वाशिंगटन,22 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उनका निशाना बनी हैं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी। जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप द्वारा की गई एक टिप्पणी ने न केवल अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक असहजता पैदा कर दी है,बल्कि पश्चिमी देशों के भीतर नेतृत्व और आपसी सम्मान को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप के बयान पर इटली की प्रधानमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उसे पूरी तरह काल्पनिक और अपमानजनक बताया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि हाल ही में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए “गिड़गिड़ाकर अनुरोध” किया था। ट्रंप के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। उनके इस दावे को इटली में न केवल राजनीतिक नेतृत्व,बल्कि आम जनता के एक बड़े वर्ग ने भी अपमानजनक माना।
ट्रंप की टिप्पणी के कुछ ही समय बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न तो वह और न ही इटली कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाते हैं। मेलोनी ने ट्रंप के बयान को पूरी तरह झूठा और काल्पनिक बताते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के नेताओं के प्रति इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं।
इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका और इटली लंबे समय से सहयोगी देश रहे हैं और दोनों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों तथा साझा हितों पर आधारित मजबूत संबंध हैं। ऐसे में किसी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता का सार्वजनिक मंच पर मजाक उड़ाना या उसका अपमान करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ट्रंप अपनी ऊर्जा और सख्ती पश्चिमी देशों के विरोधियों के प्रति दिखाएँ,तो यह अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता के लिए अधिक उपयोगी होगा।
मेलोनी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला और अधिक तूल पकड़ गया। कई इतालवी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी ट्रंप के बयान की आलोचना की। उनका कहना था कि इस तरह की टिप्पणियाँ न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक हैं,बल्कि मित्र देशों के बीच विश्वास और सम्मान की भावना को भी कमजोर करती हैं।
हालाँकि,विवाद यहीं नहीं रुका। मेलोनी की प्रतिक्रिया के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने इटली को एक अन्य मुद्दे पर घेरने की कोशिश की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए इटली और उसकी प्रधानमंत्री पर ईरान के मुद्दे पर पर्याप्त सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने दशकों तक नाटो के माध्यम से यूरोपीय देशों की सुरक्षा के लिए भारी आर्थिक और सैन्य संसाधन खर्च किए हैं,लेकिन जब वैश्विक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों की बात आती है,तो कुछ सहयोगी देश अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े नहीं दिखाई देते।
अपने संदेश में ट्रंप ने कहा कि नाटो पर खरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद इटली और उसकी प्रधानमंत्री ईरान तथा उससे जुड़े परमाणु खतरे के मुद्दे पर सक्रिय रूप से शामिल होने के बारे में सोचने तक को तैयार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका वर्षों से यूरोप की रक्षा करता आया है,लेकिन जब अमेरिका और पूरी दुनिया की सुरक्षा की बात आती है, तब कुछ सहयोगी देशों का रवैया निराशाजनक दिखाई देता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है। अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों से इस मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाने की अपील कर रहा है। हालाँकि,इटली समेत कई यूरोपीय देश कूटनीतिक समाधान और संवाद को प्राथमिकता देने की बात करते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की हालिया टिप्पणियां केवल व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम नहीं हैं,बल्कि वे अपने राजनीतिक संदेश को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा पर अत्यधिक खर्च करता है,जबकि बदले में उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता। यही कारण है कि वह अक्सर नाटो सदस्य देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय संकटों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की मांग करते रहे हैं।
दूसरी ओर,इटली का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के मुद्दों पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहा है। इटली के अधिकारियों का मानना है कि किसी भी अंतर्राष्ट्रीय चुनौती का समाधान सहयोग,संवाद और आपसी सम्मान के जरिए ही संभव है,न कि सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप के माध्यम से।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पश्चिमी देशों के बीच संबंधों में व्यक्तिगत नेतृत्व शैली की क्या भूमिका होती है। ट्रंप अपने बेबाक और आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं,जबकि जॉर्जिया मेलोनी स्वयं भी एक मजबूत और मुखर नेता मानी जाती हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर इसका प्रभाव अमेरिका और इटली के कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ता है। हालाँकि,दोनों देश नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और कई वैश्विक मुद्दों पर साथ काम करते हैं,लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सहयोगी देशों के बीच भी राजनीतिक मतभेद और सार्वजनिक टकराव किसी भी समय सामने आ सकते हैं।
