सौरव दास और आशुतोष रांका (तस्वीर क्रेडिट@AAjju_33)

जेल में बंद साथियों को याद कर भावुक हुए सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, बोले- मुझे बस अपने भाई वापस चाहिए

नई दिल्ली,19 अक्टूबर (युआईटीवी)- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने जेल में बंद दो साथियों सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया है। अपने लंबे संदेश में उन्होंने दोनों के साथ बिताए पिछले तीन महीनों का जिक्र किया और कहा कि उन्हें अपने साथियों की बेहद याद आ रही है। दिपके ने संगठन के निर्माण और उसे आगे बढ़ाने में दोनों की भूमिका को अहम बताते हुए उनकी जल्द रिहाई की उम्मीद जताई। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपने दोनों साथियों को वापस अपने बीच देखना है।

अभिजीत दिपके का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका जेल में बंद हैं। दोनों को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रवेश करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया,जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद सीजेपी के संस्थापक ने अपने साथियों को याद करते हुए उनके प्रति भावनाएं व्यक्त की हैं।

अभिजीत दिपके ने अपने संदेश की शुरुआत दोनों साथियों को संबोधित करते हुए की। उन्होंने लिखा कि जेल में उनके छह दिन पूरे हो चुके हैं और वह बता नहीं सकते कि उन्हें दोनों की कितनी याद आ रही है। दिपके के मुताबिक,पिछले तीन महीनों में उन्हें दिन-रात किसी भी समय आने वाली सौरव और आशुतोष की कॉल तथा संदेशों की आदत हो गई थी।

उन्होंने बताया कि कई बार वह दोनों की कॉल और संदेशों को अनदेखा कर देते थे या बाद में बात करने के लिए टाल देते थे। इसकी वजह यह थी कि उन्हें भरोसा था कि उनके साथी उनके बिना भी परिस्थितियों को संभाल लेंगे। दिपके ने कहा कि दोनों ने कई बार ऐसा करके दिखाया भी था,लेकिन अब उनकी अनुपस्थिति में उन्हें उन छोटी-छोटी बातों और लगातार होने वाले संवाद की अहमियत महसूस हो रही है।

उनके संदेश से स्पष्ट होता है कि संगठन के कामकाज के दौरान दोनों साथियों के साथ उनका नियमित संपर्क रहता था। उनकी कॉल और संदेश केवल बातचीत का हिस्सा नहीं थे,बल्कि संगठन से जुड़े कामों और आपसी सहयोग की भी कड़ी थे। जेल में बंद होने के बाद अचानक यह संपर्क टूटने से दिपके को उनकी कमी महसूस हो रही है।

अपने संदेश में अभिजीत दिपके ने यह भी बताया कि पिछले कुछ महीनों में लोगों ने उन्हें सीजेपी के प्रमुख चेहरे के रूप में देखा होगा,लेकिन संगठन को चलाने और उसे मजबूत बनाने में सौरव दास तथा आशुतोष रांका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग इस बात से परिचित नहीं हैं कि दोनों ने संगठन को खड़ा करने,उसके कामकाज को आगे बढ़ाने और अलग-अलग गतिविधियों को एक साथ जोड़कर रखने में कितना योगदान दिया।

दिपके के अनुसार,सीजेपी की शुरुआत भले ही अनजाने में उनसे हुई हो,लेकिन संगठन को मौजूदा स्थिति तक पहुंचाने में उनके दोनों साथियों की समझदारी,मेहनत और हिम्मत का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने अपने संदेश में दोनों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनके बिना संगठन शायद अपनी मौजूदा उपलब्धियों का आधा भी हासिल नहीं कर पाता।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों ने आंदोलन के लिए काफी समय और ऊर्जा लगाई,कई तरह के त्याग किए और इसके बदले कभी श्रेय लेने की माँग नहीं की। दिपके के मुताबिक,संगठन के पीछे काम करने वाले लोगों के योगदान को अक्सर सार्वजनिक रूप से उतनी पहचान नहीं मिलती,जितनी मिलनी चाहिए।

उनके इस संदेश में सौरव और आशुतोष के प्रति व्यक्तिगत लगाव के साथ-साथ संगठन के प्रति उनके योगदान को स्वीकार करने की भावना भी दिखाई देती है। दिपके ने दोनों को केवल सहयोगी नहीं,बल्कि अपने भाई के समान बताया है।

अभिजीत दिपके ने अपने संदेश में सौरव दास और आशुतोष रांका के परिवारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनके साथियों और उनके परिवारों को इस परिस्थिति से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने परिवारों से माफी माँगते हुए कहा कि वह समझते हैं कि केवल माफी माँग लेने से उनकी चिंता और परेशानी दूर नहीं हो सकती।

दिपके ने लिखा कि उनकी दिली इच्छा है कि उनके साथियों और उनके परिवारों को ऐसी स्थिति का सामना ही नहीं करना पड़ता। जेल में दोनों के रहने से परिवारों के सामने पैदा हुई चिंता और अनिश्चितता का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दोनों की लगातार आने वाली कॉल और संदेश याद आ रहे हैं। पहले उन्हें लगता था कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों,उनके दोनों साथी केवल एक फोन कॉल की दूरी पर हैं। अब वह उसी परिचित एहसास को याद कर रहे हैं और चाहते हैं कि उनका फोन फिर से बजे।

अपने संदेश के अंत में दिपके ने दोनों से जल्द वापस आने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस समय उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अपने साथियों को आजाद होकर वापस आते देखना है। उन्होंने भावुक अंदाज में लिखा कि उन्हें बस अपने भाई वापस चाहिए।

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े घटनाक्रम के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों ने वहाँ कथित तौर पर प्रवेश किया और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया।

इस मामले में दोनों की हिरासत को लेकर सीजेपी के संस्थापक की ओर से साझा किया गया संदेश संगठन के भीतर उनके महत्व और आपसी संबंधों को सामने लाता है। हालाँकि, दोनों की रिहाई को लेकर आगे क्या स्थिति बनेगी,इस संबंध में संदेश में कोई निश्चित जानकारी नहीं दी गई है।

अभिजीत दिपके की पोस्ट का मुख्य केंद्र अपने साथियों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव, संगठन में उनके योगदान की सराहना और उनकी जल्द वापसी की इच्छा है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि पिछले तीन महीनों में सौरव और आशुतोष ने संगठन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनकी अनुपस्थिति में उन्हें उनकी मेहनत के साथ-साथ उनका नियमित साथ और बातचीत भी याद आ रही है।

दिपके की इस पोस्ट से यह भी पता चलता है कि किसी संगठन के सार्वजनिक चेहरे के पीछे कई ऐसे लोग होते हैं,जिनका योगदान सामने कम दिखाई देता है,लेकिन संगठन के कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल सीजेपी संस्थापक अपने दोनों साथियों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं और उन्होंने उम्मीद जताई है कि वे जल्द ही फिर से उनके बीच होंगे।