अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Arya909050)

गाजा में हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण पर सहमति का यूएई ने किया स्वागत, स्थायी शांति की दिशा में बताया अहम कदम

अबू धाबी,1 अगस्त (युआईटीवी)- गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ने को लेकर बनी सहमति का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र में स्थायी शांति,सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। यूएई का कहना है कि यदि इस समझौते को सभी पक्षों की सहमति और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लागू किया जाता है,तो इससे न केवल गाजा में हिंसा कम होगी,बल्कि आम नागरिकों की पीड़ा भी घटेगी और पुनर्निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

यह प्रतिक्रिया उस घोषणा के बाद आई है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक उच्चस्तरीय शांति बैठक के समापन पर दावा किया कि हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण और गाजा पट्टी से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। उनके अनुसार,सभी संबंधित पक्षों की औपचारिक मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर इस समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है। हालाँकि,हमास ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताने के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि समझौते का अंतिम क्रियान्वयन इजरायल द्वारा कुछ आवश्यक शर्तों को पूरा किए जाने पर निर्भर करेगा।

संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी समाचार एजेंसी द्वारा जारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह समझौता संघर्ष समाप्त करने,सुरक्षा एवं स्थिरता को मजबूत करने और स्थायी शांति की दिशा में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक परिस्थितियां तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। मंत्रालय ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से क्षेत्र में तनाव कम होगा और भविष्य में स्थायी समाधान की संभावनाएँ मजबूत होंगी।

यूएई ने अपने बयान में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि समझौते में केवल हथियार छोड़ने की प्रक्रिया ही शामिल नहीं है,बल्कि इसके साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी रखे गए हैं। इनमें हमास और अन्य सशस्त्र समूहों का चरणबद्ध निरस्त्रीकरण, समानांतर रूप से इजरायली सेना की गाजा से वापसी,एक अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती और नई फिलिस्तीनी पुलिस बल की स्थापना जैसे कदम शामिल हैं। इन सभी उपायों का उद्देश्य गाजा में कानून-व्यवस्था बहाल करना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना बताया गया है।

समझौते के अनुसार,हमास अपने सभी हथियार एक चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को सौंपेगा। बताया गया है कि इस बल में लगभग पाँच हजार सदस्य होंगे और इसकी निगरानी एक अमेरिकी जनरल के नेतृत्व में की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हथियारों का हस्तांतरण पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से हो तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के सशस्त्र संघर्ष की संभावना को कम किया जा सके।

यूएई के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि यदि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है,तो इससे गाजा के आम नागरिकों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण लाखों लोग विस्थापन,खाद्य संकट,चिकित्सा सुविधाओं की कमी और बुनियादी सेवाओं के अभाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में हिंसा में कमी आने से मानवीय सहायता पहुँचाने में आसानी होगी और लोगों के सामान्य जीवन की बहाली का रास्ता खुलेगा।

बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए सुरक्षित और स्थिर वातावरण आवश्यक है। लगातार संघर्ष और सैन्य कार्रवाई के कारण क्षेत्र की आधारभूत संरचना को भारी नुकसान पहुँचा है। सड़कें,अस्पताल,स्कूल,बिजली और जल आपूर्ति जैसी आवश्यक सुविधाएँ व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं। ऐसे में यदि संघर्ष समाप्त होता है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है,तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी पुनर्निर्माण परियोजनाओं में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते को मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार,फिलिस्तीनी क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम लंबे समय से आवश्यक था। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य भविष्य में स्थायी राजनीतिक समाधान की नींव रखना भी है। ट्रंप ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी पक्ष सहयोग की भावना से आगे बढ़ेंगे और समझौते को सफलतापूर्वक लागू करेंगे।

हमास की ओर से भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं,हालाँकि,संगठन ने स्पष्ट किया है कि अंतिम सहमति कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के पूरा होने पर निर्भर करेगी। माना जा रहा है कि इन शर्तों में इजरायली सेना की वापसी की समयसीमा,मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और फिलिस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। फिलहाल इन शर्तों के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

यह घोषणा अमेरिका की मध्यस्थता में पहले हुए संघर्ष विराम समझौते के कई महीनों बाद सामने आई है। पिछले युद्धविराम के दौरान भी हिंसा में अस्थायी कमी देखने को मिली थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका था। ऐसे में नया समझौता अधिक व्यापक माना जा रहा है क्योंकि इसमें केवल सैन्य गतिविधियों को रोकने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक ढाँचे और राजनीतिक प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सभी पक्ष अपने-अपने दायित्वों का पालन करते हैं और समझौते को पूरी तरह लागू किया जाता है,तो यह गाजा में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकता है। साथ ही इससे क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलने,नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होने और मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

हालाँकि, इस समझौते की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। अतीत में कई शांति समझौते विभिन्न कारणों से पूरी तरह लागू नहीं हो सके थे। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगरानी,सभी पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और पारस्परिक विश्वास इस पहल की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि प्रस्तावित सभी प्रावधान समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं,तो गाजा के लोगों को लंबे समय बाद स्थिरता,सुरक्षा और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर मिल सकता है।