वॉशिंगटन,24 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों को नई दिशा देने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन अपने खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान के साथ एक व्यापक शांति ढाँचे को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में हुई सकारात्मक प्रगति के बावजूद अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया जाना बाकी है और किसी अंतिम समझौते तक पहुँचने में समय लग सकता है।
संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी पहुँचने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका को इस बात की स्पष्ट जानकारी है कि ईरान ने बंद कमरे में हुई बातचीत में किन बिंदुओं पर सहमति जताई है। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब ईरानी अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से कुछ ऐसे बयान सामने आए हैं,जिनसे यह संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच उभर रहे संभावित समझौते के कुछ पहलुओं को लेकर मतभेद मौजूद हैं।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका को ईरान द्वारा किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं की पूरी जानकारी है। उनके अनुसार,भले ही सार्वजनिक मंचों पर अलग-अलग तरह के बयान दिए जा रहे हों,लेकिन बातचीत के दौरान जो समझ बनी है, वह अमेरिका के सामने स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि ईरान उन प्रतिबद्धताओं को व्यवहार में लागू करता है या नहीं। यदि ऐसा होता है,तो आगे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है,तो अमेरिकी नेतृत्व को भविष्य की रणनीति पर नए फैसले लेने पड़ सकते हैं।
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी उस समय सामने आई है,जब स्विट्जरलैंड में हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता को दोनों पक्षों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इन बैठकों के दौरान परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक सहयोग और प्रतिबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालाँकि,अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की गई है,लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
रुबियो ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षणों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाल के दिनों में ईरान की ओर से निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर कुछ अलग-अलग बयान सामने आए थे,जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान की आंतरिक राजनीति और घरेलू परिस्थितियाँ उसकी अपनी चुनौती हैं,लेकिन अमेरिका इस बात पर ध्यान दे रहा है कि बातचीत में क्या सहमति बनी है। उनके अनुसार,यदि ईरान निरीक्षण संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता है,तो यह विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु निरीक्षण का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित समझौते का सबसे संवेदनशील पहलू है। पश्चिमी देशों की लंबे समय से यह मांग रही है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी पारदर्शिता के साथ अंतर्राष्ट्रीय निगरानी में रखे। दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है।
अबू धाबी में अपने दौरे के दौरान रुबियो ने खाड़ी देशों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात अमेरिका का एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार है और पिछले एक दशक में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल अमेरिकी दृष्टिकोण साझा करना नहीं है,बल्कि क्षेत्रीय सहयोगियों की राय सुनना भी है।
रुबियो के अनुसार,अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते या शांति ढाँचे को आगे बढ़ाते समय खाड़ी देशों की चिंताओं और सुझावों को पूरी गंभीरता से ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और स्थिरता इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और अमेरिका अपने साझेदारों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या खाड़ी देशों ने ईरान के साथ उभर रहे शांति ढाँचे का समर्थन किया है,तो उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सभी साझेदार शांति और स्थिरता चाहते हैं। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार,यह एक ऐसा मुद्दा है,जो लगभग पाँच दशकों से क्षेत्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का हिस्सा रहा है,इसलिए इसे कुछ दिनों या हफ्तों में पूरी तरह हल हो जाने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
रुबियो ने कहा कि वर्तमान स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक प्रारंभिक रूपरेखा तैयार हो चुकी है,जिसके आधार पर आगे ठोस प्रगति की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले 72 घंटों में हुई कूटनीतिक गतिविधियों ने भविष्य की बातचीत के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। उनका मानना है कि यदि दोनों पक्ष सकारात्मक रुख बनाए रखते हैं तो आगे के दौर की वार्ताओं में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर भी अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग है और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत इसकी स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित रहनी चाहिए। रुबियो ने दोहराया कि किसी भी देश को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर मनमाने ढंग से शुल्क या टोल लगाने का अधिकार नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। अमेरिका लंबे समय से इस जलमार्ग की सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन के समर्थन में अपनी प्रतिबद्धता जताता रहा है।
कुल मिलाकर,मार्को रुबियो के बयान यह संकेत देते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। हालाँकि,दोनों देशों के बीच अविश्वास का लंबा इतिहास रहा है और कई जटिल मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं,लेकिन हालिया कूटनीतिक गतिविधियों ने उम्मीद की नई किरण पैदा की है। आने वाले सप्ताह और महीने यह तय करेंगे कि यह प्रक्रिया एक स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ती है या फिर पुराने मतभेद एक बार फिर बातचीत की राह में बाधा बनते हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका,ईरान और खाड़ी देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है,क्योंकि इन वार्ताओं का प्रभाव केवल मध्य पूर्व ही नहीं,बल्कि वैश्विक राजनीति,ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
