राजपाल यादव (तस्वीर क्रेडिट@pari_aruu01)

राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका,चेक बाउंस के सातों मामलों में सजा बरकरार;तीन महीने की जेल और 7.35 करोड़ रुपये जुर्माना

नई दिल्ली,11 जुलाई (युआईटीवी)- हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय हास्य अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज सभी सात मामलों में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि मामले में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभिनेता को विवाद का समाधान निकालने और बकाया राशि का भुगतान करने के लिए कई अवसर दिए गए थे,लेकिन वह अपने वादों को पूरा करने में सफल नहीं रहे। अदालत ने यह भी माना कि समझौते के लिए न्यायालय की ओर से किए गए प्रयासों के बावजूद दोनों पक्ष किसी अंतिम सहमति तक नहीं पहुँच सके,जिसके बाद निचली अदालत के फैसले को कायम रखना उचित माना गया।

हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार राजपाल यादव को चेक बाउंस के सभी सात मामलों में तीन-तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। हालाँकि,अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी। इसका अर्थ यह है कि अभिनेता को अलग-अलग मामलों में कुल इक्कीस महीने नहीं,बल्कि केवल तीन महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने इसके अतिरिक्त प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस प्रकार सातों मामलों में कुल जुर्माने की राशि लगभग 7.35 करोड़ रुपये बनती है। न्यायालय के आदेश के अनुसार जुर्माने की राशि का एक बड़ा हिस्सा शिकायतकर्ता कंपनी को दिया जाएगा,जबकि शेष राशि राज्य सरकार के खाते में जमा कराई जाएगी।

यह फैसला ऐसे समय आया है,जब अदालत ने पहले दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने के लिए कई प्रयास किए थे। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह महसूस किया था कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर लें,तो लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य से अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत का अवसर भी दिया था। हालाँकि,लंबी चर्चा और कई दौर की बातचीत के बावजूद समझौते का कोई अंतिम रास्ता नहीं निकल सका। इसके बाद अदालत ने 2 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब विस्तृत आदेश जारी करते हुए सजा को बरकरार रखा है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभिनेता के रवैये पर भी असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि राजपाल यादव को कई बार यह अवसर दिया गया कि वह बकाया राशि का भुगतान कर विवाद समाप्त करें,लेकिन उनके आश्वासन और बाद में अपनाए गए रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि अभिनेता की ओर से दिए गए बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और उनके व्यवहार में निरंतरता का अभाव दिखाई देता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जब कोई व्यक्ति अदालत के समक्ष कोई आश्वासन देता है, तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह उसका पालन भी करेगा। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को समझौते के लिए प्रेरित करने की भरपूर कोशिश की थी। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद शिकायतकर्ता कंपनी भी समझौते पर विचार करने के लिए तैयार हो गई थी। जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता पक्ष लगभग छह करोड़ रुपये की राशि लेकर विवाद का अंतिम निपटारा करने के लिए सहमत था। यदि यह समझौता हो जाता तो लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो सकता था,लेकिन राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। अभिनेता की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें पहले ही इस पूरे मामले में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी कुछ संपत्तियाँ बेचने तक की नौबत आ चुकी है और वह पहले ही बड़ी राशि का भुगतान कर चुके हैं। हालाँकि,इन दलीलों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

हाई कोर्ट ने समझौते की दिशा में एक और प्रयास करते हुए चरणबद्ध भुगतान का सुझाव भी दिया था। अदालत ने प्रस्ताव रखा था कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान किस्तों में किया जा सकता है,जिससे विवाद समाप्त होने की संभावना बन सके। हालाँकि,न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह केवल एक न्यायिक सुझाव है और किसी भी पक्ष पर इसे स्वीकार करना अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद न तो शिकायतकर्ता और न ही अभिनेता के बीच ऐसी सहमति बन सकी जिससे मामला सुलझाया जा सके। अंततः अदालत ने कानूनी तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।

शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी वित्तीय जिम्मेदारी स्वीकार कर चुके हैं और अब भुगतान की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 2024 में दायर पुनरीक्षण याचिका में काफी देरी हुई थी और इस देरी को उचित ठहराने के लिए कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि केवल कारावास की सजा पूरी कर लेने से चेक बाउंस के मामलों में देनदारी समाप्त नहीं होती। कानून के अनुसार संबंधित राशि का भुगतान करना भी उतना ही आवश्यक है।

अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष की इन दलीलों पर विचार करते हुए माना कि इस प्रकार के मामलों में केवल सजा ही नहीं,बल्कि आर्थिक दायित्व का निर्वहन भी महत्वपूर्ण होता है। न्यायालय ने यह संकेत दिया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया चेक बैंक से अनादरित हो जाता है और उसके बाद भी भुगतान नहीं किया जाता,तो यह केवल आपराधिक मामला ही नहीं,बल्कि वित्तीय जिम्मेदारी का विषय भी है। ऐसे मामलों में अदालतें दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला सुनाती हैं।

पूरा विवाद उन चेकों से जुड़ा है,जिन्हें कथित रूप से एक आर्थिक लेन-देन के दौरान जारी किया गया था। जब शिकायतकर्ता कंपनी ने इन चेकों को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया तो वे बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की और मामला अदालत तक पहुँच गया। निचली अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। अभिनेता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था,लेकिन अब हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है।

इस पूरे मामले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान समझौते के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे। यदि उन अवसरों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाता,तो संभव है कि मामला अदालत के अंतिम फैसले तक नहीं पहुँचता,लेकिन जब दोनों पक्ष किसी समाधान पर नहीं पहुँचे,तब अदालत के पास कानून के अनुसार निर्णय देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।

राजपाल यादव हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय हास्य अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने अभिनय से कई फिल्मों में अलग पहचान बनाई है और लंबे समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया है। अपनी विशिष्ट संवाद शैली,हास्य अभिनय और दमदार स्क्रीन उपस्थिति के कारण उन्होंने बॉलीवुड में एक मजबूत स्थान बनाया। हालाँकि,पिछले कुछ वर्षों से यह कानूनी विवाद उनके पेशेवर जीवन के साथ-साथ निजी जीवन पर भी असर डालता रहा है।

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला अभिनेता के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक लेन-देन से जुड़े मामलों में न्यायालय द्वारा दिए गए अवसरों और आश्वासनों का सम्मान किया जाना चाहिए। यदि कोई पक्ष बार-बार दिए गए अवसरों के बावजूद अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता,तो अदालत कानून के अनुसार कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगी।

इस फैसले के साथ राजपाल यादव के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उन्हें अदालत द्वारा निर्धारित तीन महीने की सजा का सामना करना होगा,वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये की आर्थिक देनदारी भी बनी रहेगी। यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि चेक बाउंस जैसे वित्तीय मामलों में न्यायालय केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पीड़ित पक्ष के आर्थिक हितों की रक्षा को भी समान महत्व देता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभिनेता इस फैसले के बाद आगे कौन सा कानूनी रास्ता अपनाते हैं और अदालत के आदेशों का पालन किस प्रकार करते हैं।