कटक (ओडिशा),16 मार्च (युआईटीवी)- ओडिशा के कटक शहर में स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में सोमवार तड़के भीषण आग लगने की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के ट्रॉमा केयर आईसीयू में लगी इस आग में कम-से-कम 10 मरीजों की मौत हो गई,जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। यह हादसा सोमवार सुबह लगभग 2:30 बजे हुआ,जब अस्पताल की पहली मंजिल पर अचानक आग की लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। देर रात हुई इस घटना ने अस्पताल में भर्ती मरीजों,उनके परिजनों और चिकित्सा कर्मचारियों को दहशत में डाल दिया।
मिली जानकारी के अनुसार आग सबसे पहले ट्रॉमा केयर आईसीयू में देखी गई,जहाँ गंभीर रूप से घायल और बीमार मरीजों का इलाज चल रहा था। अचानक उठी आग की लपटों और धुएँ के कारण वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल के स्टाफ ने तुरंत आपातकालीन अलार्म बजाया और मरीजों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश शुरू कर दी। आग की सूचना मिलते ही अस्पताल की फायर यूनिट मौके पर पहुँची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहर की फायर ब्रिगेड को भी तुरंत बुलाया गया। आग बुझाने के लिए तीन फायर टेंडर लगाए गए और कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई थी और एहतियात के तौर पर अस्पताल के पास की मुख्य सड़क को बंद कर दिया गया,ताकि बचाव कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए।
अस्पताल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आईसीयू में भर्ती मरीजों को बाहर निकालने का प्रयास किया। कई मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की मदद से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। गंभीर रूप से बीमार 10 से अधिक मरीजों को सुरक्षा और लगातार इलाज सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल के न्यू मेडिसिन आईसीयू में स्थानांतरित किया गया। इस पूरे बचाव अभियान के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों,नर्सों और सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को बचाने का प्रयास किया।
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुँच गए। स्वास्थ्य सचिव,कटक के जिला कलेक्टर और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हालात का जायजा लेने और राहत व बचाव कार्यों की निगरानी करने के लिए अस्पताल पहुँचे। अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन से पूरी घटना की जानकारी ली और आग लगने के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए।
इस हादसे के बाद राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी अस्पताल पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज की व्यवस्था की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने इस घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया और मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रारंभिक जाँच के अनुसार आग लगने की वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है और राज्य सरकार इस घटना की उच्च स्तरीय जाँच कराएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जाँच के नतीजों के आधार पर जो भी व्यक्ति या संस्था जिम्मेदार पाई जाएगी,उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मरीजों को सुरक्षित निकालने के दौरान अस्पताल के 11 स्टाफ सदस्य भी जलने से घायल हो गए हैं और उनका इलाज चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रॉमा आईसीयू,उसके पास के आईसीयू और पहली मंजिल के वार्ड में कुल 23 मरीजों का इलाज चल रहा था। आग लगने के बाद उनमें से सात मरीजों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सभी मरीजों को दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया गया,लेकिन इलाज के दौरान तीन और मरीजों ने दम तोड़ दिया। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों,नर्सों और सुरक्षा कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मरीजों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी,तब ही स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए 420 करोड़ रुपये का बजट रखा है और इस दिशा में काम भी जारी है। इसके अलावा अगले वित्तीय वर्ष के लिए भी लगभग 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने इस घटना की न्यायिक जाँच के आदेश देते हुए कहा कि इस हादसे के पीछे जो भी लापरवाही सामने आएगी,उसके लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।
इस दर्दनाक घटना पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि कटक के अस्पताल में आग लगने की घटना बेहद दुखद है और इसमें लोगों की मौत की खबर सुनकर उन्हें गहरा दुख हुआ है। राष्ट्रपति ने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कटक के एससीबी मेडिकल में आग लगने की घटना बेहद दिल दहला देने वाली है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
घटना के बाद राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों का अस्पताल पहुँचना भी जारी रहा। बारामती-कटक से कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस भी मौके पर पहुँचीं और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि इस हादसे के पीछे जो भी कमियाँ या लापरवाही रही है,उसे समयसीमा के भीतर सामने लाया जाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
सोफिया फिरदौस ने यह भी कहा कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है,ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
घटना के बाद अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। मरीजों के परिजन और स्थानीय लोग अपने प्रियजनों की जानकारी पाने के लिए अस्पताल परिसर में मौजूद रहे। कई लोग बेहद चिंतित और भावुक दिखाई दिए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने स्थिति को सँभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।
इस हादसे ने एक बार फिर देश के अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई अस्पतालों में आग लगने की घटनाएँ सामने आई हैं,जिनमें कई मरीजों की जान गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में अत्याधुनिक उपकरणों और बिजली के भारी उपयोग के कारण अग्नि सुरक्षा के मजबूत इंतजाम बेहद जरूरी हो जाते हैं।
फिलहाल कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग लगने की इस घटना ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ घटना की जाँच में जुटा हुआ है। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
