नई दिल्ली,26 जून (युआईटीवी)- फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप ई मुकाबले में फुटबॉल प्रेमियों को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला,जब इक्वाडोर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी को 2-1 से शिकस्त दे दी। फिलाडेल्फिया स्टेडियम में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक फुटबॉल का प्रदर्शन किया,लेकिन अंत में इक्वाडोर ने संयम,आत्मविश्वास और बेहतरीन टीमवर्क के दम पर ऐतिहासिक जीत अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ ही इक्वाडोर ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह पक्की कर ली,जबकि जर्मनी पहले ही नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई कर चुकी थी और ग्रुप ई में शीर्ष स्थान पर रही।
मुकाबले की शुरुआत बेहद तेज रही। मैच का दूसरा ही मिनट था,जब जर्मनी ने पहला हमला सफल बनाते हुए बढ़त हासिल कर ली। फ्लोरियन विर्ट्ज ने शानदार विजन का परिचय देते हुए गेंद को लेरॉय साने तक पहुँचाया। साने ने पेनल्टी क्षेत्र के अंदर से शानदार शॉट लगाया,जिसे इक्वाडोर का गोलकीपर रोक नहीं सका और गेंद सीधे गोलपोस्ट में जा समाई। शुरुआती गोल के साथ ही जर्मनी ने 1-0 की बढ़त बना ली और ऐसा लगने लगा कि चार बार की विश्व चैंपियन टीम मुकाबले पर अपना दबदबा कायम रखेगी।
हालाँकि, इक्वाडोर ने शुरुआती झटके से घबराने के बजाय शानदार मानसिक मजबूती दिखाई। टीम ने तेजी से अपने खेल की लय वापस हासिल की और लगातार जर्मनी के डिफेंस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसका परिणाम मुकाबले के नौवें मिनट में देखने को मिला,जब नीलसन एंगुलो ने लंबी दूरी से शानदार शॉट लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। एंगुलो का यह गोल मैच के सबसे खूबसूरत गोलों में शामिल रहा। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के गेंद पर जोरदार प्रहार किया और गेंद सीधे गोलपोस्ट के ऊपरी कोने में जाकर लगी। जर्मन गोलकीपर के पास इस शानदार शॉट को रोकने का कोई मौका नहीं था।
बराबरी का गोल होने के बाद मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। दोनों टीमों ने लगातार आक्रमण किए और गोल करने के कई अवसर बनाए। जर्मनी ने अपने अनुभवी खिलाड़ियों के दम पर गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की,जबकि इक्वाडोर ने तेज काउंटर अटैक के जरिए विपक्षी टीम को लगातार परेशान किया। पहले हाफ के दौरान दोनों टीमों के मिडफील्ड खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया और गेंद पर कब्जे के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिली। हालाँकि,कई अच्छे मौकों के बावजूद दोनों में से कोई भी टीम पहले हाफ में दूसरा गोल नहीं कर सकी और मध्यांतर तक मुकाबला 1-1 की बराबरी पर रहा।
दूसरे हाफ में इक्वाडोर पूरी तरह बदले हुए अंदाज में मैदान पर उतरा। टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई और जर्मनी के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। इक्वाडोर के खिलाड़ियों ने विंग से तेज आक्रमण किए और कॉर्नर किक के जरिए भी कई अवसर तैयार किए। दूसरी ओर जर्मनी ने भी जवाबी हमले किए,लेकिन इक्वाडोर की रक्षापंक्ति पूरे मुकाबले में बेहद संगठित नजर आई। डिफेंडरों ने जर्मनी के हर बड़े हमले को समय रहते विफल कर दिया।
मुकाबले का निर्णायक क्षण 77वें मिनट में आया। इक्वाडोर को दाहिने विंग से कॉर्नर किक मिली। गेंद सटीक तरीके से पेनल्टी क्षेत्र में पहुँचीं,जहाँ गोंजालो प्लाटा पहले से मौजूद थे। उन्होंने बेहतरीन टाइमिंग के साथ शानदार शॉट लगाया और गेंद को गोलपोस्ट के अंदर पहुंचाकर अपनी टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी। यह गोल न केवल मैच का निर्णायक गोल साबित हुआ,बल्कि इक्वाडोर के लिए नॉकआउट चरण का टिकट भी लेकर आया।
दूसरा गोल खाने के बाद जर्मनी ने बराबरी हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। टीम ने अंतिम मिनटों में लगातार आक्रमण किए और इक्वाडोर के गोल क्षेत्र में कई बार दबाव बनाया। लेकिन इक्वाडोर के डिफेंडरों ने अनुशासित प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को कोई स्पष्ट अवसर नहीं दिया। गोलकीपर ने भी कुछ महत्वपूर्ण बचाव किए और टीम की बढ़त को अंत तक सुरक्षित बनाए रखा।
रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही इक्वाडोर के खिलाड़ियों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। चार बार की विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ यह जीत इक्वाडोर के फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार सफलताओं में से एक मानी जा रही है। इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि टीम केवल भाग लेने के लिए नहीं,बल्कि बड़े विरोधियों को हराने की क्षमता भी रखती है।
इस मुकाबले में इक्वाडोर की सबसे बड़ी ताकत उसका सामूहिक खेल रहा। खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के साथ शानदार तालमेल दिखाया और पूरे मैच के दौरान अनुशासन बनाए रखा। नीलसन एंगुलो ने जहाँ शानदार बराबरी का गोल कर टीम में नई जान फूँकी,वहीं गोंजालो प्लाटा ने निर्णायक गोल कर जीत सुनिश्चित की। इसके अलावा टीम की रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने भी दबाव के क्षणों में शानदार प्रदर्शन करते हुए जर्मनी के हमलों को विफल किया।
दूसरी ओर,जर्मनी ने मैच की शानदार शुरुआत की थी, लेकिन शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही। टीम ने कई अवसर बनाए,लेकिन अंतिम क्षणों में सटीक फिनिशिंग की कमी साफ दिखाई दी। हालाँकि,इस हार का जर्मनी की नॉकआउट यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ा,क्योंकि टीम पहले ही राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह सुनिश्चित कर चुकी थी और ग्रुप ई में शीर्ष स्थान पर रही।
अब राउंड ऑफ 32 में पहुँचने के बाद इक्वाडोर का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। जिस तरह टीम ने दुनिया की सबसे सफल फुटबॉल टीमों में से एक जर्मनी को हराया है,उससे यह साफ हो गया है कि आगामी मुकाबलों में भी वह किसी भी बड़े प्रतिद्वंद्वी के लिए कड़ी चुनौती साबित हो सकती है। फुटबॉल प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी होंगी कि क्या इक्वाडोर इस शानदार लय को आगे भी जारी रखते हुए टूर्नामेंट में नया इतिहास रच पाएगा।
