अदाणी पावर को महाराष्ट्र में 1600 मेगावाट बिजली आपूर्ति का ठेका (तस्वीर क्रेडिट@BiharInfraTales)

महाराष्ट्र में 1600 मेगावाट बिजली आपूर्ति का ठेका अदाणी पावर को,25 साल के समझौते से ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा विस्तार

अहमदाबाद,16 मार्च (युआईटीवी)- देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की बिजली उत्पादक कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने महाराष्ट्र के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने रविवार को जानकारी दी कि उसे महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) से 1,600 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्राप्त हुआ है। इस महत्वपूर्ण अनुबंध के तहत अदाणी पावर अपने आगामी अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट से महाराष्ट्र को बिजली की आपूर्ति करेगी।

कंपनी के अनुसार यह ठेका प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से मिला है,जिसमें अदाणी पावर सबसे कम टैरिफ वाली बोलीदाता के रूप में उभरी। कंपनी ने 5.30 रुपये प्रति किलोवाट घंटा के संयुक्त टैरिफ पर बिजली की पेशकश की थी,जो अन्य बोलीदाताओं की तुलना में सबसे कम था। यही कारण रहा कि एमएसईडीसीएल ने बिजली आपूर्ति के लिए अदाणी पावर को चुना।

इस समझौते के तहत प्रस्तावित 25 वर्षीय बिजली आपूर्ति समझौता यानी पावर सप्लाई एग्रीमेंट (पीएसए) किया जाएगा। इस समझौते के अनुसार बिजली की आपूर्ति वित्तीय वर्ष 2030-31 से शुरू होगी। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह दीर्घकालिक अनुबंध महाराष्ट्र की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह उपलब्धि उस समय मिली है,जब भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की गति तेज हो रही है। इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं की शुरुआत और क्षमता विस्तार को लेकर निजी कंपनियाँ सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। अदाणी पावर ने पिछले कुछ वर्षों में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति समझौते हासिल करने के मामले में मजबूत स्थिति बनाई है।

अदाणी पावर ने यह भी बताया कि वह नई उत्पादन क्षमता के अग्रणी प्रदाताओं में शामिल हो चुकी है। कंपनी की परियोजनाएँ भारत सरकार के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी समर्थन देती हैं,जिसके तहत वर्ष 2032 तक देश में 100 गीगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अदाणी पावर ने कुल 10,400 मेगावाट क्षमता वाली पाँच दीर्घकालिक पीएसए बोलियाँ जीती हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी बिजली उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। ऊर्जा बाजार में प्रतिस्पर्धा के बावजूद अदाणी पावर लगातार नए अनुबंध हासिल करने में सफल रही है।

इस नए अनुबंध के साथ कंपनी की निर्माणाधीन परियोजनाओं में भी बड़ी प्रगति हुई है। अदाणी पावर की कुल 23.8 गीगावाट क्षमता वाली कई परियोजनाएँ अभी निर्माणाधीन हैं। इनमें से लगभग 13.3 गीगावाट क्षमता के लिए दीर्घकालिक पीएसए पूरे किए जा चुके हैं। यह कंपनी के उस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,जिसके तहत वह अपनी लगभग पूरी आगामी उत्पादन क्षमता को दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत सुरक्षित करना चाहती है।

कंपनी के अनुसार उसकी वर्तमान परिचालन क्षमता 18.15 गीगावाट है। इसमें से 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पहले ही मध्यम से दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति समझौतों के तहत सुरक्षित किया जा चुका है। इसका मतलब है कि कंपनी के अधिकांश बिजली उत्पादन के लिए पहले से ही स्थायी खरीदार मौजूद हैं,जिससे उत्पादन और राजस्व में स्थिरता बनी रहती है।

इसके अलावा कंपनी की आगामी 23.8 गीगावाट क्षमता में से भी 55 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए 25 वर्षीय पीएसए सुनिश्चित हो चुके हैं। इस प्रकार कंपनी भविष्य की बिजली उत्पादन क्षमता के लिए भी मजबूत अनुबंध सुनिश्चित करने में सफल रही है। ऊर्जा बाजार में दीर्घकालिक अनुबंधों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे कंपनियों को निवेश और उत्पादन योजना बनाने में स्थिरता मिलती है।

एमएसईडीसीएल द्वारा जारी बोली प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि इसमें पूर्व-निर्धारित कोयला लिंकेज शामिल किया गया था। इसका मतलब है कि बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक ईंधन की दीर्घकालिक उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की गई है। इससे बिजली उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने और आपूर्ति को विश्वसनीय बनाने में मदद मिलती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अनुबंध राज्य की बिजली वितरण कंपनियों के लिए भी लाभदायक होते हैं क्योंकि इससे उन्हें लंबे समय तक स्थिर दरों पर बिजली उपलब्ध हो सकती है। इससे उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमतों को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिलती है।

अदाणी पावर वर्तमान में भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के थर्मल पावर पूँजीगत व्यय कार्यक्रमों में से एक को संचालित कर रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2031-32 तक अपनी कुल उत्पादन क्षमता को वर्तमान 18.15 गीगावाट से बढ़ाकर 41.87 गीगावाट तक पहुँचाने की योजना बनाई है। इस विस्तार योजना के लिए लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है,जो भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है।

कंपनी का कहना है कि ये परियोजनाएँ भारत की तेजी से बढ़ती बिजली माँग को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी हैं। देश में आर्थिक विकास,तेजी से हो रहा शहरीकरण,औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार और ग्रामीण तथा शहरी घरों में बिजली की बढ़ती पहुँच के कारण बिजली की माँग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई उत्पादन क्षमता का निर्माण ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

अदाणी पावर ने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण चरण के दौरान हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा परियोजनाओं से जुड़े निर्माण,इंजीनियरिंग,परिवहन और अन्य क्षेत्रों में भी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में बिजली की माँग और अधिक तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर क्षमता विस्तार और दीर्घकालिक अनुबंधों की दिशा में उठाए जा रहे कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। अदाणी पावर द्वारा महाराष्ट्र के लिए 1600 मेगावाट बिजली आपूर्ति का यह नया अनुबंध इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।