नई दिल्ली,16 जून (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को फ्रांस के एवियन पहुँचेंगे जहाँ वह जी7 शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेंगे। यह उनके दो देशों के महत्वपूर्ण यूरोपीय दौरे का तीसरा और अंतिम चरण होगा। फ्रांस और स्लोवाकिया की सफल यात्राओं के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ वैश्विक चुनौतियों,आर्थिक सहयोग और विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस सम्मेलन में भारत की भागीदारी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक मामलों में उसकी मजबूत होती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी का एवियन में औपचारिक स्वागत करेंगे। जी7 शिखर सम्मेलन इस वर्ष ऐसे समय आयोजित हो रहा है,जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं,भू-राजनीतिक तनाव,जलवायु परिवर्तन,ऊर्जा सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के दौरान “नई साझेदारी और अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता को फिर से बनाना” विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्य सत्र में भाग लेंगे। इस सत्र में जी7 देशों के नेताओं के अलावा साझेदार देशों के प्रतिनिधि और कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुख भी शामिल होंगे। इनमें विश्व बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक सहयोग को मजबूत करना,आर्थिक चुनौतियों का समाधान तलाशना और सतत विकास को गति देना होगा।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों और साझेदारी के माध्यम से ही संभव है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति और उनके विचार सम्मेलन की चर्चाओं को महत्वपूर्ण दिशा दे सकते हैं। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और जी7 में उसकी भागीदारी इसी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के अनुसार उनकी मुलाकात कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी,ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होगी। इन बैठकों में व्यापार,निवेश,प्रौद्योगिकी,ऊर्जा,सुरक्षा और वैश्विक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
सबसे अधिक ध्यान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात पर केंद्रित है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि दोनों नेता 17 जून को सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर हाल के महीनों में कई दौर की बातचीत हुई है।
अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार,प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप व्यापार समझौते पर हुई प्रगति की समीक्षा कर सकते हैं। यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो यह भारत और अमेरिका के बीच पहला औपचारिक व्यापक व्यापार समझौता बन सकता है। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता व्यापार,निवेश,आपूर्ति श्रृंखला,प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकता है।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न देशों के नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत भी करेंगे। ऐसे मंचों पर होने वाले संवाद अक्सर भविष्य की कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारियों की नींव रखते हैं। भारत के लिए यह अवसर अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को दुनिया के प्रमुख देशों के सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
शिखर सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित विशेष गाला डिनर में भी प्रधानमंत्री मोदी शामिल होंगे। यह आयोजन विभिन्न देशों के नेताओं के बीच अनौपचारिक संवाद और संबंधों को मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगा। कूटनीतिक दृष्टि से ऐसे कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है क्योंकि यहाँ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श किया जाता है।
भारत की जी7 में लगातार भागीदारी उसके बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है। इस वर्ष भारत 13वीं बार जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहा है,जबकि प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह तथ्य अपने आप में इस बात का संकेत है कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ भारत को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देख रही हैं।
विदेश मंत्रालय का मानना है कि जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की नियमित उपस्थिति वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता और योगदान की पहचान है। मंत्रालय के अनुसार,शांति,सुरक्षा,आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत ने लगातार रचनात्मक भूमिका निभाई है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उसकी भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जी20, वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ और अन्य बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से विकासशील देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं को प्रमुखता से उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर कहा है कि वैश्विक नीतियों और निर्णयों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए,ताकि दुनिया के सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।
जी7 शिखर सम्मेलन में भी भारत इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। ऊर्जा सुरक्षा,खाद्य सुरक्षा,जलवायु वित्त,डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक सुधार जैसे मुद्दों पर भारत की राय को गंभीरता से सुना जा रहा है। इसके साथ ही भारत यह भी जोर देता रहा है कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
फ्रांस के एवियन में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है,जब दुनिया कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी केवल भारत के हितों तक सीमित नहीं होगी,बल्कि वह विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की व्यापक चिंताओं को भी सामने रखेंगे। यही वजह है कि इस सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक नेतृत्व क्षमता के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से यह संदेश भी जाता है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। जी7 शिखर सम्मेलन में उनकी उपस्थिति और विभिन्न नेताओं के साथ होने वाली बैठकों पर दुनिया भर की नजरें टिकी रहेंगी,क्योंकि इन चर्चाओं से आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा प्रभावित हो सकती है।
