हुगली,21 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चुनावी माहौल गरमा गया है,जहाँ तृणमूल कांग्रेस ने हुगली जिले की उत्तरपारा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार दिपांजन चक्रवर्ती के खिलाफ चुनाव आयोग में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा “मातृ शक्ति भरोसा कार्ड” नामक एक योजना के जरिए मतदाताओं को आर्थिक लाभ का लालच देकर प्रभावित करने की कोशिश कर रही है,जो चुनावी नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
टीएमसी द्वारा दायर शिकायत में कहा गया है कि भाजपा उम्मीदवार और उनके समर्थक उत्तरपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं से एक फॉर्म भरवा रहे हैं,जिसे “मातृ शक्ति भरोसा कार्ड” कहा जा रहा है। आरोप है कि इस फॉर्म के माध्यम से मतदाताओं को यह वादा किया जा रहा है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है,तो उन्हें हर महीने 3000 रुपये का भत्ता दिया जाएगा। टीएमसी का कहना है कि इस तरह का वादा चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है,जो न केवल अनैतिक है,बल्कि कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आता है।
इस मामले को लेकर टीएमसी ने भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त,पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी,हुगली के जिला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित सामान्य पर्यवेक्षक को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की माँग की है। पार्टी ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी इस तरह के वादों के साथ एकत्र करना और उन्हें आर्थिक लाभ का आश्वासन देना,जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। टीएमसी ने यह भी मांग की है कि केवल इस कृत्य के आधार पर भाजपा उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जानी चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तरपारा सीट पर यह विवाद चुनावी माहौल को और अधिक तीखा बना सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है,जहाँ दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। ऐसे में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं,लेकिन चुनाव आयोग के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हों।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच टीएमसी ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है,जिसमें केंद्रीय बलों की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। इससे पहले 17 अप्रैल को टीएमसी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सीआरपीएफ के जवान कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवारों के साथ नजर आ रहे हैं और मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
टीएमसी के अनुसार,यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है। पार्टी ने अपने पत्र में कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ न केवल कानून के खिलाफ हैं,बल्कि यह मतदाताओं में भय का माहौल भी पैदा करती हैं,जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान की प्रक्रिया प्रभावित होती है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि इस तरह का व्यवहार भारतीय न्याय संहिता 2023 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ गया है कि वह इन मामलों की निष्पक्ष जाँच करे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। चुनाव आयोग की भूमिका इस समय बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है,क्योंकि उसे यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अवैध तरीकों का इस्तेमाल न किया जाए।
वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन पार्टी के सूत्रों का कहना है कि यह आरोप निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उनका दावा है कि भाजपा हमेशा निष्पक्ष चुनाव की पक्षधर रही है और वह किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों में शामिल नहीं है।
इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जहाँ एक ओर टीएमसी इन आरोपों के जरिए भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है,वहीं भाजपा इसे राजनीतिक साजिश करार दे सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या इन आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।
उत्तरपारा विधानसभा सीट पर उठे इस विवाद ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मतदाताओं के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजर अब चुनाव आयोग की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
