तेहरान,13 जुलाई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुँचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर कथित हमलों के जवाब में बहरीन,कुवैत,ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इसे अपनी जवाबी सैन्य कार्रवाई के पाँचवें चरण का हिस्सा बताया है। इन दावों के सामने आने के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संभावित सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अनुसार,यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा किए गए कथित सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। संगठन का कहना है कि उसने बहरीन के जुफैर क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा ओमान में मौजूद लंबी दूरी की हवाई निगरानी रडार प्रणाली और पोत पहचान रडार को मिसाइलों तथा ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इन हमलों में ओमान स्थित दोनों रडार प्रणालियाँ पूरी तरह नष्ट कर दी गई हैं।
हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित देशों या अमेरिका की ओर से तत्काल ऐसी किसी क्षति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद ईरान के बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहरा दी है।
ईरानी सैन्य संगठन ने अपने बयान में स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतर्राष्ट्रीय जहाजरानी के लिए सुरक्षित और खुला बनाए रखने का एकमात्र तरीका यह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सैन्य हस्तक्षेप को समाप्त करे और खाड़ी के तटीय देशों की समुद्री संप्रभुता का सम्मान करे। संगठन ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य गतिविधियाँ जारी रखता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को और अधिक गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है,जहाँ से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। यदि इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
इससे पहले ईरान अपनी जवाबी कार्रवाई के चौथे चरण में भी अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का दावा कर चुका है। आईआरजीसी के अनुसार उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया था। संगठन का कहना है कि इस कार्रवाई में अमेरिका की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के ठिकाने को निशाना बनाया गया, जहाँ दो एचआईएमएआरएस मिसाइल प्रक्षेपक और मिसाइलों से भरे गोदामों में भीषण आग लग गई। ईरान का दावा है कि इस हमले में संबंधित सैन्य उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए।
इन दावों के बीच ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने भी एक महत्वपूर्ण दावा किया है। एजेंसी के अनुसार,बंदर अब्बास क्षेत्र में ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने अमेरिकी निर्मित “लुकास” आत्मघाती ड्रोन को मार गिराया। एजेंसी का कहना है कि ड्रोन को सटीक निशाना बनाकर नष्ट किया गया और वह अपने लक्ष्य तक पहुँचने में सफल नहीं हो सका। हालाँकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बहरीन में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अलर्ट पर हैं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश में एक बार फिर एयर रेड सायरन बजाए गए। मंत्रालय ने नागरिकों और देश में रह रहे विदेशी नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएँ नहीं,शांत रहें और निकटतम सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ। साथ ही लोगों से केवल सरकारी और आधिकारिक माध्यमों से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
बहरीन में पिछले कुछ घंटों के दौरान कई बार सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और संभावित खतरे को देखते हुए आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। कई सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है,जबकि संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच यह सैन्य टकराव आगे बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों के कारण बहरीन,कुवैत,ओमान और अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा भी सीधे प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहाँ किसी प्रकार का सैन्य संघर्ष या नौवहन बाधित होता है,तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को जटिल बना दिया है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार आक्रामक बयान और सैन्य गतिविधियों के दावे सामने आने से स्थिति और संवेदनशील होती जा रही है। ऐसे में किसी भी छोटी घटना के बड़े सैन्य संघर्ष में बदलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल ईरान ने जिन हमलों का दावा किया है,उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित देशों की ओर से भी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। इसके बावजूद इन दावों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। बहरीन,कुवैत और ओमान सहित कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है,जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या बढ़ते तनाव को कूटनीतिक प्रयासों के जरिए नियंत्रित किया जा सकेगा।
