वॉशिंगटन,15 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए प्रतिबंध कानून को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि इस कानून का दायरा बढ़ाकर ईरान और हिज़्बुल्लाह को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और चीन जैसे देशों से जुड़े संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका की विदेश नीति में रूस,ईरान और मध्य पूर्व को लेकर लगातार सख्त रुख देखने को मिल रहा है। उनके इस संकेत ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक आर्थिक संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
व्हाइट हाउस में इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए इस प्रस्तावित कानून पर अपनी राय रखी। उनसे पूछा गया कि क्या वह रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर हस्ताक्षर करेंगे। इस पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सांसद इस कानून के दायरे को और व्यापक बनाने पर विचार कर रहे हैं। उनके अनुसार,इस विधेयक में केवल रूस ही नहीं,बल्कि ईरान और हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों को भी शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम लंबे समय से रूस के खिलाफ कठोर कार्रवाई के समर्थक रहे थे और यह मुद्दा उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल था। उन्होंने कहा कि इस कानून का विस्तार करना उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का भी एक तरीका माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पता है कि लिंडसे ग्राहम इस तरह की कठोर कार्रवाई के पक्षधर थे और अब सांसद उसी दिशा में आगे बढ़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान को इस कानून में शामिल करना एक बड़ा कदम होगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि हिज़्बुल्लाह को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार,इस संबंध में अभी बातचीत जारी है,लेकिन प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस बात की अच्छी संभावना है कि यह कानून विस्तारित स्वरूप में आगे बढ़े।
जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या इस कानून में भारत,चीन और अन्य देशों पर भी द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जाएँगे,तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि भारत,चीन या अन्य देशों पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रश्न सामने आता है तो उस पर अलग से विचार किया जाएगा। फिलहाल इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है और न ही इस दिशा में कोई अंतिम चर्चा हुई है।
ट्रंप का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रूस के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले कई देशों पर अमेरिका पहले भी द्वितीयक प्रतिबंध लगाने की संभावना जताता रहा है। ऐसे प्रतिबंधों का उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना होता है,जो प्रतिबंधित देशों के साथ व्यापारिक या आर्थिक संबंध बनाए रखते हैं। हालाँकि,भारत और चीन जैसे देशों का रूस के साथ ऊर्जा,रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग रहा है,इसलिए इस विषय पर वैश्विक स्तर पर विशेष नजर बनी हुई है।
व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्य पूर्व की स्थिति पर भी विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में ईरान का प्रभाव पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार,पिछले कुछ समय में हुई घटनाओं के कारण ईरान की सैन्य और रणनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है,जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव देखने को मिल रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि मध्य पूर्व अब पहले की तुलना में अधिक स्थिर दिशा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की नीतियों के कारण क्षेत्र में कई देशों को राहत मिली है। ट्रंप ने कहा कि ईरान लंबे समय तक मध्य पूर्व में दबाव बनाने वाला देश रहा है और उसने इराक सहित कई अन्य देशों को प्रभावित करने की कोशिश की। हालाँकि,अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं और क्षेत्र के देशों में पहले जैसा भय नहीं रह गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुँचा है। ट्रंप के अनुसार,अमेरिका की रणनीतिक कार्रवाइयों और दबाव की नीति के कारण ईरान की सैन्य शक्ति पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि अब क्षेत्र के कई देशों को ईरान से पहले जितना खतरा महसूस नहीं होता।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान के खिलाफ सख्त नीति जारी रख सकता है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रस्तावित प्रतिबंध कानून कब तक अंतिम रूप लेगा और इसमें किन-किन देशों या संगठनों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने केवल इतना कहा कि इस पर विचार-विमर्श जारी है और अमेरिकी सांसद विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध कानून में ईरान और हिज़्बुल्लाह को भी शामिल किया जाता है,तो इसका प्रभाव केवल इन देशों और संगठनों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही,जिन देशों के इन पक्षों के साथ आर्थिक या रणनीतिक संबंध हैं,उन्हें भी अपनी नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
भारत के संदर्भ में ट्रंप का यह बयान राहत देने वाला माना जा रहा है कि फिलहाल भारत पर किसी प्रकार के द्वितीयक प्रतिबंध को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। भारत रूस के साथ ऊर्जा आयात,रक्षा सहयोग और कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदारी बनाए हुए है। ऐसे में यदि भविष्य में अमेरिका इस दिशा में कोई कदम उठाता है,तो उसका प्रभाव भारत-अमेरिका और भारत-रूस संबंधों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि इस विषय पर अभी कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया गया है।
रूस,ईरान और हिज़्बुल्लाह को लेकर अमेरिका की नीति पहले से ही कठोर रही है और ट्रंप के ताजा बयान से यह स्पष्ट होता है कि उनका प्रशासन इन मुद्दों पर दबाव की रणनीति जारी रखने के पक्ष में है। आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद में प्रस्तावित प्रतिबंध कानून पर होने वाली चर्चा और उसके अंतिम स्वरूप पर दुनिया भर की निगाहें रहेंगी,क्योंकि इसका असर केवल अमेरिका की विदेश नीति तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक कूटनीतिक और आर्थिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
