सोनम वांगचुक के अनशन का 19वां दिन (तस्वीर क्रेडिट@RajThackeray)

अनशन के 19वें दिन सोनम वांगचुक की भावुक अपील,बोले- सिर्फ मुझे नहीं,लद्दाख की आवाज को मजबूत बनाइए

नई दिल्ली,16 जुलाई (युआईटीवी)- लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा और अन्य माँगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार देर रात देशवासियों के नाम एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया। अपने स्वास्थ्य की स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए उन्होंने साफ कहा कि केवल उनके अनशन समाप्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने देश की जनता से अपील की कि वे आंदोलन को व्यक्तिगत संघर्ष के बजाय एक जनआंदोलन के रूप में देखें और 20 जुलाई को बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचकर लद्दाख के मुद्दे को मजबूती से संसद तक पहुँचाने में सहयोग करें।

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। उनका आंदोलन लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से जारी है। अनशन के 19वें दिन उन्होंने पहली बार विस्तार से अपनी स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन की दिशा को लेकर सार्वजनिक संदेश दिया।

सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले कई दिनों से उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोगों के संदेश मिल रहे हैं। इनमें आम नागरिकों के साथ-साथ कई वरिष्ठ नागरिक,सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हैं। अधिकांश लोगों ने उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। कुछ लोगों ने तो अदालत से भी यह आग्रह किया है कि सरकार हस्तक्षेप करते हुए उन्हें जबरन भोजन कराए ताकि उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर न पड़े।

इन सभी अपीलों का जवाब देते हुए सोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वह आज अपना अनशन समाप्त भी कर दें,तो इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर बिना किसी ठोस आश्वासन या कार्रवाई के वह आंदोलन खत्म कर देते हैं,तो इससे सरकार तक गलत संदेश जाएगा। उनके अनुसार इससे यह धारणा बनेगी कि जनता कुछ समय विरोध करती है और फिर स्वयं ही आंदोलन समाप्त कर देती है, जिससे जवाबदेही तय करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत विरोध दर्ज कराना नहीं,बल्कि सरकार का ध्यान लद्दाख के मुद्दों की ओर गंभीरता से आकर्षित करना है।

अपने स्वास्थ्य को लेकर फैल रही चिंताओं पर भी सोनम वांगचुक ने विस्तार से बात की। उन्होंने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि उनकी स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और चिकित्सकों की निगरानी लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि अनशन के दौरान नियमित रूप से उनके मेडिकल परीक्षण किए जा रहे हैं और अब तक की रिपोर्ट अपेक्षाकृत सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भोजन नहीं करने के कारण शरीर में कमजोरी आना स्वाभाविक है और उनकी मांसपेशियों पर भी इसका असर पड़ रहा है, लेकिन हृदय और अन्य महत्वपूर्ण अंग अभी सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि अगले दो-चार दिनों में कोई गंभीर संकट उत्पन्न हो जाए और यदि आवश्यकता पड़ी,तो वह इस अनशन को आगे भी जारी रखने की क्षमता रखते हैं।

हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति के जीवन को खतरे में डालना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जनता वास्तव में उनकी चिंता करती है,तो केवल उन्हें अनशन समाप्त करने की सलाह देने के बजाय आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं भी सक्रिय भूमिका निभाए। उनके अनुसार यही उनके संघर्ष को सार्थक बनाएगा और लद्दाख के लोगों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।

अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने विशेष रूप से 20 जुलाई का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि उस दिन बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुँचें और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन दर्ज कराएँ। उन्होंने कहा कि जब हजारों नागरिक और जनप्रतिनिधि एक साथ खड़े होकर लद्दाख के मुद्दे को संसद के सामने रखेंगे,तभी उन्हें यह भरोसा होगा कि यह लड़ाई अब केवल उनकी नहीं रही,बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है,तो उन्हें भी यह विश्वास मिलेगा कि आंदोलन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से समाधान की संभावना मजबूत होगी।

20 जुलाई का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। संसद सत्र के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की संभावना रहती है और ऐसे में आंदोलनकारी चाहते हैं कि लद्दाख से जुड़े विषय भी संसद में प्रमुखता से उठाए जाएँ। सोनम वांगचुक का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है,जहाँ जनता की आवाज प्रभावी ढंग से पहुँचाई जा सकती है।

इसी दिन जंतर-मंतर पर एक अन्य आंदोलन भी प्रस्तावित है। कॉकरोच जनता पार्टी ने परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर ‘चलो संसद’ अभियान का आह्वान किया है। पार्टी ने संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की है। यह संगठन भी पिछले कुछ समय से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहा है। ऐसे में 20 जुलाई को राजधानी में विभिन्न जनआंदोलनों के समर्थकों की बड़ी संख्या जुटने की संभावना जताई जा रही है। सोनम वांगचुक ने भी अपने संदेश में लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर अपनी बात रखने की अपील की है।

सोनम वांगचुक का यह संदेश ऐसे समय आया है,जब उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी सरकार से संवाद की प्रक्रिया शुरू करने की माँग की है,ताकि आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। दूसरी ओर,वांगचुक ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं,बल्कि लद्दाख के लोगों के अधिकारों और भविष्य को लेकर है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन और संवाद ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उनका विश्वास है कि यदि देश के नागरिक बड़ी संख्या में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएँगे,तो सरकार भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने और पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में भाग लेने की अपील की।

अब सभी की नजरें 20 जुलाई पर टिकी हैं,जब संसद का मानसून सत्र शुरू होगा और जंतर-मंतर से उठने वाली आवाज संसद तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। इस बीच सोनम वांगचुक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल अपना अनशन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन नहीं मिलता और लद्दाख के मुद्दे को लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का भरोसा नहीं बनता,तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनके इस भावुक संदेश ने एक बार फिर लद्दाख के मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है और आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा पर देशभर की निगाहें बनी रहेंगी।