डोमिनोज (तस्वीर क्रेडिट@BHEEM_BAUDH)

जुबिलेंट फूडवर्क्स का मुनाफा 42% घटकर 108 करोड़ रुपये पर पहुँचा,राजस्व में 11.8% की बढ़ोतरी

मुंबई,7 नवंबर (युआईटीवी)- देश में डोमिनोज पिज्जा सहित कई क्विक सर्विस रेस्टोरेंट ब्रांडों का संचालन करने वाली कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के वित्तीय नतीजे सामने आ गए हैं। कंपनी को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मुनाफे के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। सितंबर 2026 में समाप्त हुई तिमाही के दौरान उसका कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 41.9 प्रतिशत गिरकर 108 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी ने 186 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था। हालाँकि,इस दौरान कंपनी के परिचालन से होने वाली आय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजस्व में वृद्धि के बावजूद मुनाफे में आई गिरावट ने कंपनी के तिमाही प्रदर्शन को चर्चा में ला दिया है।

कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में अपने वित्तीय परिणामों का ब्योरा साझा किया। इसके अनुसार, समीक्षाधीन तिमाही में परिचालन से प्राप्त राजस्व सालाना आधार पर 11.8 प्रतिशत बढ़कर 2,608 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आँकड़ा 2,332 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी ने एक साल के भीतर अपनी आय में 276 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी के मुताबिक,राजस्व में इस वृद्धि के पीछे मुख्य योगदान उसके फूड सर्विसेज कारोबार का रहा। ग्राहकों को भोजन और अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले इस कारोबार में बढ़ोतरी से कुल परिचालन आय को मजबूती मिली।

जुबिलेंट फूडवर्क्स के तिमाही नतीजों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद उसका शुद्ध मुनाफा काफी कम हो गया। एक तरफ परिचालन से होने वाली आय में लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई,वहीं दूसरी ओर मुनाफे में करीब 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल सितंबर तिमाही में कंपनी ने 186 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था,जबकि इस बार यह घटकर 108 करोड़ रुपये रह गया।

आँकड़ों से पता चलता है कि कंपनी के कारोबार का विस्तार जारी है,लेकिन आय में हुई बढ़ोतरी का पूरा लाभ शुद्ध मुनाफे में दिखाई नहीं दिया। हालाँकि,उपलब्ध वित्तीय जानकारी में मुनाफे में गिरावट के अलग-अलग कारणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में केवल राजस्व के आँकड़ों के आधार पर कंपनी की लाभप्रदता में आई कमी की पूरी वजह तय करना उचित नहीं होगा। निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों की नजर अब कंपनी के खर्च, परिचालन लागत और आने वाली तिमाहियों के प्रदर्शन पर रहेगी।

कंपनी के परिचालन प्रदर्शन का एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक ईबीआईटीडीए भी बढ़ा है। ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई यानी ईबीआईटीडीए सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत बढ़कर 513 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने 478 करोड़ रुपये का ईबीआईटीडीए दर्ज किया था। इस तरह कंपनी की परिचालन कमाई में 35 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।

हालाँकि,ईबीआईटीडीए में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के मार्जिन में गिरावट देखने को मिली। समीक्षाधीन तिमाही में ईबीआईटीडीए मार्जिन 80 आधार अंक कम होकर 19.7 प्रतिशत रह गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह 20.5 प्रतिशत था। मार्जिन में आई इस कमी का अर्थ है कि कंपनी को राजस्व के अनुपात में परिचालन स्तर पर पहले की तुलना में कम कमाई हुई। राजस्व की वृद्धि और ईबीआईटीडीए में बढ़ोतरी के बावजूद मार्जिन का नीचे आना कंपनी के लिए ध्यान देने वाला पहलू है।

किसी भी क्विक सर्विस रेस्टोरेंट कंपनी के लिए बिक्री बढ़ाने के साथ-साथ लागत और परिचालन खर्च को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे कारोबार में खाद्य सामग्री, कर्मचारियों, रेस्तरां संचालन, वितरण और अन्य सेवाओं से जुड़े खर्च वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। जुबिलेंट फूडवर्क्स के मामले में भी राजस्व बढ़ने के साथ मार्जिन में आई गिरावट पर बाजार की नजर रहेगी। आने वाले समय में कंपनी किस तरह अपनी परिचालन दक्षता को बेहतर बनाती है,इसका असर उसकी लाभप्रदता पर पड़ सकता है।

वित्तीय नतीजों के साथ ही जुबिलेंट फूडवर्क्स ने कंपनी के प्रबंधन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी भी शेयर बाजार को दी है। कंपनी की सचिव,अनुपालन अधिकारी और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक मोना अग्रवाल की नोटिस अवधि को बढ़ाने का फैसला किया गया है। कंपनी ने बताया कि यह निर्णय निदेशक मंडल और मोना अग्रवाल के बीच आपसी सहमति से लिया गया है। इसका उद्देश्य उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों का व्यवस्थित तरीके से हस्तांतरण सुनिश्चित करना है।

संशोधित व्यवस्था के अनुसार, मोना अग्रवाल अब पहले से निर्धारित 13 नवंबर 2026 के बजाय 31 मार्च 2027 को कारोबारी समय समाप्त होने तक अपने मौजूदा पदों पर बनी रहेंगी। इससे कंपनी को उनके कार्यभार और संबंधित जिम्मेदारियों को दूसरे अधिकारी या अधिकारियों को सौंपने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। कंपनी के अनुसार,यह बदलाव पद से उनके जाने की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

जुबिलेंट फूडवर्क्स ने बताया कि मोना अग्रवाल के इस्तीफे के संबंध में 13 अगस्त 2026 को दी गई सूचना में शामिल अन्य सभी जानकारियां पहले की तरह ही रहेंगी। इसमें उनके इस्तीफे का कारण भी शामिल है। यानी कंपनी ने केवल नोटिस अवधि और पद पर बने रहने की अंतिम तारीख में बदलाव किया है। इस्तीफे से जुड़ी बाकी जानकारी में कोई संशोधन नहीं किया गया है।

कंपनी ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में स्पष्ट किया कि यह जानकारी 13 अगस्त 2026 को मोना अग्रवाल के इस्तीफे के संबंध में दी गई पूर्व सूचना के संदर्भ में जारी की गई है। लिस्टिंग नियमों के विनियम 30 और अनुसूची तीन के तहत कंपनी ने निदेशक मंडल और मोना अग्रवाल के बीच हुए समझौते की जानकारी साझा की। इसके तहत उनकी नोटिस अवधि बढ़ाने पर सहमति बनी,ताकि जिम्मेदारियों का हस्तांतरण व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सके।

मोना अग्रवाल कंपनी में सचिव और अनुपालन अधिकारी के साथ प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक की जिम्मेदारी भी सँभाल रही हैं। ऐसे पदों पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका कंपनी के प्रशासनिक और नियामकीय कामकाज में महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनके कार्यभार का सही तरीके से हस्तांतरण सुनिश्चित करना कंपनी के लिए जरूरी है।

कुल मिलाकर,जुबिलेंट फूडवर्क्स की सितंबर तिमाही का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कंपनी ने राजस्व और ईबीआईटीडीए में वृद्धि दर्ज की,लेकिन शुद्ध मुनाफे में बड़ी गिरावट और परिचालन मार्जिन में कमी ने चिंता बढ़ाई है। वहीं,मोना अग्रवाल की नोटिस अवधि बढ़ाने का फैसला कंपनी के प्रबंधन में बदलाव की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने की कोशिश है। अब निवेशकों की निगाह कंपनी की अगली तिमाही के नतीजों पर रहेगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि राजस्व में बढ़ोतरी के साथ मुनाफे और मार्जिन को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है।