नई दिल्ली,22 मई (युआईटीवी)- नरेंद्र मोदी और निकोस क्रिस्टोडौलिड्स के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश,तकनीक,शिक्षा,रक्षा,सुरक्षा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,फिनटेक, अनुसंधान और सांस्कृतिक सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने भारत और साइप्रस के संबंधों को नई दिशा देने और वैश्विक चुनौतियों के बीच सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बैठक ऐसे समय में हुई है,जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है। साइप्रस को यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है और हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा राजनीतिक संबंधों में तेजी आई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
हैदराबाद हाउस में बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला और उन्होंने साथ में तस्वीर भी खिंचवाई। इससे पहले राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने भारत की स्वतंत्रता और अहिंसा की विरासत की सराहना भी की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-साइप्रस संबंधों के साथ-साथ भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि नई दिल्ली में साइप्रस के राष्ट्रपति से मिलकर खुशी हुई और भारत-साइप्रस संबंधों को मजबूत करने के लिए उनके सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइप्रस भारत के लिए केवल एक यूरोपीय साझेदार ही नहीं,बल्कि निवेश और व्यापार के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण देश है। साइप्रस लंबे समय से भारत में निवेश करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। दोनों देशों के बीच वित्तीय सेवाओं,जहाजरानी,पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स की यह यात्रा दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार,बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक,फिनटेक और नवाचार जैसे आधुनिक क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है,जबकि साइप्रस यूरोप में वित्तीय और तकनीकी सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स गुरुवार को भारत पहुँचे थे। नई दिल्ली एयरपोर्ट पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और यह दौरा दोनों देशों की मजबूत होती साझेदारी का प्रतीक है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह यात्रा जून 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा के बाद बने सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाने का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी की उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक,रणनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति देने पर जोर दिया था। अब राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स की भारत यात्रा को उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है।
भारत और साइप्रस के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर भी बैठक में चर्चा हुई। भूमध्यसागर क्षेत्र में साइप्रस की रणनीतिक स्थिति और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को देखते हुए दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री सुरक्षा,साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देश आने वाले समय में अधिक समन्वय बढ़ा सकते हैं।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु ने उनके सम्मान में आधिकारिक भोज का आयोजन किया है। कूटनीतिक हलकों में इसे दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
नई दिल्ली पहुँचने से पहले राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने मुंबई का भी दौरा किया था। वहाँ उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया का दौरा किया और एनएसई इंडिया की घंटी बजाई। इस दौरान उन्होंने एनएसई के चेयरमैन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर भारत और साइप्रस के बीच वित्तीय सहयोग और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा की।
एनएसई इंडिया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और नए सहयोग के अवसरों पर विस्तृत बातचीत हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि साइप्रस भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुँच का एक अहम माध्यम बन सकता है,जबकि भारत साइप्रस के लिए एशिया के बड़े बाजारों तक पहुँच का अवसर प्रदान करता है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ संबंधों को लगातार गहरा कर रहा है। साइप्रस के साथ बढ़ती साझेदारी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश और तकनीकी सहयोग में तेजी आने से आने वाले वर्षों में संबंधों को नई ऊँचाई मिलने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास,रणनीतिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी का मजबूत संकेत माना जा रहा है। नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और साइप्रस आने वाले समय में अपने संबंधों को और व्यापक तथा मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
