चेन्नई,16 मार्च (युआईटीवी)- तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनावी तैयारियों को गति देते हुए अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ सीट बँटवारे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है,जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ बातचीत कर विधानसभा सीटों के बँटवारे का फार्मूला तय करेगी।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष के प्रमुख नेता एडप्पडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में गठित यह समिति आगामी चुनावों में गठबंधन की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। राजनीतिक हलकों में इसे एआईएडीएमके की चुनावी तैयारियों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दरअसल,भारत निर्वाचन आयोग ने हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित करते हुए मतदान 23 अप्रैल को कराने की घोषणा की है। चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में एआईएडीएमके ने भी अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करने और सीट बँटवारे को तय करने के लिए विशेष समिति का गठन किया है।
पार्टी द्वारा गठित इस चार सदस्यीय समिति में वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें केपी मुनुसामी,नथम आर. विश्वनाथन,एस.पी. वेलुमणि और बी. वलारमथी शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व ने इन नेताओं को गठबंधन वार्ता में एआईएडीएमके का प्रतिनिधित्व करने और विभिन्न सहयोगी दलों के साथ सीटों के वितरण पर चर्चा करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार यह समिति जल्द ही एनडीए के प्रमुख सहयोगियों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करेगी। इन सहयोगियों में भारतीय जनता पार्टी,तमिल मनीला कांग्रेस,पट्टाली मक्कल काची और पुराची भारतम जैसे दल शामिल हैं। वार्ता के दौरान प्रत्येक पार्टी को मिलने वाली सीटों की संख्या और उन्हें आवंटित किए जाने वाले विधानसभा क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
एआईएडीएमके नेतृत्व का मानना है कि गठबंधन सहयोगियों के साथ सामंजस्य बनाकर चुनाव लड़ना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से लाभदायक साबित हो सकता है। इसी कारण सीट बँटवारे की प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिया है कि अंतिम सीट बँटवारे के फार्मूले की घोषणा से पहले कई दौर की बातचीत हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीट बँटवारे को लेकर बातचीत आसान नहीं होगी,क्योंकि गठबंधन में शामिल सभी दल अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में ज्यादा सीटों की माँग कर सकते हैं। ऐसे में समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी सहयोगियों के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा फार्मूला तैयार करना होगा,जिससे गठबंधन मजबूत बना रहे और चुनावी मुकाबले में उसे फायदा मिल सके।
इस बीच एक अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल यह भी बना हुआ है कि अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कझगम की सीट बँटवारे की वार्ता में क्या भूमिका होगी। यह पार्टी टीटीवी दिनाकरन के नेतृत्व में काम कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एएमएमके को एनडीए के साथ सीट बँटवारे की बातचीत में शामिल किया जाएगा या नहीं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके और उसके सहयोगियों के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सीट बँटवारे का मुद्दा जल्द से जल्द सुलझा लिया जाए,ताकि उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रचार पर पूरा ध्यान दिया जा सके।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया इस महीने के अंत में शुरू होने वाली है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में भी तेजी ला रहे हैं। एआईएडीएमके के भीतर भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है और कई नेताओं ने टिकट के लिए दावा पेश करना शुरू कर दिया है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि सीट बँटवारे का फार्मूला समय रहते तय हो जाता है,तो गठबंधन दलों को संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार शुरू करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। इससे मतदाताओं के बीच गठबंधन की एकजुटता का संदेश भी जाएगा और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में आसानी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाले हैं। राज्य में विभिन्न दलों के बीच गठबंधन समीकरण और सीट बँटवारे की रणनीति चुनावी नतीजों को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। ऐसे में एआईएडीएमके द्वारा गठित यह समिति आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों का अंतिम फार्मूला क्या होगा और किन दलों को कितनी सीटें मिलेंगी। जैसे ही इस पर सहमति बनती है,राजनीतिक दलों की अगली प्राथमिकता उम्मीदवारों की घोषणा और व्यापक चुनाव प्रचार अभियान शुरू करना होगा। इससे तमिलनाडु की चुनावी राजनीति आने वाले दिनों में और भी तेज होती दिखाई देगी।
