टेलीग्राम (तस्वीर क्रेडिट@singhkaptan291)

टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई आज,केंद्र सरकार से जवाब तलब

नई दिल्ली,18 जून (युआईटीवी)- देश में लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। इस मामले में गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है और दावा किया है कि यह कदम न केवल जरूरत से ज्यादा कठोर है,बल्कि इससे देशभर के करोड़ों उपयोगकर्ताओं के अधिकार और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

दिल्ली हाई कोर्ट की कॉज लिस्ट के अनुसार, ‘टेलीग्राम एफजेड एलएलसी एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य’ मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई है। यह मामला पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है,क्योंकि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था।

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा था। अदालत ने संबंधित सरकारी अधिकारियों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने की अनुमति भी प्रदान की। टेलीग्राम की ओर से अदालत में तत्काल सुनवाई की माँग की गई थी। कंपनी का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर लगाया गया प्रतिबंध लाखों नहीं बल्कि करोड़ों उपयोगकर्ताओं को प्रभावित कर रहा है, जिनमें छात्र, शिक्षक, व्यवसायी, पेशेवर और विभिन्न संस्थान शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा था कि टेलीग्राम के संचालन पर 22 जून तक कुछ समय के लिए रोक लगाई जाएगी। यह अवधि नीट (यूजी) 2026 की दोबारा परीक्षा और उसके तुरंत बाद के समय को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। सरकार का तर्क है कि परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान गलत जानकारी,कथित पेपर लीक और नकल कराने वाले नेटवर्क की गतिविधियों को रोकना आवश्यक था।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार,पिछले कुछ समय से टेलीग्राम के माध्यम से ऐसे कई चैनल सक्रिय थे, जो परीक्षा से जुड़ी भ्रामक जानकारी फैलाने का काम कर रहे थे। एजेंसी का दावा है कि इन चैनलों के जरिए अभ्यर्थियों को कथित रूप से प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर धन की माँग की जा रही थी। इसके अलावा कुछ समूहों पर परीक्षा से जुड़ी अफवाहें फैलाकर छात्रों को भ्रमित करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का कहना है कि उन्होंने पहले सीमित स्तर पर कार्रवाई करने की कोशिश की थी। इसके तहत केवल संदिग्ध चैनलों और खातों को हटाने या ब्लॉक करने जैसे कदम उठाए गए थे। हालाँकि,अधिकारियों का दावा है कि समस्या का दायरा इतना बड़ा था कि केवल चैनल आधारित कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही। इसी कारण अस्थायी रूप से पूरे प्लेटफॉर्म की पहुँच सीमित करने का निर्णय लिया गया।

इस विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर से जुड़ा है। अधिकारियों ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह भारत में 30 जून तक अपने मैसेज संपादन फीचर को अस्थायी रूप से बंद रखे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का आरोप है कि इस सुविधा का दुरुपयोग करते हुए कुछ लोगों ने पुराने संदेशों को संपादित कर और उनमें नए दस्तावेज जोड़कर प्रश्न-पत्र लीक होने के कथित सबूत तैयार किए। चूँकि,संदेश का मूल समय बना रहता था, इसलिए इन सामग्रियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि प्रश्न-पत्र परीक्षा से पहले ही उपलब्ध था।

अधिकारियों के अनुसार,इस प्रकार की गतिविधियों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए और लाखों छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। सरकार का मानना है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है तथा किसी भी प्रकार की गलत सूचना को रोकना राष्ट्रीय हित में है।

दूसरी ओर टेलीग्राम ने सरकार के इन कदमों पर गंभीर आपत्ति जताई है। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अस्थायी प्रतिबंध के कारण भारत में प्लेटफॉर्म के 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि कंपनी पहले से ही ऐसे चैनलों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी जो कथित रूप से परीक्षा सामग्री साझा करने या छात्रों को ठगने में शामिल थे।

डुरोव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए अपने बयान में कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान टेलीग्राम ने सैकड़ों संदिग्ध चैनलों को हटाया है। उनके अनुसार,कंपनी भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही थी और अवैध गतिविधियों में शामिल खातों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म को प्रभावित करना उचित समाधान नहीं माना जा सकता।

यह पूरा विवाद नीट (यूजी) 2026 परीक्षा से जुड़ा हुआ है। तीन मई को आयोजित मूल परीक्षा के बाद प्रश्न-पत्र लीक होने और अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों के बाद व्यापक जाँच शुरू हुई और अंततः दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कई अतिरिक्त कदम उठाए हैं,जिनमें डिजिटल प्लेटफॉर्मों की निगरानी भी शामिल है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है,बल्कि डिजिटल अधिकारों,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और राष्ट्रीय हित के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत को यह तय करना होगा कि क्या सरकार द्वारा उठाया गया कदम परिस्थितियों के अनुरूप और आवश्यक था या फिर यह अत्यधिक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की श्रेणी में आता है।

दिल्ली हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। एक तरफ सरकार परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और निष्पक्षता का हवाला दे रही है,तो दूसरी तरफ टेलीग्राम अपने करोड़ों उपयोगकर्ताओं के हितों और डिजिटल संचार के अधिकारों की बात कर रहा है। अदालत का फैसला न केवल इस मामले की दिशा तय करेगा,बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर सरकारी हस्तक्षेप की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

फिलहाल सभी पक्षों की दलीलों के बीच यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। गुरुवार की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि टेलीग्राम पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध जारी रहेगा या फिर अदालत इसके संबंध में कोई नई राहत प्रदान करेगी।