डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Deva_Singhh)

ईरान पर फिर हमले के संकेत से बढ़ी चिंता,ट्रंप बोले- ‘शायद मुझे बाकी देश को भी बर्बाद करना पड़े’; युद्ध खत्म कराने की तैयारी में डेमोक्रेट्स

वाशिंगटन,6 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अगला हमला कब होगा और अमेरिकी सेना का संभावित लक्ष्य क्या हो सकता है। दूसरी ओर,अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए राजनीतिक और विधायी पहल की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को सैन्य अभियान के उद्देश्य,उस पर हो रहे खर्च और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षित वापसी की योजना के बारे में जवाब देना चाहिए।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा, “अगर संभव हो तो मैं बाकी देश को बर्बाद नहीं करना चाहूँगा,लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़े। आपको जल्द ही पता चल जाएगा।” उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई की संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है। हालाँकि,राष्ट्रपति ने किसी नए हमले का आदेश देने की घोषणा नहीं की और न ही यह बताया कि अमेरिका की अगली रणनीति क्या होगी। उन्होंने संभावित कार्रवाई के लिए कोई समय-सीमा भी तय नहीं की।

ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल ईरान के प्रति अपने सख्त रुख में बदलाव के संकेत नहीं दे रहा है। राष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए। ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रस्तावों पर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने दावा किया, “वे हमारी मंजूरी के बिना कुछ भी नहीं कर रहे हैं।” हालाँकि,उनके इस बयान से संबंधित प्रस्तावों और बातचीत की शर्तों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया।

इस बीच,अमेरिका में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति प्रशासन पर दबाव बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रतिनिधि सभा में पार्टी के वरिष्ठ नेता युद्ध के उद्देश्यों और इसे जारी रखने के लिए खर्च की जा रही रकम पर सवाल उठा रहे हैं। डेमोक्रेट्स का मानना है कि किसी भी सैन्य अभियान के लिए स्पष्ट लक्ष्य और उससे बाहर निकलने की ठोस रणनीति होनी चाहिए। वे यह भी जानना चाहते हैं कि अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रशासन के पास क्या योजना है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स ने 4 नवंबर को अपने सहयोगियों को पत्र लिखकर कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए समर्थन माँगा। इस पत्र में उन्होंने अपनी विधायी प्राथमिकताओं और निगरानी से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। मीक्स ने कहा कि कानूनी मोर्चे पर उनकी प्राथमिकता राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध को तत्काल समाप्त कराने के लिए प्रस्ताव लाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी विदेश नीति तय करने में कांग्रेस की संवैधानिक भूमिका को फिर से मजबूत करना जरूरी है।

मीक्स के अनुसार,युद्ध जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर केवल राष्ट्रपति प्रशासन का रुख पर्याप्त नहीं होना चाहिए। इसमें कांग्रेस की भूमिका भी अहम है। उन्होंने अपने पत्र में ईरान युद्ध के अलावा वेनेजुएला से जुड़े मुद्दों और सैन्य कार्रवाई तथा व्यापार के मामलों में कांग्रेस के अधिकारों पर भी चर्चा की है। उनकी योजना है कि इन विषयों पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सार्वजनिक सुनवाई के दौरान बुलाकर उनसे जवाब माँगा जाए। इसके जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि सरकार ने सैन्य कार्रवाई से जुड़े फैसले किन आधारों पर लिए और आगे की रणनीति क्या है।

हालाँकि,मीक्स के पत्र में युद्ध समाप्त करने से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। उन्होंने अभी तक ऐसा कोई नया प्रस्ताव भी पेश नहीं किया है, जिसके जरिए उनकी घोषणा को औपचारिक रूप दिया जा सके। फिलहाल यह उनके विधायी और निगरानी संबंधी एजेंडे का हिस्सा है। इसके बावजूद उनके बयान से संकेत मिलता है कि डेमोक्रेट्स आने वाले समय में ईरान युद्ध को लेकर प्रशासन से सीधे जवाब माँग सकते हैं।

डेमोक्रेटिक व्हिप कैथरीन क्लार्क ने भी इस मुद्दे पर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीएनएन से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी प्रशासन से यह जानना चाहती है कि ईरान में सैन्य अभियान के लिए लगातार धन क्यों खर्च किया जा रहा है और अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षित वापस लाने की क्या योजना है। क्लार्क ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका को ऐसे युद्ध में ले जा रहे हैं,जिसके न तो स्पष्ट उद्देश्य दिखाई दे रहे हैं और न ही इससे बाहर निकलने की कोई ठोस रणनीति सामने आई है।

क्लार्क ने यह भी कहा कि युद्ध का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक,इस संघर्ष के कारण घरेलू ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। डेमोक्रेट्स प्रशासन से यह समझना चाहते हैं कि युद्ध को किस उद्देश्य से जारी रखा जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए क्या रास्ता अपनाया जा सकता है। उनका जोर इस बात पर है कि अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संघर्ष का समाधान निकाला जाए।

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी राजनीति में बढ़ती बहस का असर देश की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप सैन्य अभियान का बचाव कर रहे हैं और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अपनी प्राथमिकता बता रहे हैं। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक नेता युद्ध के कानूनी आधार, खर्च और संभावित परिणामों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

इस संघर्ष का महत्व केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर भी असर पड़ सकता है। भारत समेत एशिया के कई बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र से होने वाली तेल आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने या सैन्य कार्रवाई तेज होने की स्थिति में तेल की कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंताएँ बढ़ सकती हैं।

इस पूरे मामले में होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल परिवहन के प्रमुख रास्तों में शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले तेल के प्रमुख गंतव्यों में भारत,चीन और जापान जैसे देश शामिल हैं। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री यातायात में बाधा ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रहना आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यदि संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है,तो इसका असर अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ आयात खर्च पर भी पड़ सकता है। हालाँकि,फिलहाल इस दिशा में किसी निश्चित प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है,लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव ने ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को जरूर बढ़ा दिया है।

कुल मिलाकर,ईरान को लेकर ट्रंप के ताजा बयान और अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की सक्रियता ने संघर्ष को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपति की ओर से आगे की सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है,जबकि विपक्ष युद्ध समाप्त करने और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की माँग कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन आगे सैन्य अभियान को किस दिशा में ले जाता है और कांग्रेस इस संघर्ष को रोकने के लिए कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाती है।