नई दिल्ली,16 जून (युआईटीवी)- यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हालिया भीषण हमलों ने न केवल युद्ध की भयावहता को बढ़ा दिया है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को भी गहरा कर दिया है। राजधानी कीव सहित कई प्रमुख शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों में कई लोगों की जान चली गई,जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इन हमलों के बाद यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ अपना रुख और कड़ा करने के संकेत दिए हैं तथा आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया है कि जी-7 देशों के नेताओं की बैठक में रूस पर अतिरिक्त दबाव बनाने और उसे बातचीत की मेज पर लाने के लिए ठोस कदमों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में जारी हिंसा को समाप्त करना और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार,हाल के हमले यह दर्शाते हैं कि रूस अभी भी सैन्य कार्रवाई के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है,जबकि दुनिया युद्ध का अंत चाहती है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि रविवार रात यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर हमले किए गए,जिनमें कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। उन्होंने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कीव स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर ‘कीव पेचेर्स्क लावरा’ को भी गंभीर नुकसान पहुँचा है। यह स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और यूक्रेन की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि जी-7 देशों के नेता फ्रांस के एवियन शहर में एकत्र हो रहे हैं,जहाँ रूस के खिलाफ अगले कदमों पर विस्तृत चर्चा होगी। उनका मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को वार्ता के लिए मजबूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप शांति चाहता है और यूक्रेन की जनता से अधिक शांति की आवश्यकता किसी को नहीं है। उनके अनुसार,युद्ध का सबसे बड़ा बोझ आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है,जिनकी जिंदगी लगातार असुरक्षा और भय के साए में गुजर रही है।
रूस के इन हमलों की ब्रिटेन ने भी कड़ी आलोचना की है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेटे कूपर ने कहा कि कीव की सबसे पवित्र और ऐतिहासिक जगहों में से एक पर हमला करना केवल सैन्य कार्रवाई नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि ‘कीव पेचेर्स्क लावरा’ पर किया गया हमला यह दर्शाता है कि रूस युद्ध के दौरान सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा जैसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों की भी अनदेखी कर रहा है।
यवेटे कूपर ने कहा कि ब्रिटेन यूनेस्को के समक्ष यूक्रेन द्वारा उठाई जाने वाली कार्रवाई का समर्थन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि रूस पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए ब्रिटेन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने हाल ही में इंग्लिश चैनल में रूसी ‘शैडो फ्लीट’ के खिलाफ की गई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
कनाडा ने भी रूस के हमलों की तीखी निंदा की है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि यूक्रेन पर किया गया हालिया हमला अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने विशेष रूप से ‘कीव पेचेर्स्क लावरा’ पर हुए हमले को चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह केवल एक इमारत नहीं,बल्कि यूक्रेन और पूर्वी ईसाई परंपरा की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।
मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है और उसकी स्वतंत्रता,लोकतंत्र तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की लड़ाई केवल उसकी अपनी लड़ाई नहीं है,बल्कि यह उन मूल्यों की रक्षा का संघर्ष है,जिन्हें दुनिया के लोकतांत्रिक देश साझा करते हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार,रूस ने बीती रात देशभर में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। हमलों में लगभग 70 मिसाइलों और 611 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इनमें से 60 से अधिक मिसाइलें केवल राजधानी कीव को निशाना बनाकर दागी गईं। यह युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है।
इन हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है,जबकि राजधानी कीव में 35 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी कई लोग घायल हुए हैं,जिससे कुल घायलों की संख्या 53 तक पहुँच गई है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं तथा मलबे में फँसे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
हमलों के कारण कई आवासीय इमारतों,सार्वजनिक सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे को भी नुकसान पहुँचा है। यूक्रेनी प्रशासन का कहना है कि रूस लगातार नागरिक क्षेत्रों को निशाना बना रहा है,जिससे आम लोगों की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ गई है। दूसरी ओर रूस की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विश्लेषकों का मानना है कि हालिया हमले ऐसे समय में हुए हैं,जब युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं। ऐसे में रूस की सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर शांति प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। जी-7 देशों की बैठक में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि पश्चिमी देशों का अगला कदम युद्ध की दिशा और भविष्य की कूटनीतिक संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल यूक्रेन में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर नागरिक लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रहा है। दुनिया की निगाहें अब जी-7 सम्मेलन पर टिकी हैं,जहाँ से यूक्रेन संकट को लेकर नए फैसले और कड़े संदेश सामने आ सकते हैं।
