लंदन,6 जुलाई (युआईटीवी)- महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए इस खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन किया। पहले गेंदबाजों ने इंग्लैंड को चुनौतीपूर्ण लेकिन बहुत बड़ा स्कोर बनाने से रोका और इसके बाद बल्लेबाजों ने संयम,आक्रामकता और बेहतरीन साझेदारियों के दम पर लक्ष्य को 17.1 ओवर में ही हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 क्रिकेट में अपनी बादशाहत को और मजबूत कर दिया। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया 2010, 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में भी यह प्रतिष्ठित खिताब जीत चुका था,जबकि इंग्लैंड अब भी 2009 में जीते अपने एकमात्र विश्व कप खिताब के बाद दूसरी ट्रॉफी का इंतजार कर रहा है।
फाइनल मुकाबले में टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने केवल 7 रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया,जब एम जोन्स 6 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। शुरुआती झटके के बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने पारी को सँभालने की कोशिश की। उन्होंने पहले डैनी वायट-हॉज के साथ दूसरे विकेट के लिए 25 रन जोड़े,लेकिन डैनी केवल 8 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद एलिस कैप्सी ने कप्तान का साथ देते हुए तीसरे विकेट के लिए भी 25 रन की साझेदारी की,लेकिन वह भी 23 रन बनाकर लौट गईं।
लगातार अंतराल पर विकेट गिरने से इंग्लैंड की टीम दबाव में आ गई थी और 10.5 ओवर तक उसके 4 विकेट 70 रन पर गिर चुके थे। ऐसे समय में कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और फ्रेया कैंप के साथ शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दोनों बल्लेबाजों ने पाँचवें विकेट के लिए 55 गेंदों में 80 रन की नाबाद साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया। कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने धैर्य और समझदारी से खेलते हुए 53 गेंदों में 58 रन बनाए। उनकी पारी में 5 शानदार चौके शामिल रहे। दूसरी ओर फ्रेया कैंप ने तेज अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 28 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाए,जिसमें 4 चौके और 1 छक्का शामिल था। इन दोनों की साझेदारी की बदौलत इंग्लैंड निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाने में सफल रहा।
ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाजी में सभी प्रमुख गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन किया। किम गार्थ,लूसी हैमिल्टन,सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट हासिल किया। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में रन गति पर नियंत्रण बनाए रखा, जिसका असर इंग्लैंड की पारी पर साफ दिखाई दिया। हालाँकि,अंतिम ओवरों में नेट साइवर-ब्रंट और फ्रेया कैंप ने तेजी से रन बटोरे,लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने लक्ष्य को ऐसी सीमा में रखा जिसे उसकी मजबूत बल्लेबाजी आसानी से हासिल कर सकती थी।
151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी बहुत बड़ी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज जॉर्जिया वोल और बेथ मूनी पहले विकेट के लिए केवल 17 रन ही जोड़ सकीं। जॉर्जिया वोल 9 रन बनाकर आउट हो गईं,जिससे इंग्लैंड को शुरुआती सफलता जरूर मिली,लेकिन इसके बाद जो हुआ,उसने मैच का रुख पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया की ओर मोड़ दिया।
अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी ने युवा बल्लेबाज फोएबे लिचफील्ड के साथ मिलकर शानदार साझेदारी की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 67 गेंदों में 100 रन जोड़ते हुए इंग्लैंड की जीत की उम्मीदों को लगभग समाप्त कर दिया। बेथ मूनी ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए। दूसरी ओर फोएबे लिचफील्ड ने भी बेहतरीन आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करते हुए हर मौके का फायदा उठाया। दोनों बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया और लगातार रन बनाते रहे।
फोएबे लिचफील्ड अपने अर्धशतक से महज 2 रन दूर रह गईं। उन्होंने 35 गेंदों में 48 रन की शानदार पारी खेली,जिसमें 6 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उनकी इस महत्वपूर्ण पारी ने ऑस्ट्रेलिया की जीत की मजबूत नींव रखी। वहीं बेथ मूनी ने एक बार फिर बड़े मैच की खिलाड़ी होने का परिचय दिया। उन्होंने केवल 49 गेंदों में 64 रन बनाए और अपनी पारी में 10 शानदार चौके लगाए। उनकी शानदार बल्लेबाजी ने इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
लिचफील्ड के आउट होने के बाद एलिस पेरी ने बेथ मूनी का साथ निभाया। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़कर टीम को जीत के और करीब पहुँचा दिया। हालाँकि,बेथ मूनी जीत से पहले आउट हो गईं,लेकिन तब तक ऑस्ट्रेलिया जीत की दहलीज पर पहुँच चुका था। एलिस पेरी 13 रन बनाकर नाबाद रहीं और टीम ने 17.1 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल मुकाबला 7 विकेट से जीतकर एक और विश्व खिताब अपने नाम कर लिया।
इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी में शार्लेट डीन,लॉरेन बेल और सोफी एक्लेस्टोन को एक-एक विकेट मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की मजबूत बल्लेबाजी के सामने उनका प्रदर्शन टीम को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। इंग्लैंड ने शुरुआती विकेट लेकर मुकाबले में वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शतकीय साझेदारी ने उनकी सारी रणनीतियों पर पानी फेर दिया।
इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 क्रिकेट में अपने स्वर्णिम इतिहास में एक और अध्याय जोड़ दिया। सातवीं बार विश्व कप जीतकर टीम ने यह साबित कर दिया कि बड़े टूर्नामेंटों के दबाव में उसका प्रदर्शन और भी निखर जाता है। दूसरी ओर इंग्लैंड को लगातार प्रयासों के बावजूद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना पूरा करने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर मिली यह जीत लंबे समय तक महिला क्रिकेट के इतिहास में याद की जाएगी, जहाँ ऑस्ट्रेलिया ने अपने संतुलित खेल,अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन और युवा प्रतिभाओं के दम पर एक बार फिर विश्व क्रिकेट में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी।
