‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ पर बढ़ा विवाद (तस्वीर क्रेडिट@RccShashank1)

‘काला हिरण’ फिल्म पर बढ़ा विवाद,सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई टली,अगली तारीख 1 जुलाई तय

मुंबई,20 जून (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और आगामी फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के बीच चल रहा कानूनी विवाद अब और दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए अगली तारीख 1 जुलाई निर्धारित कर दी। अदालत का यह फैसला उस समय आया जब फिल्म निर्माताओं की ओर से कहा गया कि उन्हें सलमान खान द्वारा दायर की गई पूरी याचिका की प्रति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है और केवल एक आवेदन की कॉपी ही उपलब्ध कराई गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ के समक्ष फिल्म निर्माताओं के वकीलों ने यह मुद्दा उठाया कि बिना पूरी याचिका देखे वे अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने की स्थिति में नहीं हैं। इस पर अदालत ने सलमान खान के वकील को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि याचिका की संपूर्ण प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को तय कर दी।

यह विवाद फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ को लेकर खड़ा हुआ है,जो कथित तौर पर वर्षों पुराने चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित बताई जा रही है। इस मामले में सलमान खान का नाम लंबे समय से चर्चा में रहा है और यही वजह है कि फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर बहस शुरू हो गई थी। अब अभिनेता ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया है कि फिल्म में उनकी पहचान,व्यक्तित्व और सार्वजनिक छवि का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है।

सलमान खान की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर,प्रचार सामग्री और टीजर में ऐसे कई तत्व मौजूद हैं,जो सीधे तौर पर उनकी पहचान से मेल खाते हैं। अभिनेता का दावा है कि यह उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि फिल्म की रिलीज,उसके प्रचार-प्रसार और भविष्य में किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई जाए,जब तक कि इस मामले का समाधान नहीं हो जाता।

याचिका में फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, निर्देशक भरत श्रीनाटे, अक्षय पांडे और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों को पक्षकार बनाया गया है। इससे पहले हुई सुनवाई में अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि फिल्म निर्माता इस मामले में क्या पक्ष रखते हैं और अदालत इस विवाद को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

फिल्म के प्रथम लुक और टीजर ने विवाद को और हवा दे दी है। फिल्म में मुख्य किरदार का नाम अयान खान रखा गया है,जिसे अभिनेता काशिफ इकबाल खान निभा रहे हैं। हालाँकि,फिल्म निर्माताओं ने कहीं भी सीधे तौर पर सलमान खान का नाम नहीं लिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि यह किरदार स्पष्ट रूप से सलमान खान से प्रेरित दिखाई देता है।

दर्शकों ने टीजर सामने आने के बाद कई समानताओं की ओर ध्यान दिलाया। काशिफ इकबाल खान का पहनावा,उनका चलने का अंदाज,संवाद बोलने की शैली और कई हाव-भाव सलमान खान की सार्वजनिक छवि से काफी मिलते-जुलते बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस ब्रेसलेट को लेकर हुई,जिसे फिल्म के किरदार ने पहना हुआ है। यह ब्रेसलेट सलमान खान की पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है और वर्षों से उनके प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय रहा है। ऐसे में कई लोगों का मानना है कि फिल्म के निर्माता जानबूझकर सलमान की छवि से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग सलमान खान के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं और उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान और छवि का व्यावसायिक उपयोग उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। वहीं कुछ अन्य लोगों का तर्क है कि फिल्में अक्सर वास्तविक घटनाओं और सार्वजनिक चर्चाओं से प्रेरणा लेती हैं और इसे रचनात्मक स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल एक फिल्म के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है,बल्कि व्यक्तित्व अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन का भी महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। हाल के वर्षों में कई प्रसिद्ध हस्तियों ने अपनी छवि,नाम और पहचान के अनधिकृत उपयोग के खिलाफ अदालतों का रुख किया है। ऐसे मामलों में अदालतों को यह तय करना होता है कि किसी व्यक्ति के अधिकारों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के बीच सीमा कहाँ निर्धारित की जाए।

फिल्म उद्योग में भी इस मामले पर नजरें टिकी हुई हैं। यदि अदालत सलमान खान के पक्ष में कोई बड़ा आदेश देती है,तो भविष्य में वास्तविक घटनाओं या चर्चित व्यक्तियों से प्रेरित फिल्मों के निर्माण पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं यदि फिल्म निर्माताओं को राहत मिलती है,तो यह रचनात्मक स्वतंत्रता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा सकता है।

फिलहाल ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। निर्माता फिल्म को दर्शकों तक पहुँचाने की तैयारी में हैं,जबकि दूसरी ओर सलमान खान कानूनी लड़ाई के जरिए अपने अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें 1 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं,जहाँ इस बहुचर्चित विवाद में कोई महत्वपूर्ण कानूनी दिशा सामने आ सकती है।

दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा यह मामला केवल एक अभिनेता और फिल्म के बीच का विवाद नहीं रह गया है,बल्कि यह भारतीय मनोरंजन उद्योग में व्यक्तित्व अधिकारों,रचनात्मक स्वतंत्रता और कानूनी सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा और यह भी स्पष्ट करेगा कि वास्तविक घटनाओं तथा सार्वजनिक हस्तियों से प्रेरित फिल्मों की सीमाएँ क्या होनी चाहिए।