साथ अन्याय किया। रिपोर्ट के अनुसार फेडरेशन ने यह भी अनुरोध किया है कि फ्रांसीसी रेफरी दल को विश्व कप के शेष मुकाबलों में जिम्मेदारी न दी जाए,क्योंकि उनके अनुसार इतनी बड़ी त्रुटियों के बाद निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मिस्र फुटबॉल फेडरेशन का मानना है कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी प्रणाली का उद्देश्य ही विवादित फैसलों को निष्पक्ष तरीके से जांचना है,लेकिन इस मुकाबले में इसका समान रूप से उपयोग नहीं किया गया। फेडरेशन के अनुसार जब उनके गोल को वीडियो समीक्षा के आधार पर रद्द किया जा सकता है,तो फिर उनकी पेनल्टी अपील की भी उसी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए थी। उनका कहना है कि इस असमान व्यवहार ने खिलाड़ियों और समर्थकों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुकाबले के बाद मिस्र के मुख्य कोच हसन ने भी रेफरी के फैसलों पर खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने मौजूदा विश्व चैंपियन के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और कई मामलों में बेहतर खेल दिखाया,लेकिन अंतिम परिणाम केवल मैदान पर हुए खेल से तय नहीं हुआ। उनका मानना था कि कुछ बाहरी कारणों ने भी मुकाबले के नतीजे को प्रभावित किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हसन ने कहा कि उनकी टीम हर विभाग में अर्जेंटीना से बेहतर नजर आई। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत और प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने पूरे मैच में शानदार फुटबॉल खेली,लेकिन इसके बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने संकेत दिया कि मुकाबले में कुछ ऐसे फैसले हुए जिनका खेल की तकनीकी परिस्थितियों से कोई संबंध नहीं था और जिन्होंने परिणाम को प्रभावित किया।
हसन ने अपने बयान में यह भी कहा कि संभव है विश्व चैंपियन टीम को टूर्नामेंट में बनाए रखने की इच्छा ने कुछ फैसलों को प्रभावित किया हो। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल लियोनेल मेसी को प्रतियोगिता में बनाए रखने की भी इच्छा हो सकती है। हालाँकि,उन्होंने किसी पर सीधे आरोप नहीं लगाया,लेकिन उनके बयान ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में कभी-कभी मैदान के बाहर की परिस्थितियाँ तकनीकी पहलुओं से भी अधिक प्रभाव डालती हैं और इस मुकाबले में भी ऐसा ही महसूस हुआ।
मिस्र के कोच ने कहा कि उनकी टीम को वह सम्मान और निष्पक्ष खेल नहीं मिला जिसकी उम्मीद हर खिलाड़ी करता है। उन्होंने कहा कि उनकी पेनल्टी की अपील को न केवल अस्वीकार किया गया,बल्कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी ने उसकी समीक्षा तक नहीं की। वहीं दूसरी ओर उनका दूसरा गोल किसी स्पष्ट कारण के बिना अमान्य घोषित कर दिया गया। उनके अनुसार इन दोनों फैसलों ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भी पूरे आत्मविश्वास के साथ खेला,लेकिन अंत में उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ। हसन ने इसे खिलाड़ियों के लिए बेहद निराशाजनक अनुभव बताया और कहा कि ऐसी घटनाएँ खिलाड़ियों के मनोबल को प्रभावित करती हैं।
दूसरी ओर,अर्जेंटीना ने इस मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए अपने चैंपियन होने का परिचय दिया। दो गोल से पिछड़ने के बाद टीम ने संयम बनाए रखा और लगातार आक्रमण करते हुए तीन गोल दागे। खिलाड़ियों ने दबाव की स्थिति में बेहतरीन खेल दिखाया और अंततः जीत दर्ज कर अगले दौर में प्रवेश किया। हालाँकि,अर्जेंटीना की इस शानदार वापसी पर रेफरी से जुड़े विवादों की छाया पड़ गई है।
फीफा की ओर से फिलहाल इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था मिस्र की शिकायत पर किस प्रकार विचार करती है और क्या रेफरी के फैसलों की कोई स्वतंत्र समीक्षा कराई जाती है। यदि जाँच होती है,तो यह विश्व कप के दौरान रेफरिंग मानकों और वीडियो असिस्टेंट रेफरी प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में हर फैसला बेहद अहम होता है और एक छोटी सी त्रुटि भी किसी टीम के पूरे अभियान को समाप्त कर सकती है। यही कारण है कि मिस्र फुटबॉल फेडरेशन इस मामले को केवल एक हार के रूप में नहीं देख रहा,बल्कि वह इसे निष्पक्ष प्रतियोगिता और खेल भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मान रहा है। अब सभी की निगाहें फीफा के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस शिकायत की किस तरह जाँच करता है और क्या रेफरी से जुड़े विवादों पर कोई कार्रवाई की जाती है। वहीं मिस्र की टीम भले ही विश्व कप से बाहर हो गई हो,लेकिन इस मुकाबले के बाद उठे सवाल आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।
