नई दिल्ली,14 मई (युआईटीवी)- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रानी बाग इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। देर रात फैक्ट्री से काम करके घर लौट रही एक महिला के साथ चलती बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना ने एक बार फिर राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें बनाई गई हैं।
पीड़िता के अनुसार वह देर रात फैक्ट्री में काम खत्म करने के बाद अपने घर लौट रही थी। महिला मंगोलपुरी स्थित एक फैक्ट्री में काम करती है और पीतमपुरा की झुग्गियों में रहती है। उसने पुलिस को बताया कि रास्ते में उसने सड़क किनारे खड़े एक व्यक्ति से समय पूछा था। आरोप है कि इसी दौरान युवक ने अचानक उसे जबरदस्ती पास में खड़ी एक स्लीपर बस के अंदर खींच लिया। महिला के मुताबिक बस के अंदर पहले से कुछ लोग मौजूद थे।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जैसे ही उसे बस के अंदर ले जाया गया,बस चल पड़ी और अंदर मौजूद लोगों ने उसके साथ दरिंदगी शुरू कर दी। महिला लगातार मदद के लिए चिल्लाती रही,लेकिन उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। उसने आरोप लगाया कि आरोपी पूरी रात उसे अलग-अलग इलाकों में घुमाते रहे और उसके साथ मारपीट भी की गई।
महिला के मुताबिक बस नांगलोई तक पहुँची और करीब दो घंटे तक आरोपियों ने उसके साथ अत्याचार किया। इसके बाद आरोपी उसे घायल अवस्था में सड़क किनारे फेंककर फरार हो गए। किसी तरह खुद को सँभालते हुए महिला ने आसपास के लोगों से मदद माँगी और फिर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की जाँच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। हालाँकि,महिला ने लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने से इनकार कर दिया। उसने पुलिस को बताया कि उसके परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसी के ऊपर है और यदि वह काम पर नहीं जाएगी तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।
जानकारी के मुताबिक महिला का पति बीमार है और परिवार में उसकी तीन छोटी बेटियाँ हैं। यही वजह है कि गंभीर मानसिक और शारीरिक आघात के बावजूद वह अस्पताल में भर्ती होने को लेकर परेशान दिखाई दी। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई बस को कब्जे में ले लिया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है,ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि बस के रूट,नंबर और उसमें मौजूद लोगों की पहचान के लिए तकनीकी जाँच भी की जा रही है। पुलिस ने दावा किया है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए कई टीमों को लगाया गया है और अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की जा रही है।
घटना सामने आने के बाद इलाके में लोगों के बीच गुस्सा और डर दोनों का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात काम से लौटने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। लोगों ने सवाल उठाया है कि राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बावजूद ऐसी घटनाएँ कैसे हो रही हैं।
महिला सुरक्षा को लेकर काम करने वाले सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए केवल सख्त कानून काफी नहीं हैं,बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी जरूरत है। साथ ही रात के समय काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
राजधानी दिल्ली में पहले भी महिलाओं के साथ सार्वजनिक परिवहन में अपराध की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिस गश्त बढ़ाने के दावे किए जाते रहे हैं,लेकिन इस तरह की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई कमियां मौजूद हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है और मेडिकल रिपोर्ट को जाँच का अहम हिस्सा बनाया गया है। अधिकारियों ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच तेजी से की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बस कहाँ से आई थी और घटना के दौरान उसका रूट क्या था।
इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर अपराध को लेकर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। समाज के कई वर्गों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं,बल्कि सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदारी भी जरूरी है।
फिलहाल पीड़िता सदमे में है और पुलिस उससे लगातार संपर्क में बनी हुई है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जाँच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को कानून के दायरे में लाने की कोशिश की जाएगी। राजधानी में हुई इस घटना ने एक बार फिर लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
