भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और स्पेनिश अभिनेता जेवियर बार्डेम (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

ऑस्कर 2026 में छाईं प्रियंका चोपड़ा,जेवियर बार्डेम संग इंटरनेशनल फीचर फिल्म का अवॉर्ड किया प्रेजेंट,रेड कार्पेट पर भी बिखेरा जलवा

मुंबई,16 मार्च (युआईटीवी)- दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार समारोहों में से एक अकादमी पुरस्कार के 98वें संस्करण में भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने अपनी खास मौजूदगी से सबका ध्यान खींचा। भले ही इस साल उनकी किसी फिल्म ने अवॉर्ड नहीं जीता,लेकिन प्रियंका ने एक नया इतिहास रचते हुए ऑस्कर जैसे वैश्विक मंच पर अवॉर्ड प्रस्तुत करने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनने का गौरव हासिल किया। उनकी मौजूदगी ने न सिर्फ भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों को गर्व का एहसास कराया,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की सांस्कृतिक उपस्थिति को भी मजबूती से दर्शाया।

यह प्रतिष्ठित समारोह अमेरिका के लॉस एंजिल्स स्थित डॉल्बी थिएटर में आयोजित किया गया,जहाँ दुनिया भर के फिल्म सितारों,निर्देशकों और कलाकारों ने शिरकत की। इस बार समारोह की मेजबानी मशहूर अमेरिकी कॉमेडियन और लेट-नाइट होस्ट कॉनन ओ’ब्रायन ने की। इससे पहले भी वे 2025 के ऑस्कर समारोह की मेजबानी कर चुके हैं और इस बार भी उनके अंदाज ने कार्यक्रम को मनोरंजक बना दिया।

समारोह के दौरान प्रियंका चोपड़ा ने स्पेनिश अभिनेता जेवियर बार्डेम के साथ मिलकर बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म का पुरस्कार प्रस्तुत किया। यह सम्मान फिल्म सेंटिमेंटल वैल्यू को दिया गया। यह फिल्म नॉर्वे की पृष्ठभूमि पर आधारित एक भावनात्मक और जटिल पारिवारिक कहानी को दर्शाती है। फिल्म का निर्देशन नॉर्वेजियन फिल्मकार जोआकिम ट्रायर ने किया है,जो अपनी संवेदनशील और गहराई से भरी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।

‘सेंटिमेंटल वैल्यू’ की कहानी एक पिता और उसकी दो बेटियों के बीच के जटिल रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक प्रतिष्ठित फिल्मकार अपने नए फिल्म प्रोजेक्ट पर काम करते हुए अपने परिवार के साथ बिगड़ चुके संबंधों को सुधारने की कोशिश करता है। पारिवारिक विवाद,भावनात्मक दूरी और कलात्मक विरासत जैसे विषयों को बेहद संवेदनशील तरीके से फिल्म में पेश किया गया है। यही वजह रही कि इस फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ माना गया।

अवॉर्ड प्रेजेंट करते समय मंच पर एक और पल चर्चा का विषय बन गया। जैसे ही प्रियंका चोपड़ा मंच पर पहुँचीं,उनके साथ खड़े जेवियर बार्डेम ने माइक पर जोरदार आवाज में “फिलिस्तीन को आज़ाद करो” का नारा लगाया। उनके इस बयान ने समारोह में मौजूद लोगों और सोशल मीडिया पर काफी हलचल पैदा कर दी। हालाँकि,प्रियंका ने अपने पेशेवर अंदाज को बरकरार रखते हुए अवॉर्ड की घोषणा की और कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

ऑस्कर समारोह में प्रियंका चोपड़ा का रेड कार्पेट लुक भी खास आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने इस अवसर के लिए सफेद रंग का बेहद खूबसूरत ऑफ-शोल्डर गाउन पहना था,जिसे मशहूर फैशन हाउस डायोर ने डिजाइन किया था। इस गाउन को क्लासिक हॉलीवुड स्टाइल और आधुनिक फैशन के मिश्रण के साथ तैयार किया गया था,जो प्रियंका की खूबसूरती को और निखार रहा था।

गाउन का स्लिट डिजाइन और लंबा घेरा उनके लुक को शाही अंदाज दे रहा था। गाउन के निचले हिस्से में काले और सफेद ट्यूल की खास डिटेलिंग की गई थी,जो किसी ब्राइडल गाउन की तरह आकर्षक लग रही थी। इसके साथ प्रियंका ने हल्का लेकिन बेहद खूबसूरत डायमंड नेकलेस पहना,जिसने उनके पूरे लुक को और भी एलिगेंट बना दिया।

इस खास मौके पर प्रियंका के साथ उनके पति और अमेरिकी सिंगर निक जोनस भी मौजूद थे। निक जोनस ने ब्लैक एंड व्हाइट थ्री-पीस सूट पहना था,जो प्रियंका के गाउन के साथ शानदार तरीके से मेल खा रहा था। दोनों ने रेड कार्पेट पर साथ में एंट्री की और अपनी ट्विनिंग स्टाइल से मीडिया और प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। कपल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं और फैशन एक्सपर्ट्स ने भी उनके लुक की काफी सराहना की।

इस साल ऑस्कर की दौड़ में कई बड़ी फिल्में शामिल थीं। खास तौर पर निर्देशक रयान कूगलर की फिल्म सिनर्स सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यह फिल्म बेस्ट फिल्म,बेस्ट निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता समेत कुल 16 श्रेणियों में नामांकन के साथ अवॉर्ड की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही है। इससे पहले भी रयान कूगलर अपनी फिल्मों के जरिए अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में खास पहचान बना चुके हैं।

कुल मिलाकर 98वें ऑस्कर समारोह में प्रियंका चोपड़ा की मौजूदगी भारतीय दर्शकों के लिए गर्व का क्षण साबित हुई। उन्होंने जिस आत्मविश्वास और गरिमा के साथ इस वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया,उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय कलाकार अब अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। प्रियंका का यह पल न सिर्फ उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण रहा,बल्कि भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान को भी नई ऊँचाई देने वाला साबित हुआ।