नई दिल्ली,12 जून (युआईटीवी)- ओमान की खाड़ी में हुए एक समुद्री घटनाक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतर्राष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना वैश्विक समुद्री व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि भारतीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ अमेरिका की उस नीति को दर्शाती हैं,जिसे उन्होंने सशस्त्र डकैती और राज्य-स्तरीय समुद्री लूट की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में तीन भारतीय नागरिकों की जान चली गई,जो बेहद दुखद है। बाघेई ने मृतक भारतीय नाविकों के परिवारों और उनके मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भारतीय जनता और भारत सरकार के प्रति भी गहरी शोक-संवेदना प्रकट की।
ईरानी प्रवक्ता ने अपने बयान में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह अमेरिका को ऐसे कथित कानून-विरोधी व्यवहार के लिए जवाबदेह ठहराए। उनका कहना था कि इस प्रकार की कार्रवाइयाँ न केवल वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं,बल्कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को भी प्रभावित करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएँ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती हैं।
यह विवाद उस समय और गहरा गया,जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान जारी कर बताया कि पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेल्लो को निष्क्रिय किया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह टैंकर ईरानी तेल ले जाने का प्रयास कर रहा था और ओमान की खाड़ी से गुजरते समय चालक दल ने अमेरिकी बलों द्वारा दिए गए निर्देशों की बार-बार अनदेखी की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इसी कारण कार्रवाई की गई।
घटना के बाद जहाज पर मौजूद चालक दल के सदस्यों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। शुरुआती जानकारी में बताया गया था कि जहाज पर कुल 24 नाविक सवार थे,जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया। हालाँकि,तीन भारतीय नाविक लापता बताए गए थे। इस सूचना ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी थी और उनके परिजनों को लगातार अच्छी खबर का इंतजार था।
लेकिन गुरुवार को स्थिति और दुखद हो गई,जब केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तीनों भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि कर दी। उन्होंने कहा कि लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं और उनकी पहचान भी हो चुकी है। इसके साथ ही उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह समुद्री क्षेत्र में कार्यरत भारतीय समुदाय के लिए बेहद दुखद क्षण है।
सर्बानंद सोनोवाल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाए गए भारतीय नाविकों की जल्द-से-जल्द सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन भारतीय नागरिकों की मौत हुई है,उनके पार्थिव शरीरों को शीघ्र भारत लाने की व्यवस्था की जाए ताकि उनके परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सकें। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है।
इस घटना के बाद भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जैसन मीक्स को तलब किया गया और इस मामले में भारत की ओर से औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके जीवन की रक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी माँगी है और मामले की विस्तृत जाँच पर भी जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना ऐसे समय हुई है,जब पश्चिम एशिया क्षेत्र पहले से ही कई भू-राजनीतिक तनावों का सामना कर रहा है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है और ऐसे किसी भी विवाद का असर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मामले पर कई देशों की नजर बनी हुई है।
भारत के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतर्राष्ट्रीय जहाजरानी उद्योग में कार्यरत हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में समुद्री परिवहन से जुड़े जहाजों पर भारतीय नाविक अपनी सेवाएँ देते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री संघर्ष या सुरक्षा संकट का सीधा प्रभाव भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है।
फिलहाल इस घटना को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। जहाँ अमेरिका अपनी कार्रवाई को सुरक्षा और निर्देशों के पालन से जोड़ रहा है,वहीं ईरान इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है। इस बीच भारत का मुख्य फोकस अपने नागरिकों की सुरक्षा,मृतकों के पार्थिव शरीरों की स्वदेश वापसी और घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने पर बना हुआ है।
तीन भारतीय नाविकों की मौत ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। उनके परिवारों के लिए यह केवल एक अंतर्राष्ट्रीय विवाद नहीं,बल्कि अपूरणीय व्यक्तिगत क्षति है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घटना की आगे की जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में संबंधित पक्षों के बीच कोई स्पष्ट जवाबदेही तय हो पाती है।
