भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

सेबी का बड़ा फैसला,ओपन मार्केट शेयर बायबैक की वापसी को मंजूरी,निवेशकों के लिए लागू होंगे नए नियम

मुंबई,20 जून (युआईटीवी)- भारतीय पूँजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने ओपन मार्केट के माध्यम से शेयर बायबैक को दोबारा शुरू करने की मंजूरी दे दी है। नियामक के इस फैसले को कंपनियों और निवेशकों दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। शुक्रवार को आयोजित बोर्ड बैठक में लिए गए इस निर्णय के तहत नया ढाँचा एक अगस्त से लागू होगा। इसके साथ ही सेबी ने सोने और चाँदी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के लिए भी एक नई ट्रेडिंग व्यवस्था की घोषणा की है,जो एक सितंबर से प्रभावी होगी।

सेबी का यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और कॉरपोरेट गवर्नेंस के साथ पारदर्शिता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से कंपनियों को अपने शेयरों की पुनर्खरीद के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा,जबकि निवेशकों को भी बाजार में नई गतिविधियों का लाभ मिलने की उम्मीद है।

पिछले कुछ वर्षों में ओपन मार्केट बायबैक को लेकर कई तरह की चर्चाएँ और विवाद सामने आए थे। इसी वजह से इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था। उस समय नियामक का मानना था कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है और सभी शेयरधारकों को समान अवसर नहीं मिल पाता। इसके अलावा यह चिंता भी जताई गई थी कि कुछ कंपनियाँ बाजार में अपने शेयरों की कीमतों को प्रभावित करने के लिए इस व्यवस्था का उपयोग कर सकती हैं।

ओपन मार्केट बायबैक के तहत कोई कंपनी सीधे शेयर बाजार से अपने ही शेयर खरीद सकती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर एक निश्चित अवधि के दौरान चलती है और कंपनी बाजार में उपलब्ध शेयरों को धीरे-धीरे खरीदती रहती है। इस मॉडल का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि कंपनियों को समय और मूल्य निर्धारण के मामले में अधिक लचीलापन मिलता है। वे बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए अपनी रणनीति बना सकती हैं और चरणबद्ध तरीके से शेयरों की पुनर्खरीद कर सकती हैं।

मौजूदा व्यवस्था में कंपनियों को मुख्य रूप से टेंडर ऑफर,ऑड-लॉट बायबैक और अन्य संरचित माध्यमों के जरिए शेयर बायबैक की अनुमति थी। हालाँकि,इन विकल्पों में कई बार कंपनियों को अधिक समय,अतिरिक्त प्रक्रियाओं और सीमित लचीलेपन का सामना करना पड़ता था। ऐसे में कई कंपनियाँ लंबे समय से ओपन मार्केट बायबैक की वापसी की माँग कर रही थीं।

सेबी द्वारा घोषित नए ढांचे के अनुसार ओपन मार्केट बायबैक की समय-सीमा 60 दिनों की होगी। इस अवधि के भीतर कंपनियाँ बाजार से अपने शेयर खरीद सकेंगी। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और निवेशकों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा हो। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था में निगरानी और खुलासे से जुड़े प्रावधानों को भी मजबूत किया जाएगा,ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो।

शेयर बायबैक को कंपनियाँ अक्सर अतिरिक्त नकदी को शेयरधारकों तक पहुँचाने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल करती हैं। जब कोई कंपनी अपने शेयर वापस खरीदती है तो बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है। इससे प्रति शेयर आय में सुधार हो सकता है और निवेशकों के बीच कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक संदेश जाता है। कई बार कंपनियाँ यह संकेत भी देना चाहती हैं कि उन्हें अपने कारोबार और विकास की संभावनाओं पर पूरा भरोसा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से उन कंपनियों को अधिक लाभ होगा,जो एकमुश्त टेंडर ऑफर के बजाय धीरे-धीरे शेयर खरीदने की रणनीति अपनाना चाहती हैं। इससे उन्हें बाजार की स्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने में मदद मिलेगी और पूँजी प्रबंधन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

बोर्ड बैठक में सेबी ने एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया,जो कमोडिटी आधारित निवेश उत्पादों से जुड़ा है। नियामक ने सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के लिए एक नई ट्रेडिंग प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। यह व्यवस्था एक सितंबर से प्रभावी होगी और इसका उद्देश्य मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक सटीक,पारदर्शी और निवेशक हितैषी बनाना है।

पिछले कुछ वर्षों में सोने और चांदी आधारित ईटीएफ में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। ऐसे में यह आवश्यक माना जा रहा था कि इन उत्पादों की कीमतें उन मूल परिसंपत्तियों के अधिक करीब रहें जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं। सेबी का कहना है कि नई व्यवस्था से घरेलू कमोडिटी ईटीएफ की कीमतों और वैश्विक बाजारों में चल रहे मूल्यों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित किया जा सकेगा।

नए नियमों के तहत सोने और चाँदी के ईटीएफ में प्रत्येक ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत प्री-ओपन कॉल ऑक्शन से होगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रातभर वैश्विक कमोडिटी बाजारों में जो बदलाव हुए हैं,उनका प्रभाव घरेलू बाजार में कारोबार शुरू होते ही दिखाई दे सके। इससे निवेशकों को अधिक वास्तविक और अद्यतन मूल्य संकेत मिलेंगे।

इसके अलावा इन ईटीएफ को डायनामिक प्राइस बैंड के दायरे में कारोबार करने की अनुमति दी जाएगी। यह व्यवस्था अचानक और अत्यधिक मूल्य उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद करेगी। साथ ही निवेशकों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित ट्रेडिंग वातावरण उपलब्ध कराएगी।

विश्लेषकों का मानना है कि सेबी के ये दोनों फैसले भारतीय वित्तीय बाजारों को अधिक आधुनिक,प्रतिस्पर्धी और निवेशक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। एक ओर ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से कंपनियों को पूँजी प्रबंधन के नए अवसर मिलेंगे,वहीं दूसरी ओर सोने और चाँदी के ईटीएफ के लिए नई ट्रेडिंग प्रणाली निवेशकों को बेहतर मूल्य खोज और अधिक पारदर्शिता प्रदान करेगी।

भारतीय पूँजी बाजार लगातार विकसित हो रहा है और वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को मजबूत बना रहा है। ऐसे में सेबी के ये सुधार न केवल बाजार की कार्यकुशलता बढ़ाने में सहायक होंगे,बल्कि निवेशकों के विश्वास को भी मजबूत करेंगे। आने वाले महीनों में इन नई व्यवस्थाओं के प्रभाव पर बाजार की नजर रहेगी,क्योंकि इनके जरिए कंपनियों और निवेशकों दोनों को नए अवसर मिलने की संभावना है।