पुणे,3 जुलाई (युआईटीवी)- पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी को शुक्रवार को एक बार फिर वडगांव कोर्ट में पेश किया जाएगा। दोनों की पुलिस रिमांड शुक्रवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में लोनावला ग्रामीण पुलिस अदालत से उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की माँग करेगी। इसके साथ ही पुलिस दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति भी माँगने की तैयारी में है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट से इस सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिल सकते हैं और अब तक सामने नहीं आए तथ्यों का भी खुलासा हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार,अब तक की जाँच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं। इन साक्ष्यों की तकनीकी जाँच जारी है और इन्हें आरोपियों से हुई पूछताछ के दौरान मिले बयानों से मिलान किया जा रहा है। जाँच टीम का कहना है कि मामले की हर कड़ी को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है,ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्यों के साथ आरोपपत्र प्रस्तुत किया जा सके।
इसी क्रम में 2 जुलाई को पुलिस सिया गोयल को उसके घर लेकर पहुँचीं थी। वहाँ तलाशी के दौरान पुलिस ने उसकी एक पैंट जब्त की,जिसे जाँच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस कपड़े को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा। उम्मीद है कि इससे मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रमाण सामने आ सकते हैं। हालाँकि,पुलिस ने फिलहाल इस बात का खुलासा नहीं किया है कि इस कपड़े से किस प्रकार के साक्ष्य मिलने की संभावना है,लेकिन जाँच एजेंसी इसे बेहद अहम मानकर आगे बढ़ रही है।
गुरुवार को भी लोनावला ग्रामीण पुलिस ने दोनों आरोपियों से कई घंटों तक गहन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पुलिस ने डिजिटल रिकॉर्ड,घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और दोनों के बयानों के आधार पर कई सवाल किए। फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी वडगांव पुलिस स्टेशन के लॉकअप में बंद हैं। पुलिस का कहना है कि जाँच अभी अधूरी है और कई पहलुओं की पुष्टि की जानी बाकी है। इसी वजह से दोनों की पुलिस रिमांड बढ़ाना आवश्यक है।
जाँच एजेंसी ने इससे पहले इस मामले में घटनास्थल पर दोनों आरोपियों की मौजूदगी में पूरे घटनाक्रम का सीन रिक्रिएशन भी कराया था। यह प्रक्रिया लोनावला स्थित लोहगढ़ किले के उस इलाके में की गई,जहाँ केतन अग्रवाल की कथित तौर पर हत्या की गई थी। पुलिस ने आरोपियों से घटनास्थल पर पूरी घटना को क्रमवार दोहराने के लिए कहा,ताकि यह समझा जा सके कि वारदात किस तरह अंजाम दी गई और घटनाक्रम के दौरान दोनों की भूमिका क्या रही। अधिकारियों के अनुसार,सीन रिक्रिएशन से जाँच में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं,जिनका मिलान अन्य साक्ष्यों के साथ किया जा रहा है।
इस हत्याकांड में सबसे चौंकाने वाला खुलासा उस समय हुआ था,जब पुलिस ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने हत्या से पहले ‘मर्डर रिहर्सल’ करने की बात स्वीकार की। पुलिस के मुताबिक,सिया गोयल और चेतन चौधरी पहले पुणे के लुल्ला नगर स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र में पहुँचे थे,जो सैन्य क्षेत्र के निकट बताया जाता है। वहाँ दोनों ने कथित तौर पर यह परखने की कोशिश की कि यदि किसी व्यक्ति को पहाड़ी से धक्का दिया जाए,तो उसकी मौत हो सकती है या नहीं। पुलिस का कहना है कि इस कथित अभ्यास के बाद दोनों ने अपनी योजना को अंतिम रूप दिया।
जाँच में यह भी सामने आया कि कथित रिहर्सल के बाद दोनों आरोपियों ने लोनावला के ऐतिहासिक लोहगढ़ किले की पहाड़ी को वारदात के लिए चुना। पुलिस का आरोप है कि यहीं पर केतन अग्रवाल को पहाड़ी से धक्का देकर उनकी हत्या की गई। हालाँकि,इन सभी आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस इन्हीं तथ्यों के आधार पर अपनी जाँच आगे बढ़ा रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में डिजिटल साक्ष्य,फॉरेंसिक रिपोर्ट और आरोपियों के बयानों के बीच सामंजस्य स्थापित करना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि जाँच टीम मोबाइल फोन,इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की बारीकी से जाँच कर रही है। विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात से पहले और बाद में दोनों आरोपियों की गतिविधियाँ क्या थीं और क्या डिजिटल रिकॉर्ड पुलिस की जाँच को और मजबूत बनाते हैं।
अब सभी की नजरें शुक्रवार को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत यह तय करेगी कि पुलिस को दोनों आरोपियों की हिरासत आगे भी दी जाए या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अदालत पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति देती है या नहीं। यदि अनुमति मिलती है और दोनों आरोपी अपनी सहमति देते हैं,तो जाँच एजेंसी को मामले की कई अनसुलझी कड़ियों तक पहुँचने में मदद मिल सकती है।
केतन अग्रवाल हत्याकांड ने शुरुआत से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। मामले में सामने आए कथित खुलासों,डिजिटल साक्ष्यों,घटनास्थल पर सीन रिक्रिएशन और कथित मर्डर रिहर्सल जैसी बातों ने इस जाँच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। पुलिस का कहना है कि वह हर पहलू की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जाँच कर रही है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जा रहा है। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट,अदालत के आदेश और आगे की पूछताछ इस बहुचर्चित हत्याकांड की जाँच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।
