ब्रनो,3 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी वेलावन सेंथिलकुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चेक ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया है। उन्होंने फाइनल मुकाबले में स्कॉटलैंड के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी ग्रेग लोबन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। 35 हजार अमेरिकी डॉलर की इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट में सेंथिलकुमार ने 13-11, 11-5, 8-11, 11-7 से जीत दर्ज की। यह प्रतियोगिता प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (पीएसए) के कॉपर स्तर की थी। इस जीत के साथ भारतीय खिलाड़ी ने अपने करियर का 12वां पीएसए टूर खिताब हासिल किया,जबकि कॉपर स्तर पर यह उनका दूसरा खिताब है।
दुनिया में 42वें स्थान पर काबिज सेंथिलकुमार टूर्नामेंट में चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी के रूप में उतरे थे। फाइनल में उनके सामने विश्व रैंकिंग में 31वें स्थान पर मौजूद लोबन की चुनौती थी। रैंकिंग के लिहाज से स्कॉटिश खिलाड़ी को मुकाबले में बढ़त हासिल थी, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने कोर्ट पर अपने प्रदर्शन से इस अंतर को बेअसर कर दिया। उन्होंने शुरुआत से ही धैर्य और आक्रामकता के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखा। चार गेम तक चले मुकाबले में सेंथिलकुमार ने अहम मौकों पर बेहतर खेल दिखाया और आखिरकार ट्रॉफी जीतने में सफल रहे।
सेंथिलकुमार के लिए यह खिताब इसलिए भी खास है,क्योंकि कॉपर स्तर की प्रतियोगिताओं में यह उनकी दूसरी सफलता है। इससे पहले उन्होंने अगस्त में बुडापेस्ट ओपन का खिताब जीतकर इस श्रेणी में अपनी पहली ट्रॉफी हासिल की थी। अब चेक ओपन में जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि वह पीएसए टूर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। अलग-अलग प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ चुनौतीपूर्ण मुकाबले जीतकर फाइनल तक पहुँचना उनके खेल में आई निरंतरता को भी दर्शाता है।
चेक ओपन में सेंथिलकुमार का सफर आसान नहीं रहा। उन्हें खिताब तक पहुँचने के लिए कई मजबूत खिलाड़ियों का सामना करना पड़ा। दूसरे दौर में उनका मुकाबला ब्राजील के डिएगो गोब्बी से हुआ। इस मुकाबले में जीत दर्ज करके भारतीय खिलाड़ी ने अगले दौर में जगह बनाई। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उन्हें अर्जेंटीना के आठवीं वरीयता प्राप्त जेरेमियास अजाना की चुनौती का सामना करना पड़ा। सेंथिलकुमार ने यहाँ भी अपना दबदबा बनाए रखा और सीधे गेमों में 11-3, 11-8, 11-7 से जीत हासिल की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
अंतिम चार के मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी के सामने फ्रांस के ऑगस्टे डूसॉर्ड थे। सेंथिलकुमार ने इस मैच में भी शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने पहले गेम में 11-7 से जीत दर्ज की और दूसरे गेम में कड़ी चुनौती के बावजूद 12-10 से बाजी मारी। तीसरे गेम में उनका प्रदर्शन और प्रभावशाली रहा। उन्होंने डूसॉर्ड को 11-1 से हराकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस तरह 11-7, 12-10, 11-1 की जीत के साथ उन्होंने फाइनल का टिकट हासिल किया।
दूसरी ओर,स्कॉटलैंड के ग्रेग लोबन ने भी फाइनल तक पहुंचने के दौरान मजबूत खेल दिखाया। उन्होंने फ्रांस के तौफिक मेखाल्फी को सीधे गेमों में हराकर खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की। लोबन टूर्नामेंट के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थे,जबकि सेंथिलकुमार चौथी वरीयता के साथ खेल रहे थे। ऐसे में दोनों खिलाड़ियों के बीच फाइनल मुकाबले को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हालाँकि,निर्णायक मैच में भारतीय खिलाड़ी ने बेहतर संयम दिखाते हुए खिताब पर कब्जा जमा लिया।
फाइनल का पहला गेम सेंथिलकुमार के लिए सबसे कठिन रहा। दोनों खिलाड़ियों के बीच शुरुआत से ही कड़ी टक्कर देखने को मिली। लोबन ने भारतीय खिलाड़ी पर दबाव बनाने की कोशिश की,लेकिन सेंथिलकुमार ने अहम अंकों पर अपनी पकड़ बनाए रखी। लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने पहला गेम 13-11 से जीत लिया। शुरुआती गेम में मिली इस सफलता ने उन्हें मुकाबले में बढ़त दिलाई और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत किया।
दूसरे गेम में सेंथिलकुमार ने पहले से ज्यादा नियंत्रण के साथ खेला। उन्होंने लोबन को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और लगातार अंक जुटाते हुए 11-5 से गेम अपने नाम कर लिया। दो गेम की बढ़त मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ी खिताब से सिर्फ एक गेम दूर थे। हालाँकि,लोबन ने हार नहीं मानी और तीसरे गेम में वापसी की कोशिश की। स्कॉटिश खिलाड़ी ने अपने खेल में सुधार करते हुए 11-8 से तीसरा गेम जीत लिया। इससे मुकाबला फिर रोमांचक हो गया और सेंथिलकुमार पर दबाव बढ़ा।
चौथे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने लोबन को वापसी का अधिक मौका नहीं दिया और महत्वपूर्ण अंकों पर बेहतर खेल दिखाया। सेंथिलकुमार ने यह गेम 11-7 से जीतकर मुकाबला 3-1 से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने चेक ओपन की ट्रॉफी उठाई और अपने पीएसए टूर खिताबों की संख्या 12 तक पहुंचा दी।
चेक ओपन की इस सफलता से पहले सेंथिलकुमार ने 2026 एशियाई खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन किया था। जापान के आइची-नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने दो कांस्य पदक जीते थे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे नतीजे हासिल करना उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चेक ओपन का खिताब उनके इसी प्रदर्शन की एक और कड़ी बन गया है।
स्क्वैश के लिए आने वाले वर्ष भी भारतीय खिलाड़ी के लिहाज से अहम रहने वाले हैं। इस खेल को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में पहली बार शामिल किया जाएगा। ऐसे में सेंथिलकुमार जैसे खिलाड़ियों के पास अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग और प्रदर्शन बेहतर करने का महत्वपूर्ण अवसर है। चेक ओपन में मिली जीत से उन्हें आगे की प्रतियोगिताओं के लिए आत्मविश्वास मिलेगा। 12 पीएसए टूर खिताब और कॉपर स्तर पर दो सफलताओं के साथ सेंथिलकुमार ने भारतीय स्क्वैश में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। अब उनकी नजरें इसी लय को बरकरार रखते हुए आगामी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करने पर होंगी।
