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एसबीआई का तिमाही मुनाफा बढ़कर 19,683 करोड़ रुपए पहुँचा,फिर भी शेयर बाजार में आई तेज गिरावट

मुंबई,9 मई (युआईटीवी)- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए बताया कि बैंक के स्टैंडअलोन मुनाफे में सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ बढ़कर 19,683.75 करोड़ रुपए हो गया,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 18,642.59 करोड़ रुपए था। हालाँकि,मुनाफे में वृद्धि के बावजूद परिचालन प्रदर्शन और मार्जिन पर दबाव के कारण निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही और बैंक के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली।

बैंक के अनुसार,मार्च तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड मुनाफा भी मामूली बढ़ोतरी के साथ 20,161.30 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 19,941.39 करोड़ रुपए था। बैंक ने कहा कि वैश्विक और घरेलू आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उसका मुख्य बैंकिंग कारोबार स्थिर बना हुआ है और परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार सुधार देखने को मिला है।

हालाँकि,बैंक के परिचालन मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। चौथी तिमाही में परिचालन लाभ सालाना आधार पर 11.45 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 15.7 प्रतिशत घटकर 27,704 करोड़ रुपए रह गया। विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती लागत और मार्जिन पर दबाव की वजह से परिचालन प्रदर्शन प्रभावित हुआ है।

तिमाही के दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज आय यानी नेट इंटरेस्ट इनकम में वृद्धि देखने को मिली। एसबीआई ने बताया कि मार्च तिमाही में शुद्ध ब्याज आय 4.1 प्रतिशत बढ़कर 44,380 करोड़ रुपए हो गई,जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 42,618 करोड़ रुपए थी। यह वृद्धि बैंक के मजबूत ऋण विस्तार और ब्याज आय में बढ़ोतरी का संकेत मानी जा रही है।

हालाँकि,बैंक के घरेलू शुद्ध ब्याज मार्जिन यानी एनआईएम में गिरावट दर्ज की गई। चौथी तिमाही में यह घटकर 2.93 प्रतिशत रह गया,जो एक वर्ष पहले की तुलना में 21 आधार अंक और पिछली तिमाही से 18 आधार अंक कम है। विशेषज्ञों के अनुसार,जमा पर बढ़ती ब्याज लागत और प्रतिस्पर्धा के कारण बैंकों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।

इसके बावजूद बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार जारी रहा। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ यानी ग्रॉस एनपीए सालाना आधार पर 4.46 प्रतिशत घटकर 73,452 करोड़ रुपए रह गईं। इसके साथ ही सकल एनपीए अनुपात एक वर्ष पहले के 1.82 प्रतिशत से सुधरकर 1.49 प्रतिशत हो गया। यह बैंक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है क्योंकि इससे खराब ऋणों पर नियंत्रण मजबूत होने का पता चलता है।

शुद्ध एनपीए अनुपात में भी सुधार देखने को मिला। हालाँकि,इसमें तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि हुई,लेकिन सालाना आधार पर यह घटकर 0.39 प्रतिशत पर आ गया,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 0.47 प्रतिशत था। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि एनपीए स्तर का दो दशकों के निचले स्तर के करीब पहुँचना एसबीआई की जोखिम प्रबंधन क्षमता और रिकवरी प्रक्रिया में सुधार को दर्शाता है।

नतीजों के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएस शेट्टी ने कहा कि बैंक की विदेशी शाखाएँ लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि विदेशों में बैंक के एडवांस में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है,जबकि डॉलर के संदर्भ में यह वृद्धि 8 प्रतिशत रही। उनके अनुसार,वैश्विक बाजारों में भारतीय बैंकिंग सेवाओं की माँग बढ़ने से एसबीआई को फायदा मिल रहा है।

सीएस शेट्टी ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक का घरेलू क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो 73.08 प्रतिशत पर रहा,जिसमें 3.37 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि बैंक के पास भविष्य की क्रेडिट माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। उनका कहना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ऋण की माँग मजबूत बनी हुई है और बैंक आने वाले समय में भी विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक का ग्रॉस एनपीए दो दशकों के निचले स्तर पर है,जो बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाता है। उनके अनुसार,एसबीआई ने पिछले कुछ वर्षों में बैलेंस शीट को मजबूत करने,जोखिम कम करने और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है।

हालाँकि,मजबूत मुनाफे और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के बावजूद शेयर बाजार में बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। नतीजों के बाद बीएसई पर एसबीआई का शेयर 6.74 प्रतिशत गिरकर 1,018.40 रुपए पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को बैंक के परिचालन मुनाफे और मार्जिन में आई गिरावट को लेकर चिंता रही,जिसका असर शेयर कीमत पर दिखाई दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार,बैंकिंग क्षेत्र इस समय ब्याज दरों,जमा लागत और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में भले ही ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई हो,लेकिन मार्जिन बनाए रखना बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

इसके बावजूद एसबीआई का समग्र प्रदर्शन भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में एसबीआई ने डिजिटल बैंकिंग,कॉर्पोरेट लोन,रिटेल बैंकिंग और अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में बैंक मार्जिन पर दबाव को नियंत्रित करने और परिचालन लाभ में सुधार करने में सफल रहता है,तो उसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती है। फिलहाल बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत ऋण वृद्धि बैंक के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं,जबकि निवेशकों की नजर अब आने वाले महीनों में बैंक के मार्जिन प्रदर्शन पर बनी रहेगी।