ट्रंप ने स्टीफन मिलर को बनाया व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ (तस्वीर क्रेडिट@vipinpaswan695)

ट्रंप ने स्टीफन मिलर को बनाया व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ,आव्रजन नीति को मिल सकती है और आक्रामक धार

वाशिंगटन,7 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है। मिलर को ट्रंप का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। वह लंबे समय से राष्ट्रपति की टीम का हिस्सा रहे हैं और खास तौर पर अमेरिका की सख्त आव्रजन नीति तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब उन्हें व्हाइट हाउस के सबसे अहम प्रशासनिक पदों में से एक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की मौजूदा नीतियों और आने वाले समय की राजनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर मिलर की नियुक्ति की जानकारी दी। उन्होंने अपने सहयोगी की तारीफ करते हुए उन्हें सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में शामिल बताया। राष्ट्रपति के मुताबिक,मिलर अभी तक प्रशासन में डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम कर रहे थे। नई जिम्मेदारी के साथ वह व्हाइट हाउस के 33वें चीफ ऑफ स्टाफ बनेंगे। ट्रंप ने कहा कि मिलर प्रशासन के कामकाज और उनकी नीतियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उनके अनुभव और प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी देना उचित फैसला है।

स्टीफन मिलर की नियुक्ति की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने मौजूदा चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वाइल्स ने इस पद पर रहते हुए शानदार काम किया है और वह उनकी सेवाओं के लिए आभारी हैं। हालाँकि,ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वाइल्स को आगे किसी दूसरी जिम्मेदारी पर नियुक्त किया जाएगा या नहीं। उनके भविष्य के पद और भूमिका को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सूसी वाइल्स ने ट्रंप के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चुनाव में जीत के बाद उन्हें व्हाइट हाउस का चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया था। वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला थीं। उनके कार्यकाल में राष्ट्रपति कार्यालय के कर्मचारियों के प्रबंधन,प्रशासनिक गतिविधियों के समन्वय, नीतिगत फैसलों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने जैसी जिम्मेदारियाँ शामिल थीं। व्हाइट हाउस के भीतर राष्ट्रपति के कामकाज को व्यवस्थित रखने में चीफ ऑफ स्टाफ की भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे में वाइल्स के स्थान पर मिलर की नियुक्ति को प्रशासन की कार्यशैली में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

स्टीफन मिलर की पहचान ट्रंप प्रशासन के सबसे प्रभावशाली नीति-निर्माताओं में होती है। वह दोनों ट्रंप प्रशासनों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। खासतौर पर आव्रजन से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख हमेशा सख्त रहा है। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और आव्रजन नियमों को कठोर बनाने की नीतियों को तैयार करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।

ट्रंप की राजनीतिक रणनीति में आव्रजन का मुद्दा लंबे समय से प्रमुख रहा है। राष्ट्रपति ने चुनाव प्रचार के दौरान भी अवैध आव्रजन पर सख्त कार्रवाई करने और सीमा नियंत्रण को मजबूत बनाने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद प्रशासन ने इसी दिशा में कई कदम उठाए। इन नीतियों को तैयार करने और उन्हें लागू करने की रणनीति बनाने में मिलर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वह प्रशासन के उन चेहरों में शामिल हैं,जिन्होंने ट्रंप की आव्रजन संबंधी प्राथमिकताओं को सरकारी फैसलों का रूप देने में योगदान दिया।

अब चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में उनकी जिम्मेदारियाँ पहले से कहीं अधिक व्यापक होंगी। इस पद पर रहते हुए उन्हें राष्ट्रपति के कार्यालय के दैनिक कामकाज का समन्वय करना होगा। साथ ही,विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रपति के बीच संपर्क बनाए रखने,प्रशासनिक प्राथमिकताओं को तय करने तथा नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाने में भी उनकी अहम भूमिका होगी। राष्ट्रपति तक किस अधिकारी की पहुँच होगी और किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी,ऐसे कई मामलों में चीफ ऑफ स्टाफ का प्रभाव रहता है। इसलिए मिलर की नियुक्ति से प्रशासन के भीतर आव्रजन और घरेलू नीतियों को अधिक महत्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।

मिलर की नियुक्ति को लेकर अमेरिका में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस फैसले की आलोचना की है। कैलिफोर्निया के डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पाडिला ने कहा कि मिलर को व्हाइट हाउस के इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करके ट्रंप ने अपनी आव्रजन नीति को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

पाडिला के मुताबिक,मिलर पहले से ही उन नीतियों को आकार देने में प्रभावशाली रहे हैं, जिनके कारण कई परिवारों को अलग होना पड़ा और आव्रजन से जुड़ी छापेमारी तथा गिरफ्तारियों के अभियान तेज हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई के चलते कैलिफोर्निया के कई इलाकों में लोगों के बीच भय का माहौल बना है। उनके अनुसार,स्कूलों और कार्यस्थलों तक इस डर का असर दिखाई दे रहा है। ऐसे में मिलर को और अधिक अधिकार मिलने से इन नीतियों को लेकर चिंताएँ बढ़ सकती हैं।

डेमोक्रेटिक सीनेटर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी प्रशासन के फैसलों का विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यदि ट्रंप अपने रुख को और सख्त करते हैं,तो डेमोक्रेटिक सांसद भी पीछे नहीं हटेंगे। पाडिला ने संकेत दिया कि विपक्ष प्रशासन की नीतियों पर निगरानी रखने और उसकी जवाबदेही तय करने के लिए उपलब्ध संसदीय अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। इसमें जाँच,समन जारी करने और संघीय फंडिंग से जुड़े अधिकारों का उपयोग भी शामिल हो सकता है।

उनकी प्रतिक्रिया से साफ है कि मिलर की नियुक्ति केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की आव्रजन नीति को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच जारी राजनीतिक टकराव को भी नया रूप दे सकती है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक मंचों पर बहस तेज होने की संभावना है।

जहाँ डेमोक्रेटिक पार्टी ने मिलर की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं,वहीं रिपब्लिकन नेताओं और ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इस फैसले का समर्थन किया है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मिलर को देशभक्त बताते हुए उनकी नियुक्ति का स्वागत किया। उन्होंने सूसी वाइल्स के कार्यकाल और उनके योगदान के लिए भी आभार व्यक्त किया। वेंस के समर्थन को इस नियुक्ति के प्रति प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी सूसी वाइल्स के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि वाइल्स ने राष्ट्रपति के एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रुबियो ने मिलर के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई। उनके मुताबिक,प्रशासन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है और नई जिम्मेदारी में मिलर की भूमिका अहम होगी।

संघीय जाँच ब्यूरो के निदेशक काश पटेल ने भी नियुक्ति पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह पहले ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल से ही मिलर को जानते हैं और उनकी प्रतिबद्धता से परिचित हैं। पटेल ने भरोसा जताया कि मिलर राष्ट्रपति की टीम का प्रभावी नेतृत्व करेंगे। वहीं,व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि ट्रंप के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मिलर से बड़ा समर्थक कोई नहीं है।

व्हाइट हाउस ने भी मिलर की नियुक्ति की पुष्टि कर दी है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, रिपब्लिकन सांसदों और रूढ़िवादी विचारधारा से जुड़े नेताओं की ओर से मिल रहे समर्थन से स्पष्ट है कि उन्हें राष्ट्रपति के करीबी और प्रभावशाली सहयोगी के रूप में देखा जाता है। हालाँकि,उनकी नियुक्ति के साथ ही उनके सामने कई चुनौतियाँ भी होंगी। उन्हें राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं को प्रशासन के विभिन्न विभागों तक पहुँचाने के साथ-साथ अधिकारियों के बीच तालमेल बनाए रखना होगा।

चीफ ऑफ स्टाफ का पद अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इस पद पर बैठा व्यक्ति राष्ट्रपति के कार्यक्रमों, बैठकों, प्रशासनिक फैसलों और वरिष्ठ सलाहकारों के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रपति तक पहुँच और नीतिगत चर्चाओं में उसकी भागीदारी भी काफी मायने रखती है। ऐसे में मिलर को मिली नई जिम्मेदारी से ट्रंप के निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनका प्रभाव और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर,स्टीफन मिलर की नियुक्ति ट्रंप प्रशासन की राजनीतिक और नीतिगत दिशा का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। आव्रजन नीति पर उनके सख्त रुख को देखते हुए विपक्ष को आशंका है कि आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है। दूसरी ओर,ट्रंप के समर्थकों को उम्मीद है कि मिलर प्रशासन के एजेंडे को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई जिम्मेदारी सँभालने के बाद मिलर व्हाइट हाउस के कामकाज को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और घरेलू नीतियों, खासकर आव्रजन के मुद्दे पर प्रशासन की रणनीति में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।