श्रीनगर,15 जुलाई (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर की राजनीति से मंगलवार को एक ऐसा नाम हमेशा के लिए विदा हो गया,जिसने दशकों तक सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता,पूर्व मंत्री और पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल डॉ. मुस्तफा कमाल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से न केवल अब्दुल्ला परिवार,बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति और सामाजिक जीवन में भी शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
डॉ. मुस्तफा कमाल,वरिष्ठ नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा थे। पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी और उनका इलाज श्रीनगर के पारस अस्पताल में किया जा रहा था। बीते चार दिनों के दौरान उनकी हालत और अधिक गंभीर हो गई थी। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए,लेकिन आखिरकार उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने चाचा के निधन की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि उनके चाचा पिछले कई महीनों से बीमारी से जूझ रहे थे और पिछले चार दिनों में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई थी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बहादुरी से बीमारी का सामना किया। अस्पताल के डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों ने पूरी निष्ठा से उनका इलाज किया, लेकिन अंततः ईश्वर की इच्छा के आगे सभी प्रयास असफल रहे। उमर अब्दुल्ला ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और उन्हें सर्वोच्च स्थान मिलने की प्रार्थना भी की।
डॉ. मुस्तफा कमाल के निधन की खबर सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. मुस्तफा कमाल के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुँचा है। उन्होंने अब्दुल्ला परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी अपने वरिष्ठ नेता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। पार्टी ने कहा कि डॉ. मुस्तफा कमाल ने अपना पूरा जीवन जनता की सेवा और नेशनल कॉन्फ्रेंस की विचारधारा को मजबूत करने में समर्पित किया। उन्होंने पार्टी के सिद्धांतों,लोकतांत्रिक मूल्यों और जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों के लिए लगातार कार्य किया। उनके राजनीतिक जीवन में ईमानदारी,सादगी और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।
पार्टी ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं और हर भूमिका में जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। पार्टी ने कहा कि उनके योगदान को हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा।
डॉ. मुस्तफा कमाल का संबंध जम्मू-कश्मीर के उस राजनीतिक परिवार से था,जिसने कई दशकों तक राज्य की राजनीति को दिशा दी। वह जम्मू-कश्मीर के लोकप्रिय नेता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के पुत्र थे। ऐसे राजनीतिक परिवेश में पले-बढ़े होने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और जनसेवा को अपने राजनीतिक जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाया। उन्होंने सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान डॉ. मुस्तफा कमाल ने हमेशा संवाद,लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के हितों को प्राथमिकता दी। वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में गिने जाते थे और पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच वह अपनी सरलता,सहज व्यवहार और स्पष्ट विचारों के लिए विशेष रूप से लोकप्रिय थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. मुस्तफा कमाल ने जम्मू-कश्मीर की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों में भी संयम और संतुलन बनाए रखा। उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान पार्टी की नीतियों को मजबूती से प्रस्तुत किया और जनता के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा। उनकी राजनीतिक समझ और अनुभव का लाभ नेशनल कॉन्फ्रेंस को लंबे समय तक मिलता रहा।
उनके निधन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में गहरा शोक देखा गया। पार्टी कार्यालयों में श्रद्धांजलि अर्पित की गई और कार्यकर्ताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने संगठन को मजबूत करने और जनता की आवाज उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई नेताओं ने कहा कि उनका निधन ऐसी क्षति है,जिसकी भरपाई आसानी से संभव नहीं होगी।
राजनीतिक दलों के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया। अनेक सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में हमेशा शालीनता और मर्यादा का परिचय दिया। उनके व्यक्तित्व में राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएँ भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती थीं।
डॉ. मुस्तफा कमाल के निधन के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनसेवा,लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक प्रतिबद्धता का जो उदाहरण प्रस्तुत किया,उसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके विचार,अनुभव और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
अब्दुल्ला परिवार इस समय गहरे शोक में है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों द्वारा लगातार संवेदनाएँ व्यक्त की जा रही हैं। जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में डॉ. मुस्तफा कमाल की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाएगी। उनके निधन से जो रिक्तता पैदा हुई है,उसे भर पाना आसान नहीं होगा। उनके समर्थक,सहयोगी और प्रदेश के लोग उन्हें एक ऐसे जननेता के रूप में याद करेंगे,जिन्होंने अपने पूरे जीवन को जनता और जम्मू-कश्मीर की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
