आईसीसी ने महिला क्रिकेटर्स के लिए प्रेग्नेंसी के बाद खेल में वापसी की गाइडलाइंस जारी कीं (तस्वीर क्रेडिट@PAPA_JI_4141)

माँ बनने के बाद महिला क्रिकेटरों की वापसी होगी आसान,आईसीसी ने जारी की नई गाइडलाइंस

दुबई,23 जून (युआईटीवी)- अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने महिला क्रिकेटरों के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील कदम उठाते हुए प्रेग्नेंसी के बाद खेल में वापसी से संबंधित विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य उन महिला खिलाड़ियों को बेहतर सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करना है,जो माँ बनने के बाद फिर से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटना चाहती हैं। आईसीसी का मानना है कि मातृत्व और पेशेवर खेल करियर एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं,बल्कि उचित सहयोग और योजनाबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से दोनों जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया जा सकता है।

यह पहल आईसीसी के व्यापक ‘100 प्रतिशत क्रिकेट’ कार्यक्रम का हिस्सा है,जिसका लक्ष्य महिला क्रिकेट को अधिक समावेशी,सुरक्षित और सहयोगात्मक बनाना है। हाल के वर्षों में दुनिया भर की कई महिला क्रिकेटरों ने अपने करियर के दौरान परिवार शुरू करने का फैसला किया है और बच्चे के जन्म के बाद सफलतापूर्वक मैदान पर वापसी भी की है। ऐसे में आईसीसी ने महसूस किया कि खिलाड़ियों,क्रिकेट बोर्डों और चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए एक स्पष्ट और वैज्ञानिक ढाँचा तैयार किया जाना चाहिए,जिससे खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक भलाई सुनिश्चित की जा सके।

आईसीसी द्वारा जारी दस्तावेज में ‘6 आर’ मॉडल को अपनाया गया है,जो खिलाड़ी की वापसी की पूरी प्रक्रिया को छह चरणों में विभाजित करता है। इनमें रेडी,रिव्यू,रिस्टोर, रीकंडीशन,रिटर्न और रिफाइन शामिल हैं। इन चरणों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि खिलाड़ी धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता को पुनः प्राप्त कर सके और बिना किसी अनावश्यक दबाव के प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी कर सके।

पहला चरण ‘रेडी’ खिलाड़ी को मानसिक और शारीरिक रूप से वापसी के लिए तैयार करने पर केंद्रित है। इसके बाद ‘रिव्यू’ चरण में खिलाड़ी की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जाती है। ‘रिस्टोर’ चरण में शरीर की रिकवरी और सामान्य फिटनेस की बहाली पर काम किया जाता है। इसके बाद ‘रीकंडीशन’ के दौरान खिलाड़ी को क्रिकेट-विशिष्ट प्रशिक्षण और कंडीशनिंग से दोबारा जोड़ा जाता है। ‘रिटर्न’ चरण में वह प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी करती है,जबकि अंतिम चरण ‘रिफाइन’ उसके प्रदर्शन और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी तथा सुधार से जुड़ा होता है।

इन गाइडलाइंस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक डेडिकेटेड केस मैनेजर की नियुक्ति है। यह भूमिका आमतौर पर किसी डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट को सौंपी जाएगी। केस मैनेजर खिलाड़ी की प्रेग्नेंसी से लेकर उसके मैदान पर लौटने तक पूरे सफर में मुख्य संपर्क व्यक्ति की भूमिका निभाएगा। वह विभिन्न विशेषज्ञों और सहायता सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करेगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि खिलाड़ी और उसके बच्चे का स्वास्थ्य हर निर्णय के केंद्र में रहे।

आईसीसी ने यह भी सुझाव दिया है कि खिलाड़ी के पूरे मातृत्व और वापसी के सफर के दौरान नियमित बैठकें आयोजित की जाएँ। इन बैठकों का उद्देश्य खिलाड़ी की स्थिति की समीक्षा करना,आवश्यक बदलावों पर चर्चा करना और सभी संबंधित पक्षों को अपडेट रखना होगा। दस्तावेज के अनुसार पहली महत्वपूर्ण बैठक प्रेग्नेंसी की घोषणा के समय होनी चाहिए। इसके बाद गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जानी चाहिए। बच्चे के जन्म के छह से आठ सप्ताह बाद भी स्थिति का आकलन करने के लिए बैठक की सिफारिश की गई है। जब खिलाड़ी क्रिकेट वातावरण में दोबारा लौटना शुरू कर दे,तब हर चार सप्ताह के अंतराल पर नियमित समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जाना चाहिए।

महिला खिलाड़ियों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए आईसीसी ने मल्टी-डिसिप्लिनरी सपोर्ट टीम के गठन पर भी जोर दिया है। इस टीम में डॉक्टर,फिजियोथेरेपिस्ट,स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग विशेषज्ञ,मनोवैज्ञानिक,डाइटीशियन,कोच और परिवार के सहयोगी सदस्य शामिल हो सकते हैं। आईसीसी का मानना है कि केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं,बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी खिलाड़ी की सफल वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए सहायता प्रणाली को व्यापक और संतुलित बनाया जाना आवश्यक है।

गाइडलाइंस में खिलाड़ी की निजता और व्यक्तिगत अधिकारों को भी विशेष महत्व दिया गया है। आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि प्रेग्नेंसी की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्णय पूरी तरह खिलाड़ी का होना चाहिए। किसी भी क्रिकेट बोर्ड को खिलाड़ी पर गर्भावस्था की घोषणा के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए। इसके साथ ही सदस्य बोर्डों को अनिवार्य प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने से भी बचने की सलाह दी गई है। यह प्रावधान महिला खिलाड़ियों की गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के उद्देश्य से शामिल किया गया है।

जहाँ तक प्रशिक्षण और फिटनेस का सवाल है,आईसीसी ने गर्भावस्था के दौरान सक्रिय जीवनशैली और नियमित व्यायाम को प्रोत्साहित किया है। हालाँकि,परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर खिलाड़ी की शारीरिक स्थिति अलग होती है। इसलिए प्रशिक्षण की तीव्रता, अभ्यास कार्यक्रम और प्रतिस्पर्धी गतिविधियों में भागीदारी से जुड़े निर्णय व्यक्तिगत आधार पर लिए जाने चाहिए। इन फैसलों में खिलाड़ी,उसका इलाज कर रहे डॉक्टर और संबंधित क्रिकेट बोर्ड का चिकित्सा स्टाफ मिलकर भूमिका निभाएँगे।

दस्तावेज में यह सलाह दी गई है कि अधिकांश मामलों में खिलाड़ी पहली तिमाही के बाद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में हिस्सा लेना बंद कर दें। हालाँकि,आईसीसी ने यह भी स्वीकार किया है कि ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है,जो सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू हो सके। इसलिए किसी खिलाड़ी को कब तक खेलना चाहिए और कब प्रतियोगिता से दूरी बनानी चाहिए,इसका निर्णय उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लिया जाएगा।

महिला क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव और पेशेवर अवसरों के साथ यह मुद्दा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। अब कई खिलाड़ी अपने करियर को बीच में छोड़े बिना परिवार बढ़ाने का विकल्प चुन रही हैं। ऐसे में आईसीसी की यह नई पहल महिला खिलाड़ियों को यह भरोसा देने का प्रयास है कि मातृत्व उनके खेल जीवन में बाधा नहीं बनेगा। सही चिकित्सा सहायता,योजनाबद्ध प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के जरिए वे सुरक्षित रूप से मैदान पर लौट सकती हैं और अपने करियर को आगे बढ़ा सकती हैं।

आईसीसी की ये नई गाइडलाइंस न केवल महिला क्रिकेटरों के लिए एक मजबूत समर्थन तंत्र तैयार करती हैं,बल्कि खेल जगत में लैंगिक समानता और समावेशन को भी बढ़ावा देती हैं। यह कदम भविष्य में महिला क्रिकेट को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।