अदीस अबाबा,13 मई (युआईटीवी)- अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हंतावायरस संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियों तथा आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल अफ्रीका में इस बीमारी का खतरा कम स्तर पर है,लेकिन हाल के अंतर्राष्ट्रीय मामलों को देखते हुए निगरानी और तैयारियों को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। संयुक्त तकनीकी ब्रीफिंग के दौरान दोनों संस्थाओं ने स्पष्ट किया कि हंतावायरस के खिलाफ समय रहते सतर्कता बरतना भविष्य में किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अफ्रीका सीडीसी में आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया प्रभाग के प्रमुख याप बौम ने कहा कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में अभी तक हंतावायरस का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है,लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्वास्थ्य एजेंसियाँ लापरवाह हो जाएँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाए रखना और संभावित आपात स्थिति के लिए पहले से तैयारी करना बेहद आवश्यक है। उनके अनुसार,किसी भी संक्रामक बीमारी से बचाव की शुरुआत रोजमर्रा की साधारण सावधानियों से होती है।
याप बौम ने लोगों से अपील की कि वे बुखार,सिरदर्द,मांसपेशियों में दर्द,थकान और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए,क्योंकि जल्दी पहचान और इलाज संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोक सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत है,ताकि किसी भी संभावित मामले का समय रहते पता लगाया जा सके।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है,जब अंतर्राष्ट्रीय क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर हंतावायरस संक्रमण के कुछ मामले सामने आए हैं। यह जहाज अर्जेंटीना से स्पेन के कैनरी द्वीप समूह की ओर जा रहा था और इसमें 147 लोग सवार थे। इस घटना के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने संक्रमण के प्रसार को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही संक्रमण के मामले सीमित हों,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संपर्क के इस दौर में किसी भी वायरस के तेजी से फैलने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अफ्रीका क्षेत्रीय कार्यालय में आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया की निदेशक मैरी-रोसेलिन बेलिज़ेयर ने कहा कि वर्तमान वैश्विक जोखिम का स्तर अभी कम है,लेकिन यह सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि स्वास्थ्य प्रणालियाँ पूरी तरह तैयार रहें। उन्होंने कहा कि तैयारी का अर्थ घबराहट नहीं होता,बल्कि इसका मतलब है कि निगरानी,जाँच और प्रतिक्रिया से जुड़ी व्यवस्थाएँ हर समय सक्रिय रहें।
मैरी-रोसेलिन बेलिज़ेयर ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों और तकनीकी टीमों को संभावित मामलों की पहचान करने और सही तरीके से उनका इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए सिर्फ अस्पतालों की तैयारी काफी नहीं होती,बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सही समय पर जानकारी और सलाह लोगों तक पहुँचाई जाए,तो संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने इस दौरान हंतावायरस के संक्रमण के कारणों और बचाव के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मल-मूत्र,लार या उनके संपर्क में आने से फैलता है। कई बार संक्रमित धूल या हवा के जरिए भी वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। ग्रामीण इलाकों और ऐसे स्थानों पर जहाँ साफ-सफाई की कमी होती है,वहाँ संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को घरों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भोजन को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाना चाहिए,ताकि चूहे वहाँ तक न पहुँच सकें। इसके अलावा घरों और गोदामों में मौजूद छोटे छेद या प्रवेश बिंदुओं को बंद करने की जरूरत बताई गई,ताकि चूहों का प्रवेश रोका जा सके। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यदि कहीं चूहों का मल-मूत्र दिखाई दे तो उसे साफ करते समय दस्ताने और कीटाणुनाशक का उपयोग जरूर किया जाए।
ब्रीफिंग के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों,निगरानी टीमों और प्रकोप से निपटने वाले विशेषज्ञों को हंतावायरस से जुड़ी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जानकारी भी दी गई। इसमें वायरस के फैलने के तरीके,इसके लक्षण,जाँच प्रक्रिया और रोकथाम रणनीतियों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि महामारी विज्ञान से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान देशों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड महामारी के बाद दुनिया भर के देशों में संक्रामक रोगों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब स्वास्थ्य एजेंसियां किसी भी नए संक्रमण या वायरस को लेकर पहले से अधिक सतर्क रहती हैं। हंतावायरस को लेकर जारी यह चेतावनी भी उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है,जिसमें संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
हालाँकि,स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान में अफ्रीका में हंतावायरस का कोई बड़ा प्रकोप नहीं है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है,लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाही भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। इसलिए हर देश को अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए सरकारों और जनता दोनों की जिम्मेदारी समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। यदि लोग साफ-सफाई, सुरक्षित भोजन भंडारण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें,तो संक्रमण के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। वहीं स्वास्थ्य एजेंसियों को समय पर जाँच,निगरानी और उपचार की व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
हंतावायरस को लेकर जारी इस वैश्विक सतर्कता ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक दुनिया में स्वास्थ्य सुरक्षा सिर्फ किसी एक देश का मुद्दा नहीं रह गई है। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग,समय पर सूचना साझा करना और मजबूत स्वास्थ्य तंत्र ही भविष्य में संभावित महामारी जैसी स्थितियों से दुनिया को सुरक्षित रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
