प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@DeshGujarat)

यूरोप दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी,फ्रांस-स्लोवाकिया संबंधों को मिलेगी नई दिशा; जी-7 शिखर सम्मेलन में भी रखेंगे भारत का पक्ष

नई दिल्ली,16 जून (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से शुरू होने वाली अपनी महत्वपूर्ण यूरोप यात्रा के तहत फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। यह बहुस्तरीय यात्रा कूटनीतिक,आर्थिक,तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेने के साथ-साथ जी-7 शिखर सम्मेलन और वैश्विक नवाचार मंचों में भी हिस्सा लेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत के यूरोपीय देशों के साथ बढ़ते संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

यात्रा का पहला चरण फ्रांस में होगा,जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 और 14 जून को आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर होने वाली इस यात्रा में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग,समुद्री सुरक्षा,प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत और फ्रांस के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं,ऐसे में यह बैठक दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखती है।

14 जून को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता आयोजित होगी। इस बैठक में दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों के विभिन्न आयामों की समीक्षा करेंगे और भविष्य की साझेदारी को लेकर रोडमैप तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग इस बातचीत का प्रमुख विषय रहेगा। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों की समान चिंताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

भारत और फ्रांस के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा साझेदारी काफी मजबूत हुई है। दोनों देश सैन्य तकनीक,रक्षा उत्पादन और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में लगातार साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की वार्ता से इस सहयोग को और विस्तार मिलने की संभावना जताई जा रही है।

फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा देना है। इस कार्यक्रम में भारत,फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप्स,निवेशक तथा वेंचर कैपिटल फंड भाग लेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार,आज के दौर में नवाचार और प्रौद्योगिकी किसी भी देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार बन चुके हैं। ऐसे में ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम दोनों देशों के युवा उद्यमियों और नवाचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा। इससे नई तकनीकों,निवेश अवसरों और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

फ्रांस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है,क्योंकि 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी। इस वजह से दोनों देशों के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में भी इसे देखा जा रहा है।

स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से होगी। इन बैठकों में व्यापार,निवेश,विनिर्माण,ऑटोमोबाइल उद्योग,रेलवे उत्पादन और नई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देश आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार करेंगे।

स्लोवाकिया यूरोप के उन देशों में शामिल है,जो उन्नत विनिर्माण और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए जाने जाते हैं। वहीं भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से विकसित हो रहे बाजारों में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाएँ काफी व्यापक मानी जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इन संभावनाओं को वास्तविक साझेदारी में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार,स्लोवाकिया यात्रा भारत और स्लोवाकिया के बीच मजबूत होते संबंधों को और गति प्रदान करेगी। साथ ही यह दोनों देशों की उस साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगी,जिसके तहत वे आर्थिक विकास,निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में नई पहल करना चाहते हैं।

यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर फ्रांस लौटेंगे और 16 से 17 जून तक आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेंगे। यह सम्मेलन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक संगठनों के नेताओं को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है।

जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक चुनौतियों,आर्थिक विकास,ऊर्जा सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन,तकनीकी परिवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विभिन्न देशों के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे आमंत्रित साझेदार देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों से भी मुलाकात कर सकते हैं।

भारत भले ही जी-7 का सदस्य नहीं है,लेकिन हाल के वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका के कारण उसे लगातार इन महत्वपूर्ण बैठकों में आमंत्रित किया जाता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के साथ-साथ विकासशील देशों की चिंताओं और अपेक्षाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रखने का अवसर भी प्रदान करेगी।

18 जून को प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के अंतिम चरण में पेरिस पहुँचेंगे। यहाँ वे कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेने के साथ यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजनों में से एक विवाटेक शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे। यह सम्मेलन दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों,निवेशकों,उद्यमियों और नवाचार क्षेत्र के नेताओं को एक मंच पर लाता है।

प्रधानमंत्री मोदी का इस कार्यक्रम में शामिल होना भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप और डिजिटल इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। इसके अलावा पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना है,जहाँ वे प्रवासी भारतीयों से संवाद कर भारत की विकास यात्रा और भविष्य की योजनाओं को साझा कर सकते हैं।

विदेश मंत्रालय का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह व्यापक यूरोप यात्रा भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक,आर्थिक और तकनीकी संबंधों को नई मजबूती देगी। फ्रांस के साथ रक्षा और नवाचार सहयोग,स्लोवाकिया के साथ आर्थिक साझेदारी तथा जी-7 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक मामलों में लगातार अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार,यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है,जिसके तहत भारत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के साथ अपने संबंधों को संतुलित और मजबूत बना रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है,प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की कूटनीतिक सक्रियता और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।