मुंबई,12 जून (युआईटीवी)- कंगना रनौत की बहुचर्चित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ शुक्रवार को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। लंबे समय से चर्चा में रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता पहले से ही बनी हुई थी। मुंबई पर हुए 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म एक अलग दृष्टिकोण से उस भयावह रात की कहानी पेश करती है। फिल्म में आतंकवादी हमलों को किसी पुलिस अधिकारी,सैनिक या राजनीतिक नेतृत्व के नजरिए से नहीं,बल्कि अस्पताल में मौजूद नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की आँखों से दिखाया गया है। रिलीज के पहले दिन फिल्म देखने पहुँचे दर्शकों ने अपने अनुभव साझा किए और ज्यादातर लोगों ने फिल्म की कहानी,भावनात्मक प्रस्तुति तथा कंगना रनौत के अभिनय की खुलकर प्रशंसा की।
फिल्म देखने के बाद बाहर निकल रहे कई दर्शक भावुक नजर आए। उनका कहना था कि यह केवल एक फिल्म नहीं,बल्कि उन गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि है,जिन्होंने संकट की घड़ी में अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। दर्शकों के अनुसार फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका मानवीय दृष्टिकोण है,जो आतंकवादी हमले जैसी भयावह घटना के बीच आम लोगों के साहस और समर्पण को सामने लाता है।
एक दर्शक ने फिल्म देखने के बाद कहा कि कहानी और कलाकारों का अभिनय काफी प्रभावशाली है। हालाँकि,उनका मानना था कि 26/11 हमले के कुछ दृश्यों को और अधिक वास्तविक और विस्तृत तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता था। इसके बावजूद उन्होंने फिल्म के मूल संदेश को बेहद प्रभावशाली बताया। उनके अनुसार फिल्म यह दर्शाने में सफल रहती है कि किसी भी संस्थान में हर कर्मचारी का महत्व होता है और संकट के समय वही लोग सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आते हैं,जिनकी भूमिका को सामान्य परिस्थितियों में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
एक अन्य दर्शक ने कहा कि यह फिल्म उन लोगों को जरूर देखनी चाहिए,जो केवल बड़े पदों पर बैठे लोगों को ही महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार समाज की रीढ़ वे कर्मचारी होते हैं,जो चुपचाप अपना काम करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका को जिस संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है,वह दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। उन्होंने कंगना रनौत के अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि अभिनेत्री ने अपने किरदार को पूरी गंभीरता और समझदारी के साथ निभाया है। दर्शक का यह भी कहना था कि फिल्म में किसी प्रकार का राजनीतिक संदेश या एजेंडा थोपने की कोशिश नहीं की गई है,जिससे कहानी और अधिक विश्वसनीय बन जाती है।
फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाओं में एक बात समान रूप से सामने आई कि यह पारंपरिक मसाला फिल्मों से अलग है। कई दर्शकों ने कहा कि जो लोग गंभीर और भावनात्मक विषयों पर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं,उन्हें यह फिल्म विशेष रूप से आकर्षित करेगी। एक दर्शक ने कहा कि कंगना रनौत का अभिनय दिल को छू लेने वाला है और फिल्म देखने के बाद नर्सिंग पेशे के प्रति सम्मान की भावना और बढ़ जाती है। हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि फिल्म का अंत थोड़ा और प्रभावशाली हो सकता था,लेकिन समग्र रूप से यह एक मजबूत और संवेदनशील प्रस्तुति है,जो बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
कुछ दर्शकों ने फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसके दृष्टिकोण को बताया। उनके अनुसार 26/11 हमले को नर्सों की नजर से दिखाना एक साहसिक और नया प्रयास है। एक दर्शक ने कहा कि फिल्म यह महसूस कराती है कि उस रात अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों ने किस तरह भय,अनिश्चितता और तनाव का सामना किया होगा। अस्पताल का माहौल,मरीजों की चिंता और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को फिल्म में काफी प्रभावी ढंग से दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत ने अपने किरदार में जान डाल दी है और दर्शकों को भावनात्मक रूप से कहानी से जोड़ने में सफलता हासिल की है।
महिला दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ भी काफी सकारात्मक रहीं। एक महिला ने कहा कि फिल्म देखने के बाद उनका मन हर नर्स को सलाम करने का करता है। उनके अनुसार समाज में नर्सों के योगदान को अक्सर उतनी पहचान नहीं मिलती,जितनी मिलनी चाहिए। फिल्म इस कमी को दूर करने का प्रयास करती है और दर्शकों को यह समझाती है कि अस्पतालों में काम करने वाले लोग केवल अपना पेशा नहीं निभाते,बल्कि कई बार दूसरों की जान बचाने के लिए अपने जीवन को भी जोखिम में डाल देते हैं। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत ने अपने किरदार को इतनी सच्चाई के साथ निभाया है कि कई दृश्यों में आँखें नम हो जाती हैं।
एक अन्य दर्शक ने फिल्म को पुरस्कारों के योग्य बताया। उनका कहना था कि निर्देशक और पूरी कलाकार टीम ने बेहद मेहनत और संवेदनशीलता के साथ इस विषय को पर्दे पर उतारा है। उन्होंने कहा कि फिल्म का वातावरण इतना वास्तविक लगता है कि कई बार ऐसा महसूस होता है,मानो दर्शक स्वयं उस दौर और उस परिस्थिति का हिस्सा हों। फिल्म की तकनीकी गुणवत्ता,पृष्ठभूमि संगीत और भावनात्मक दृश्यों की भी उन्होंने सराहना की।
फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है,जब मुंबई में सिलसिलेवार आतंकी हमलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इन हमलों में कई स्थानों को निशाना बनाया गया था और सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। फिल्म की कहानी कामा अस्पताल की नर्स गीता माधव गांधारे के इर्द-गिर्द घूमती है,जिसका किरदार कंगना रनौत ने निभाया है। कहानी दिखाती है कि किस प्रकार एक साधारण नर्स अचानक असाधारण परिस्थितियों का सामना करने के लिए मजबूर हो जाती है।
फिल्म का पहला हिस्सा नर्सों की रोजमर्रा की जिंदगी,उनके संघर्ष,जिम्मेदारियों और अस्पताल के माहौल को विस्तार से दिखाता है। इसमें यह दर्शाया गया है कि स्वास्थ्यकर्मी किस तरह सीमित संसाधनों और व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। यही हिस्सा दर्शकों को पात्रों के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता है और उनके जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराता है।
फिल्म का दूसरा भाग पूरी तरह उस भयावह रात पर केंद्रित है,जब आतंकवादी अस्पताल तक पहुँच जाते हैं। इस दौरान नर्सों और अन्य कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीजों,नवजात शिशुओं और अस्पताल में मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। बिना किसी हथियार और विशेष सुरक्षा के ये स्वास्थ्यकर्मी साहस,सूझबूझ और मानवीय संवेदनाओं के बल पर लोगों की जान बचाने का प्रयास करते हैं। फिल्म इसी संघर्ष और मानवीय साहस को अपने केंद्र में रखती है।
रिलीज के पहले दिन मिली प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि ‘भारत भाग्य विधाता’ केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई फिल्म नहीं है,बल्कि यह उन अनसुने नायकों की कहानी कहने का प्रयास है,जिनकी बहादुरी अक्सर इतिहास के बड़े अध्यायों में दब जाती है। फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि किसी भी संकट की घड़ी में केवल हथियार उठाने वाले लोग ही नायक नहीं होते,बल्कि वे लोग भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं,जो मानवता और कर्तव्य की भावना के साथ दूसरों की रक्षा के लिए खड़े रहते हैं।
कुल मिलाकर, ‘भारत भाग्य विधाता’ को पहले दिन दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कंगना रनौत के अभिनय,फिल्म की भावनात्मक गहराई और नर्सों के दृष्टिकोण से प्रस्तुत की गई कहानी को सराहा जा रहा है। कुछ कमियों के बावजूद फिल्म ने दर्शकों के दिलों को छूने में सफलता हासिल की है और यह संदेश देने में कामयाब रही है कि समाज के हर वर्ग और हर पेशे का अपना महत्व होता है। यही वजह है कि फिल्म को केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं,बल्कि साहस,सेवा और मानवीय मूल्यों को समर्पित एक भावनात्मक श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।
