चीन के टेंपल ऑफ हेवन पहुँचे डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@VoiceofPD)

चीन के टेंपल ऑफ हेवन पहुँचे डोनाल्ड ट्रंप,ऐतिहासिक धरोहर देखकर बोले- “चीन बेहद खूबसूरत”

बीजिंग,14 मई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा के दूसरे दिन गुरुवार को बीजिंग स्थित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर टेंपल ऑफ हेवन पहुँचे। इस दौरान उनके साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद रहे। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल इस ऐतिहासिक स्थल की भव्यता और अद्भुत वास्तुकला को देखकर ट्रंप काफी प्रभावित नजर आए। मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उन्होंने चीन और इस ऐतिहासिक धरोहर की जमकर तारीफ की।

बीजिंग के इस ऐतिहासिक परिसर में दोनों नेता साथ-साथ चलते दिखाई दिए। यात्रा के दौरान शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति को इस स्थल के इतिहास,वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी देते रहे। आमतौर पर मीडिया के सामने खुलकर बयान देने वाले डोनाल्ड ट्रंप इस बार अपेक्षाकृत शांत और संयमित दिखाई दिए। हालाँकि,जब पत्रकारों ने उनसे इस ऐतिहासिक स्थल के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “बहुत शानदार,शानदार जगह,अविश्वसनीय। चीन बहुत खूबसूरत है।”

मंदिर परिसर में दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने तस्वीरें भी खिंचवाईं। इस दौरान माहौल काफी औपचारिक लेकिन सौहार्दपूर्ण दिखाई दिया। ट्रंप लगातार चीन की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर की सराहना करते रहे। हालाँकि,जब पत्रकारों ने ताइवान और द्विपक्षीय तनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल पूछे,तो दोनों नेताओं ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।

ताइवान को लेकर पूछे गए सवालों पर डोनाल्ड ट्रंप ने चुप्पी साधे रखी। वहीं,द्विपक्षीय बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई,इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने केवल इतना कहा कि “इंतजार कीजिए।” इससे साफ संकेत मिला कि अमेरिका और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है,लेकिन दोनों पक्ष फिलहाल सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा करने से बच रहे हैं।

ताइवान लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव का बड़ा कारण रहा है। अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराता है,जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। इसके बावजूद अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध बेहद महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के रिश्ते सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते दिखाई देते हैं।

इस यात्रा के दौरान वियतनाम का मुद्दा भी चर्चा में रहा। पत्रकारों ने ट्रंप से वियतनाम और एशिया की रणनीतिक स्थिति को लेकर सवाल किए, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। गौरतलब है कि वियतनाम ने अमेरिका और चीन दोनों को “व्यापक रणनीतिक साझेदार” का दर्जा दिया हुआ है। वियतनाम की विदेश नीति को “बैंबू डिप्लोमेसी” कहा जाता है,जिसका मतलब है कि देश परिस्थितियों के अनुसार लचीला रुख अपनाता है,लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों पर मजबूती से कायम रहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा विदेशी नेताओं को ऐतिहासिक स्थलों पर ले जाना केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं होता,बल्कि इसके पीछे कूटनीतिक संदेश भी छिपा होता है। चीनी नेतृत्व अक्सर ऐसे स्थलों के जरिए अपनी सभ्यता,परंपरा और वैश्विक महत्व को दर्शाने की कोशिश करता है। माना जा रहा है कि ट्रंप को टेंपल ऑफ हेवन ले जाकर चीन ने अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रभाव को प्रदर्शित करने का प्रयास किया है।

टेंपल ऑफ हेवन चीन के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। यह परिसर मिंग और किंग राजवंशों के दौर में सम्राटों द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों और अच्छी फसल की प्रार्थना के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह लगभग 600 साल पुराना परिसर है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसकी वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण यह दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

यूनेस्को के अनुसार इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1420 में मिंग राजवंश के दौरान कराया गया था। उस समय इसे शाही धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। यहाँ सम्राट अच्छी फसल और समृद्धि के लिए विशेष पूजा करते थे। विशाल गुंबद,पारंपरिक चीनी स्थापत्य शैली और विस्तृत परिसर इसे चीन की सबसे अनोखी धरोहरों में शामिल करते हैं।

यह वही दौर था जब बीजिंग में प्रसिद्ध फॉरबिडन सिटी का निर्माण भी हुआ था। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 2017 के चीन दौरे के दौरान फॉरबिडन सिटी का भी दौरा किया था। इस बार टेंपल ऑफ हेवन की यात्रा को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात केवल औपचारिक यात्रा नहीं है,बल्कि इसका वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार,तकनीक,एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दे आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

टेंपल ऑफ हेवन की यात्रा के दौरान जिस तरह दोनों नेता सहज और सकारात्मक माहौल में दिखाई दिए,उससे यह संकेत भी मिला कि अमेरिका और चीन अपने मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच यह कूटनीतिक संतुलन वैश्विक स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल ट्रंप की चीन यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच व्यापार,सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ सकती है।