नई दिल्ली,2 जुलाई (युआईटीवी)- इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस बहुचर्चित मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने मेघालय हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है,जिसमें शिलॉन्ग की निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा गया था। सरकार का कहना है कि जमानत केवल एक तकनीकी त्रुटि के आधार पर दी गई है,जबकि मामला एक सुनियोजित हत्या से जुड़ा है और आरोपी के फरार होने की आशंका भी बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का उल्लेख सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर जल्द सुनवाई की जाए। सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि हाई कोर्ट ने जिस आधार पर जमानत को सही ठहराया है, वह केवल एक प्रक्रियात्मक और तकनीकी गलती है,जिसे हत्या जैसे गंभीर अपराध में जमानत देने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की एक धारा का नंबर गलत टाइप हो गया था। उनका कहना था कि यह केवल टंकण संबंधी त्रुटि थी और इससे पूरे मामले की प्रकृति या आरोपी के अधिकारों पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी गलती को इतना बड़ा महत्व देना उचित नहीं है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में मुख्य आरोपी को जमानत दे दी जाए।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यदि सोनम रघुवंशी जमानत पर बाहर रहती हैं तो उनके फरार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। चूँकि,मामला अभी विचाराधीन है और मुकदमे की प्रक्रिया जारी है,इसलिए आरोपी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप करने और हाई कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि मेघालय हाई कोर्ट ने 29 जून को राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए शिलॉन्ग की निचली अदालत द्वारा सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर कानूनी कमियाँ पाई गई थीं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को जिन कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया,उनकी जानकारी सही ढंग से नहीं दी गई थी,जिससे उसके संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।
इससे पहले शिलॉन्ग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अप्रैल 2026 में सोनम रघुवंशी को जमानत देते हुए कहा था कि जाँच एजेंसियों ने गिरफ्तारी से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया। अदालत ने माना था कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि उसे हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालत के अनुसार यह केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि आरोपी का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है।
निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि गिरफ्तारी मेमो,अधिकारों की सूचना, चेकलिस्ट और केस डायरी से जुड़े दस्तावेजों सहित सभी रिकॉर्ड में भारतीय न्याय संहिता की धारा 403(1) दर्ज थी,जबकि वास्तविक रूप से हत्या का मामला धारा 103(1) के तहत दर्ज होना चाहिए था। अदालत ने पाया कि यह त्रुटि किसी एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी,बल्कि सभी दस्तावेजों में लगातार दोहराई गई थी। ऐसे में इसे साधारण टंकण त्रुटि मानना उचित नहीं होगा।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह दलील दी थी कि दस्तावेजों में धारा का गलत उल्लेख केवल टाइपिंग की गलती थी और इससे आरोपी को किसी प्रकार का वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकारी पक्ष का कहना था कि सोनम रघुवंशी को पूरी तरह जानकारी थी कि उन्हें हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके समर्थन में यह भी कहा गया कि उन्होंने गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे,उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था और उनके पास कानूनी सहायता के लिए वकील भी मौजूद था।
हालाँकि,अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत का कहना था कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्पष्ट और सही जानकारी देना कानून की अनिवार्य आवश्यकता है। यदि दस्तावेजों में गंभीर त्रुटियाँ हैं और आरोपी को औपचारिक रूप से सही कानूनी जानकारी नहीं दी गई,तो इसे केवल तकनीकी गलती कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मेघालय हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के इसी दृष्टिकोण को सही माना। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के अनुरूप होना अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा न्याय व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है। इसी आधार पर राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी गई और सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखी गई।
यह मामला मई 2025 में सामने आया था और पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए थे। दोनों ने प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोहरा,जिसे चेरापूँजी के नाम से भी जाना जाता है,की यात्रा की थी। इसी दौरान दोनों रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए।
कई दिनों तक चली तलाश के बाद राजा रघुवंशी का शव वीसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से बरामद किया गया। शव पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले थे,जिसके बाद हत्या की आशंका जताई गई। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और मेघालय पुलिस ने व्यापक जाँच शुरू की।
जाँच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि यह हत्या कोई आकस्मिक घटना नहीं थी,बल्कि पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस के अनुसार सोनम रघुवंशी ने अपने कथित प्रेमी और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या की योजना बनाई थी। जाँच एजेंसियों ने तकनीकी साक्ष्यों,कॉल रिकॉर्ड,यात्रा विवरण और अन्य प्रमाणों के आधार पर कई लोगों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया।
पुलिस का कहना है कि जाँच के दौरान मिले साक्ष्यों से यह संकेत मिला कि हत्या की योजना पहले ही तैयार कर ली गई थी और मेघालय की यात्रा उसी योजना का हिस्सा थी। इसके बाद सभी आरोपियों से पूछताछ की गई और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने अदालत में विस्तृत आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया।
वर्तमान में यह मामला ट्रायल के चरण में है और अदालत में अभियोजन तथा बचाव पक्ष के बीच कानूनी प्रक्रिया जारी है। इसी बीच सोनम रघुवंशी को मिली जमानत ने पूरे मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है। जहाँ बचाव पक्ष इसे आरोपी के संवैधानिक अधिकारों की जीत बता रहा है,वहीं राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला केवल तकनीकी आधार पर दिया गया है और इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई है,जहाँ मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। यदि सर्वोच्च अदालत राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करती है,तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द हो सकती है। वहीं यदि हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा जाता है,तो वह जमानत पर ही ट्रायल का सामना करती रहेंगी।
राजा रघुवंशी हत्याकांड पहले ही देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो चुका है। हत्या,कथित साजिश,प्रेम संबंधों के आरोप और अब गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर उठे कानूनी सवालों ने इस मामले को और अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आगामी फैसला न केवल इस मामले की दिशा तय करेगा,बल्कि गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया और आरोपी के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
