प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई उड़ान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निवेश,नवाचार और व्यापार बढ़ाने का दिया भरोसा, ‘जापान बिजनेस वीक’ की घोषणा

नई दिल्ली,3 जुलाई (युआईटीवी)- भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने दोनों देशों के दशकों पुराने भरोसेमंद रिश्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और जापान की साझेदारी केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं है,बल्कि यह साझा विकास, तकनीकी प्रगति,नवाचार और वैश्विक समृद्धि की मजबूत नींव भी है। प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि भारत निवेश,विनिर्माण और तकनीकी सहयोग के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में से एक बन चुका है और सरकार भविष्य में भी उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए लगातार काम करती रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत मंच पर मौजूद जापानी उद्योग जगत और विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए की। उन्होंने कहा कि इस मंच पर उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत खुशी और गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यहाँ मौजूद कई जापानी कंपनियाँ दशकों से भारत के साथ जुड़ी हुई हैं और भारत की आर्थिक प्रगति की साझेदार रही हैं। कुछ कंपनियाँ तो एक सदी से भी अधिक समय से भारत के विकास में योगदान दे रही हैं। उन्होंने उन नए निवेशकों और कंपनियों का भी स्वागत किया, जो पहली बार इस साझेदारी का हिस्सा बन रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह सहयोग और अधिक मजबूत होगा तथा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई दिशा देगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता वास्तव में विशेष है,क्योंकि यह केवल आर्थिक हितों पर आधारित नहीं है,बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास,पारदर्शिता और साझा मूल्यों की मजबूत नींव पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी की अनेक सफल मिसालें आज दुनिया के सामने हैं। इसी क्रम में उन्होंने हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के नए अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र का उल्लेख किया,जिसका उद्घाटन कुछ समय पहले ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। उन्होंने कहा कि यह संयंत्र भारत-जापान सहयोग की सफलता का जीवंत उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि आज सुजुकी समूह की दुनिया भर में बनने वाली लगभग दो-तिहाई कारों का निर्माण भारत में होता है और इन्हें दुनिया के 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में विकसित उत्पादन क्षमता,कुशल मानव संसाधन और सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों ने अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों का विश्वास लगातार बढ़ाया है।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची से हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत भी की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें बताया गया है कि प्रधानमंत्री ताकाइची को मोटर बाइक का काफी शौक है। इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच सहज और सकारात्मक माहौल देखने को मिला। इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि कावासाकी,यामाहा और होंडा जैसी जापानी कंपनियों की भारत में निर्मित मोटरसाइकिलें आज दुनिया के अनेक देशों में पहुँच रही हैं और वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र ही नहीं,बल्कि एयर कंडीशनर,बिजली ग्रिड उपकरण,मेडिकल टेक्नोलॉजी और कई अन्य क्षेत्रों में भी भारत और जापान का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब जापान की उच्च तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश भारत की गति,क्षमता और बड़े पैमाने पर उत्पादन की ताकत के साथ जुड़ते हैं,तब उसका लाभ केवल दोनों देशों को ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया को मिलता है। उन्होंने इस साझेदारी को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समय पूरी दुनिया अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ,व्यापार में अनिश्चितता और कई क्षेत्रों में माँग में कमी जैसी समस्याएँ वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में देशों को अधिक लचीली और मजबूत आर्थिक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक पुरानी कहावत है कि जब परिस्थितियां कठिन होती हैं,तब मजबूत लोग और अधिक मेहनत करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने भी इसी सोच के साथ चुनौतियों को अवसर में बदलने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। पिछले वित्तीय वर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही,जो वैश्विक स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान सरकार ने लगातार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया है,जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत,पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनी है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का लाभ विदेशी निवेशकों और घरेलू उद्योगों दोनों को मिला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के महीनों में लागू किए गए आर्थिक सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर व्यवस्था,सुशासन और कारोबार करने में आसानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य उद्योगों के सामने आने वाली बाधाओं को कम करना और निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए और अधिक खोला है,जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएँ,आधुनिक बुनियादी ढाँचे का विकास,डिजिटल परिवर्तन और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों ने भारत को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बना दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन्हीं नीतिगत सुधारों का परिणाम है कि जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन के सर्वेक्षण में भारत लगातार चौथे वर्ष जापानी कंपनियों के लिए सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य बना हुआ है। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक नीतियों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया।

प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत के लिए एक नई पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय जल्द ही एक विशेष “जापान बिजनेस वीक” का आयोजन करेगा। इस पहल का उद्देश्य जापानी निवेशकों और भारत सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात करेंगे,उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा भारत में व्यापार करना और अधिक आसान बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि जापानी निवेशकों को भारत में किसी भी प्रकार की अनावश्यक प्रशासनिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप नीतिगत बदलाव करने के लिए हमेशा तैयार है। उनका कहना था कि यह पहल भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ निवेश,तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन के नए अवसर भी पैदा करेगी।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान का संबंध आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की साझेदारी केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि हरित ऊर्जा,डिजिटल तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,आधुनिक विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचार जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी नए आयाम स्थापित करेगी। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से भारत में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत एक विश्वसनीय,स्थिर और तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है,जहाँ अवसरों की कोई कमी नहीं है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों का सहयोग आने वाले समय में न केवल भारत और जापान के लिए,बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी विकास और समृद्धि का नया अध्याय लिखेगा।