नई दिल्ली,6 नवंबर (युआईटीवी)- भारत की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पत्री ने यूथ ओलंपिक गेम्स में अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। हालाँकि,वह खिताबी मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं। गुरुवार को डकार में खेले गए महिला एकल फाइनल में 15 वर्षीय तन्वी को चीन की झांग यी शिन के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। तीन गेम तक चले रोमांचक मुकाबले में चीनी खिलाड़ी ने 15-21, 21-13, 26-24 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। तन्वी ने निर्णायक गेम में 10-19 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी की और विरोधी खिलाड़ी के पाँच मैच पॉइंट बचा लिए। इसके बाद उन्होंने खुद भी तीन गोल्ड मेडल पॉइंट हासिल किए,लेकिन उन्हें जीत में नहीं बदल सकीं।
इस हार के बावजूद तन्वी ने रजत पदक जीतकर भारतीय खेल जगत को बड़ी उपलब्धि दिलाई। वह यूथ ओलंपिक गेम्स के बैडमिंटन फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। ओडिशा की रहने वाली इस किशोरी ने पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का प्रदर्शन किया,उसने उनकी प्रतिभा और दबाव में मुकाबला करने की क्षमता को साबित किया। फाइनल में भी उन्होंने मौजूदा जूनियर विश्व चैंपियन झांग यी शिन को कड़ी चुनौती दी। मुकाबले का नतीजा आखिरी पलों तक तय नहीं हो पाया और दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत में चीन की झांग यी शिन ने बेहतर लय के साथ खेलना शुरू किया और शुरुआती बढ़त हासिल की। हालाँकि,तन्वी ने जल्द ही अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए वापसी की। उन्होंने शानदार रैलियों और सटीक शॉट्स के जरिए लगातार अंक जुटाए। भारतीय खिलाड़ी ने अपने मजबूत डिफेंस और आक्रामक शॉट्स के बीच अच्छा संतुलन बनाया,जिससे चीनी खिलाड़ी पर दबाव बढ़ता गया।
तन्वी ने एक समय मुकाबले में लगातार सात अंक हासिल कर स्थिति अपने पक्ष में कर ली। उन्होंने इंटरवल तक 11-5 की बढ़त बना ली थी। इसके बाद झांग ने स्कोर का अंतर कम करने की कोशिश की,लेकिन तन्वी ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी। भारतीय खिलाड़ी ने कोर्ट के अलग-अलग कोनों में शॉट लगाकर विरोधी को दौड़ने पर मजबूर किया। 18-15 के स्कोर से आगे बढ़ते हुए उन्होंने लगातार तीन अंक हासिल किए और पहला गेम 21-15 से जीत लिया। इस शुरुआत ने भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ा दीं।
पहला गेम गंवाने के बाद झांग यी शिन ने दूसरे गेम में जोरदार वापसी की कोशिश की। शुरुआत में तन्वी ने अपनी लय बरकरार रखी और 4-0 की बढ़त हासिल कर ली। ऐसा लग रहा था कि भारतीय खिलाड़ी सीधे गेम में मुकाबला जीत सकती हैं,लेकिन इसके बाद चीनी शटलर ने अपने खेल में बदलाव किया।
झांग ने कोर्ट के कोनों को निशाना बनाते हुए तन्वी को लगातार दौड़ने पर मजबूर किया। उनकी रणनीति का असर दिखाई देने लगा और उन्होंने धीरे-धीरे स्कोर का अंतर कम कर दिया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला 10-10 की बराबरी पर पहुँच गया। इंटरवल तक तन्वी को केवल 11-10 की मामूली बढ़त हासिल थी।
ब्रेक के बाद झांग ने मुकाबले पर नियंत्रण मजबूत कर लिया। उन्होंने लगातार अंक हासिल करते हुए स्कोर 17-12 तक पहुँचा दिया। तन्वी ने वापसी के लिए प्रयास किए,लेकिन चीनी खिलाड़ी ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए। आखिरकार झांग ने दूसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबले को निर्णायक तीसरे गेम तक पहुँचा दिया।
फाइनल का तीसरा गेम दोनों खिलाड़ियों के धैर्य,आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की बड़ी परीक्षा बन गया। शुरुआत से ही झांग ने आक्रामक खेल दिखाया और इंटरवल तक 11-7 की बढ़त बना ली। इसके बाद भी चीनी खिलाड़ी ने अपना दबाव बनाए रखा। उन्होंने लगातार अंक जुटाते हुए स्कोर 19-10 कर दिया। इस स्थिति में झांग खिताब से केवल दो अंक दूर थीं,जबकि तन्वी के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल नजर आ रहा था।
लेकिन 15 साल की भारतीय खिलाड़ी ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपना पूरा दम लगाते हुए एक के बाद एक अंक हासिल करने शुरू किए। तन्वी ने शानदार डिफेंस के साथ-साथ आक्रामक शॉट्स का इस्तेमाल किया और झांग को लगातार मुश्किल में डाला। देखते ही देखते स्कोर 19-15 हो गया। अब मुकाबले में रोमांच चरम पर पहुंच चुका था।
झांग ने मैच खत्म करने के लिए पाँच बार मैच पॉइंट हासिल किए, लेकिन तन्वी ने हर बार शानदार खेल दिखाते हुए इन सभी मौकों को बचा लिया। भारतीय खिलाड़ी की इस वापसी ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया। ऐसा लगने लगा कि तन्वी एक असंभव स्थिति से मैच अपने नाम कर सकती हैं। उन्होंने न केवल स्कोर बराबरी के करीब पहुँचाया,बल्कि इसके बाद अपने लिए तीन गोल्ड मेडल पॉइंट भी बनाए।
हालाँकि,निर्णायक क्षणों में वह इन तीनों मौकों को भुनाने में सफल नहीं हो सकीं। झांग ने दबाव के बावजूद धैर्य बनाए रखा और महत्वपूर्ण अंकों पर बेहतर खेल दिखाया। आखिरकार चीनी खिलाड़ी ने तीसरा गेम 26-24 से जीत लिया। इस तरह लगभग हाथ से निकल चुके मुकाबले में उन्होंने वापसी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। दूसरी ओर,तन्वी को करीबी अंतर से हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
तन्वी पत्री का डकार में सफर फाइनल की हार के बावजूद बेहद शानदार रहा। उन्होंने ग्रुप चरण से ही अपने प्रदर्शन से विरोधियों को चुनौती दी थी। भारतीय खिलाड़ी ने अपने अभियान की शुरुआत मेक्सिको की सारा गोंजालेज के खिलाफ की। इस मुकाबले में तन्वी ने एकतरफा अंदाज में 21-8, 21-12 से जीत दर्ज की और अपने इरादे जाहिर कर दिए।
इसके बाद उनका सामना ऑस्ट्रेलिया की स्मृति अडेपु से हुआ। इस मैच में भी तन्वी ने शानदार खेल दिखाया और 21-4, 21-12 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। उन्होंने शुरुआत से ही मैच पर पकड़ बनाए रखी और विरोधी खिलाड़ी को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया। ग्रुप चरण के अगले मुकाबले में उन्होंने दक्षिण कोरिया की जियोंग यू जांग को हराकर नॉकआउट दौर में अपनी जगह पक्की कर ली।
नॉकआउट मुकाबलों में भी तन्वी ने अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखा। उन्होंने अलग-अलग खिलाड़ियों और खेल की परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव किया। फाइनल तक पहुँचने का उनका सफर इस बात का प्रमाण रहा कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव में खेलने की क्षमता रखती हैं।
तन्वी पत्री का रजत पदक भारतीय बैडमिंटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यूथ ओलंपिक गेम्स के महिला बैडमिंटन फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनकर उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। महज 15 साल की उम्र में इतने बड़े मंच पर उनका प्रदर्शन भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है।
फाइनल में पाँच मैच पॉइंट बचाना और फिर खुद तीन गोल्ड मेडल पॉइंट तक पहुँचना उनकी मानसिक मजबूती और जुझारूपन को दिखाता है। भले ही वह आखिरी अंक हासिल नहीं कर सकीं,लेकिन जिस तरह उन्होंने 10-19 से पिछड़ने के बाद मुकाबले को 24-26 तक पहुँचना,वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
तन्वी के लिए यह रजत पदक निराशा के साथ-साथ एक बड़ी सीख भी है। इस मुकाबले ने उन्हें बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दबाव से निपटने और निर्णायक क्षणों में बेहतर प्रदर्शन करने का अनुभव दिया है। वहीं,भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए उनकी उपलब्धि गर्व का विषय है। स्वर्ण पदक भले ही चीन की झांग यी शिन के नाम रहा,लेकिन तन्वी पत्री ने अपने संघर्ष और शानदार खेल से सभी का दिल जीत लिया।
